{"_id":"583b2bd24f1c1b5c29088938","slug":"nageene-ke-rasgulle-par-bhi-notbandi-ka-asar","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगीने के रसगुल्ले पर भी नोटबंदी का असर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगीने के रसगुल्ले पर भी नोटबंदी का असर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Nov 2016 12:24 AM IST
विज्ञापन
fe
- फोटो : getty images
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर के नगीना में नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत के कारण नगीना के प्रसिद्ध रसगुल्लों की बिक्री पर भी असर पड़ रहा है। उत्तराखंड के तीर्थस्थलों और अन्य पर्यटन स्थलों को आने-जाने वाले लोग भी अब ये रसगुल्ले कम ही खरीद रहे हैं।
बता दें कि करीब छह दशक पूर्व नगीना की जलेबी और पूरी प्रसिद्ध थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी यहां जलेबी और पूरी का स्वाद लिया था। बाद में लाला जगदीश प्रसाद और उनके छोटे भाई तुलाराम ने नगीना की रेलवे स्टेशन की कैंटीन पर गरम गुलाब जामुन बनाए। इसे रसगुल्ला के नाम से प्रसिद्धि मिली है। इस मिठाई को तैयार कर ट्रेन यात्रियों को बेचा। तब से अब तक इस रसगुल्ले की मिठास और जायके में कोई कमी नहीं आई। यह मिठाई इतनी प्रसिद्ध हुई कि नगीना की पहचान बन गई। उत्तराखंड के पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के साथ ही शादी-विवाह के कार्यक्रमों में भी रसगुल्ले की काफी मांग रहती है।
अब नोटबंदी की घोषणा के बाद से रसगुल्ले की बिक्री पर काफी असर पड़ा है। सम्राट रेस्टोरेंट के स्वामी, संजीव गुप्ता और मोनू गुप्ता का कहना है कि नए नोट न होने के कारण लोगों को रसगुल्ले खरीदने में परेशानी हो रही है। रेलवे कैंटीन के स्वामी विकास गुप्ता भी कहते हैं कि जब तक लोगों के पास नई करेंसी की उपलब्धता नहीं बढ़ेगी। तब तक यह दिक्कत रहेगी। तुलाराम रेस्टोरेंट के स्वामी मोहित गुप्ता, रोहित गुप्ता और तुलाराम मिष्ठान भंडार स्वामी का कहना है कि अब केवल शादी-ब्याह वाले ग्राहकों में ही रसगुल्ले की अधिक खरीदारी हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि करीब छह दशक पूर्व नगीना की जलेबी और पूरी प्रसिद्ध थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी यहां जलेबी और पूरी का स्वाद लिया था। बाद में लाला जगदीश प्रसाद और उनके छोटे भाई तुलाराम ने नगीना की रेलवे स्टेशन की कैंटीन पर गरम गुलाब जामुन बनाए। इसे रसगुल्ला के नाम से प्रसिद्धि मिली है। इस मिठाई को तैयार कर ट्रेन यात्रियों को बेचा। तब से अब तक इस रसगुल्ले की मिठास और जायके में कोई कमी नहीं आई। यह मिठाई इतनी प्रसिद्ध हुई कि नगीना की पहचान बन गई। उत्तराखंड के पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के साथ ही शादी-विवाह के कार्यक्रमों में भी रसगुल्ले की काफी मांग रहती है।
विज्ञापन
अब नोटबंदी की घोषणा के बाद से रसगुल्ले की बिक्री पर काफी असर पड़ा है। सम्राट रेस्टोरेंट के स्वामी, संजीव गुप्ता और मोनू गुप्ता का कहना है कि नए नोट न होने के कारण लोगों को रसगुल्ले खरीदने में परेशानी हो रही है। रेलवे कैंटीन के स्वामी विकास गुप्ता भी कहते हैं कि जब तक लोगों के पास नई करेंसी की उपलब्धता नहीं बढ़ेगी। तब तक यह दिक्कत रहेगी। तुलाराम रेस्टोरेंट के स्वामी मोहित गुप्ता, रोहित गुप्ता और तुलाराम मिष्ठान भंडार स्वामी का कहना है कि अब केवल शादी-ब्याह वाले ग्राहकों में ही रसगुल्ले की अधिक खरीदारी हो रही है।
विज्ञापन