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जिले में लगातार बढ़ गया सरसों का रकबा
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जिले में लगातार बढ़ गया सरसों का रकबा
बिजनौर। सरसों जिले के किसानों की अब नई पसंदीदा फसल बन गई है। जिले में किसानों ने सरसों का रकबा पिछले कुछ सालों के मुकाबले 11 गुना तक बढ़ा दिया है। इस बार गेहूं के रकबे के बराबर किसानों ने सरसों बो दी है। सरसों का रकबा बढ़ने से गेहूं का रकबा इस बार काफी कम रहेगा। सरसों की फसल किसानों को अच्छी आमदनी देगी। जिले के किसान पहले केवल अपनी जरूरतों के हिसाब से ही सरसों की फसल बोते थे। सरसों का रकबा ज्याद से ज्यादा पांच हजार हेक्टेयर तक रहता था, लेकन इस बार किसानों ने गेहूं का रकबा 56 हजार हेक्टेयर से अधिक कर दिया है। किसानों ने गेहूं के रकबे में कटौती करके सरसों की फसल बोई है। सरसों और उसके तेल के दाम बाजार में चढ़े हुए हैं। इस वजह से किसानों का ध्यान इस बार गेहूं के बजाए उसके मुनाफे पर है।
यह है मुनाफे का गणित
एक हेक्टेयर जमीन में गेहूं की लागत करीब 81 हजार रुपये और सरसों की लागत केवल 15 हजार रुपये तक आती है। एक बीघा जमीन पर गेहूं पर ये लागत छह हजार 480 और सरसों में केवल 1200 रुपये आती है। एक बीघा जमीन से चार क्विंटल गेहूं और एक क्विंटल पीली सरसों निकलती है। चार क्विंटल गेहूं दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के दाम से आठ हजार रुपये तक का बिकता है, जबकि पीली सरसों इस समय नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। यानी एक बीघा गेहूं से केवल डेढ़ हजार रुपये तक की ही आमदनी होगी, जबकि सरसों से साढ़े सात हजार रुपये तक बच जाएंगे।
रबी फसलों की बुवाई की रिपोर्ट
फसल लक्ष्य पूर्ति
गेहूं 156260 62113
जौ 04 04
चना 23 23
मटर 105 105
मसूर 1163 1163
तोरिया 4241 4241
सरसों 4692 56107
नोट : आंकड़े कृषि विभाग से लिए गए हैं। लक्ष्य और पूर्ति हेक्टेयर में हैं।
अच्छा दाम देने वाली फसल बो रहे किसान
कृषि विशेषज्ञ डॉ. केके सिंह के अनुसार किसानों को बाजार में अच्छा दाम देने वाली फसल बोनी चाहिए। इस समय सरसों के दाम काफी अच्छे हैं। चने, शरदकालीन गन्ने में भी किसान सरसों बो रहे हैं। सहफसली खेती की वजह से भी रकबा बढ़ा है।
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बिजनौर। सरसों जिले के किसानों की अब नई पसंदीदा फसल बन गई है। जिले में किसानों ने सरसों का रकबा पिछले कुछ सालों के मुकाबले 11 गुना तक बढ़ा दिया है। इस बार गेहूं के रकबे के बराबर किसानों ने सरसों बो दी है। सरसों का रकबा बढ़ने से गेहूं का रकबा इस बार काफी कम रहेगा। सरसों की फसल किसानों को अच्छी आमदनी देगी। जिले के किसान पहले केवल अपनी जरूरतों के हिसाब से ही सरसों की फसल बोते थे। सरसों का रकबा ज्याद से ज्यादा पांच हजार हेक्टेयर तक रहता था, लेकन इस बार किसानों ने गेहूं का रकबा 56 हजार हेक्टेयर से अधिक कर दिया है। किसानों ने गेहूं के रकबे में कटौती करके सरसों की फसल बोई है। सरसों और उसके तेल के दाम बाजार में चढ़े हुए हैं। इस वजह से किसानों का ध्यान इस बार गेहूं के बजाए उसके मुनाफे पर है।
यह है मुनाफे का गणित
एक हेक्टेयर जमीन में गेहूं की लागत करीब 81 हजार रुपये और सरसों की लागत केवल 15 हजार रुपये तक आती है। एक बीघा जमीन पर गेहूं पर ये लागत छह हजार 480 और सरसों में केवल 1200 रुपये आती है। एक बीघा जमीन से चार क्विंटल गेहूं और एक क्विंटल पीली सरसों निकलती है। चार क्विंटल गेहूं दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के दाम से आठ हजार रुपये तक का बिकता है, जबकि पीली सरसों इस समय नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। यानी एक बीघा गेहूं से केवल डेढ़ हजार रुपये तक की ही आमदनी होगी, जबकि सरसों से साढ़े सात हजार रुपये तक बच जाएंगे।
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फसल लक्ष्य पूर्ति
गेहूं 156260 62113
जौ 04 04
चना 23 23
मटर 105 105
मसूर 1163 1163
तोरिया 4241 4241
सरसों 4692 56107
नोट : आंकड़े कृषि विभाग से लिए गए हैं। लक्ष्य और पूर्ति हेक्टेयर में हैं।
अच्छा दाम देने वाली फसल बो रहे किसान
कृषि विशेषज्ञ डॉ. केके सिंह के अनुसार किसानों को बाजार में अच्छा दाम देने वाली फसल बोनी चाहिए। इस समय सरसों के दाम काफी अच्छे हैं। चने, शरदकालीन गन्ने में भी किसान सरसों बो रहे हैं। सहफसली खेती की वजह से भी रकबा बढ़ा है।
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