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नई शिक्षा नीति में शोध की बहुआयामी व्यवस्था
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नई शिक्षा नीति में शोध की बहुआयामी व्यवस्था
बिजनौर। मेरठ कॉलेज मेरठ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंजाब सिंह मलिक ने नई शिक्षा नीति में शोध क्षेत्र में हुए बदलावों को शोधार्थियों को प्रोत्साहित करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में शोध की बहुआयामी, बहुउद्देशीय व्यवस्था है। इसलिए विद्यार्थियों को शोध कार्यों के लिए बढ़ावा दिया जाए। गुजरात विश्वविद्यालय के डॉ. विभास कुमार ने ऑनलाइन टूल्स रेफरेंस मैनेजमेंट पर प्रकाश डाला।
वर्धमान कॉलेज बिजनौर में चल रहे फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम अर्थात एफडीपी कार्यक्रम के तीसरे दिन नई शिक्षा नीति में शोध विषय पर जोर रहा। वक्ताओं एवं रिसर्च स्कॉलर्स ने नई शिक्षा नीति में शोध सुविधाओं को लेकर सवाल जवाब किए। मेरठ कॉलेज के वनस्पति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंजाब सिंह मलिक ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शोध व इंटर्नशिप के माध्यम से छात्रों के विकास पर जोर दिया गया है। गुजरात के ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय के डॉ. विभास कुमार ने ऑनलाइन टूल्स रेफरेंस मैनेजमेंट पर शोधार्थियों के लिए टूल्स वर्किंग सिस्टम की बिंदुवार जानकारी दी। डॉ. विभास का रामानुजन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ बिजनेस एंड रिसर्च- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य शोध है। संचालन डॉ. निदा खान ने किया। डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. ओपी सिंह व डॉ. साबिर समन्वय में सहयोगी रहे। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज, गुजरात विश्वविद्यालय के डॉ. विजय तिवारी, डॉ. लता सुवर्नेकर, डॉ. श्वेता ने आदि ने सवाल जवाब किए।
नई शिक्षा नीति में शोध बदलाव के 10 प्रमुख बिंदु
1- लघु प्रोजेक्ट दिए जाने पर जोर।
2- शोध का सरलीकरण ।
3- लघु शोध में विषय चयन की सुविधा आसान।
4- छात्रों में शोध की प्रवृत्ति उत्पन्न व विकसित करने के पर्याप्त अवसर।
5- शोध में एमओयू के माध्यम से अलग-अलग संस्थानों को जोड़ा गया।
6- शोध क्षेत्र में एक दूसरे के संसाधन का समुचित इस्तेमाल करने की सुविधा।
7- शोध के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान।
8- शोध के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय की व्यवस्था।
9- शोध के लिए विशेषज्ञों के चयन की सुविधा।
10- शोध के लिए ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध।
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बिजनौर। मेरठ कॉलेज मेरठ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंजाब सिंह मलिक ने नई शिक्षा नीति में शोध क्षेत्र में हुए बदलावों को शोधार्थियों को प्रोत्साहित करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में शोध की बहुआयामी, बहुउद्देशीय व्यवस्था है। इसलिए विद्यार्थियों को शोध कार्यों के लिए बढ़ावा दिया जाए। गुजरात विश्वविद्यालय के डॉ. विभास कुमार ने ऑनलाइन टूल्स रेफरेंस मैनेजमेंट पर प्रकाश डाला।
वर्धमान कॉलेज बिजनौर में चल रहे फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम अर्थात एफडीपी कार्यक्रम के तीसरे दिन नई शिक्षा नीति में शोध विषय पर जोर रहा। वक्ताओं एवं रिसर्च स्कॉलर्स ने नई शिक्षा नीति में शोध सुविधाओं को लेकर सवाल जवाब किए। मेरठ कॉलेज के वनस्पति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंजाब सिंह मलिक ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शोध व इंटर्नशिप के माध्यम से छात्रों के विकास पर जोर दिया गया है। गुजरात के ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय के डॉ. विभास कुमार ने ऑनलाइन टूल्स रेफरेंस मैनेजमेंट पर शोधार्थियों के लिए टूल्स वर्किंग सिस्टम की बिंदुवार जानकारी दी। डॉ. विभास का रामानुजन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ बिजनेस एंड रिसर्च- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य शोध है। संचालन डॉ. निदा खान ने किया। डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. ओपी सिंह व डॉ. साबिर समन्वय में सहयोगी रहे। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज, गुजरात विश्वविद्यालय के डॉ. विजय तिवारी, डॉ. लता सुवर्नेकर, डॉ. श्वेता ने आदि ने सवाल जवाब किए।
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नई शिक्षा नीति में शोध बदलाव के 10 प्रमुख बिंदु
1- लघु प्रोजेक्ट दिए जाने पर जोर।
2- शोध का सरलीकरण ।
3- लघु शोध में विषय चयन की सुविधा आसान।
4- छात्रों में शोध की प्रवृत्ति उत्पन्न व विकसित करने के पर्याप्त अवसर।
5- शोध में एमओयू के माध्यम से अलग-अलग संस्थानों को जोड़ा गया।
6- शोध क्षेत्र में एक दूसरे के संसाधन का समुचित इस्तेमाल करने की सुविधा।
7- शोध के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान।
8- शोध के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय की व्यवस्था।
9- शोध के लिए विशेषज्ञों के चयन की सुविधा।
10- शोध के लिए ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध।