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महोत्सव के तीसरे दिन कवियों ने समां बांधा
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धामपुर में नाट्यदीप महोत्सव में शामिल कलाकार व छात्र छात्राएं।
- फोटो : DHAMPUR
धामपुर। नाट्यदीप फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय नाट्यमहोत्सव के तीसरे दिन आरएसएम डिग्री कालेज के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. विजयपाल सिंह की पुस्तक ‘काव्य-कनक’ का विमोचन हुआ। बाद में कवि सम्मलेन हुआ।
रिटायर्ड प्राचार्य एल.बी. रावल ने काव्य-कनक पुस्तक का विश्लेषण करते हुए कहा कि इस संग्रह में व्यक्ति के कर्म, मर्म, धर्म और विविध स्वरूप को सहज रूप में व्यक्त करने का सफल प्रयास किया गया है। यह संग्रह भावी पीढ़ी को मानवीय समझ व संस्कृति की समुचित परिभाषा उपलब्ध करानेवाला सिद्ध होगा। इस अवसर पर अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षक डॉ. शंकर लाल शर्मा, अनिल शर्मा को नाट्यदीप फाउंडेशन सम्मान- 2020 प्रदान किया गया। रचनाकार की मधुर वाणी में काव्य-कनक की कर्म आधारित रचना- मोहक आभा मुख मंडल की, मीठी बोली सुंदर कविता अधरों पर मुस्कान अनूठी- संकेतों की नव परिभाषा, मुझे देखकर सकुचाने को- मैं संस्कार समझ बैठा, सुंदर तन के आकर्षण को -मैं तो प्यार समझ बैठा को लोगों ने जमकर सराहा।
समारोह में शुचि शर्मा, डॉ. पूनम चौहान, प्रदीप डेजी आदि ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। विमोचन करने वालों में डॉ. आदित्य अग्रवाल, पवन चौहान, कुसुम देवी, सुशील शर्मा, कैलाश कुमार, यशपाल सिंह ‘परम’, अमित गुप्ता, सुरेंद्र सिंह राजपूत आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने किया। कार्यक्रम में राजवीर सिंह माथुर, आर्यकांत, ऋतिक, तीन चौहान, तनवीर अहमद, मौ. सुहैल, जाहिद खान, राजेंद्र, राजीव, रिया, अवनि, साखी, मजहबी, मंतशा का योगदान रहा। इससे पहले निरामय योग चिकित्सा तथा राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। डॉ. संजीव कुमार ने एक्युप्रेशर विधि के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखने के गुर बताए।
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रिटायर्ड प्राचार्य एल.बी. रावल ने काव्य-कनक पुस्तक का विश्लेषण करते हुए कहा कि इस संग्रह में व्यक्ति के कर्म, मर्म, धर्म और विविध स्वरूप को सहज रूप में व्यक्त करने का सफल प्रयास किया गया है। यह संग्रह भावी पीढ़ी को मानवीय समझ व संस्कृति की समुचित परिभाषा उपलब्ध करानेवाला सिद्ध होगा। इस अवसर पर अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षक डॉ. शंकर लाल शर्मा, अनिल शर्मा को नाट्यदीप फाउंडेशन सम्मान- 2020 प्रदान किया गया। रचनाकार की मधुर वाणी में काव्य-कनक की कर्म आधारित रचना- मोहक आभा मुख मंडल की, मीठी बोली सुंदर कविता अधरों पर मुस्कान अनूठी- संकेतों की नव परिभाषा, मुझे देखकर सकुचाने को- मैं संस्कार समझ बैठा, सुंदर तन के आकर्षण को -मैं तो प्यार समझ बैठा को लोगों ने जमकर सराहा।
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समारोह में शुचि शर्मा, डॉ. पूनम चौहान, प्रदीप डेजी आदि ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। विमोचन करने वालों में डॉ. आदित्य अग्रवाल, पवन चौहान, कुसुम देवी, सुशील शर्मा, कैलाश कुमार, यशपाल सिंह ‘परम’, अमित गुप्ता, सुरेंद्र सिंह राजपूत आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने किया। कार्यक्रम में राजवीर सिंह माथुर, आर्यकांत, ऋतिक, तीन चौहान, तनवीर अहमद, मौ. सुहैल, जाहिद खान, राजेंद्र, राजीव, रिया, अवनि, साखी, मजहबी, मंतशा का योगदान रहा। इससे पहले निरामय योग चिकित्सा तथा राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। डॉ. संजीव कुमार ने एक्युप्रेशर विधि के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखने के गुर बताए।
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