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Bijnor News: सांसद गिरीश चंद्र ने ने शिक्षामित्रों के मुद्दे को सदन में उठाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर (बिजनौर)। नगीना लोकसभा क्षेत्र से बसपा सांसद गिरीश चंद्र ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के मुद्दे को सदन में उठाया। उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को अन्य प्रदेशों की तरह से राज्य कर्मचारी का दर्जा देकर समान कार्य-समान वेतन और अन्य सरकारी सुविधाएं प्रदान करने की मांग की।
सांसद गिरीश चंद्र ने सदन को अवगत कराया कि शिक्षामित्र की चयन प्रक्रिया में गांव के सर्वाधिक अंक प्राप्त युवक की मेरिट के आधार पर हुई थी। शिक्षामित्र पूरे मनोयोग से प्राथमिक स्कूलों में 23 वर्षों से शिक्षा सेवाएं दे रहे हैं। पूर्व की बसपा सरकार ने सभी शिक्षामित्रों का दो वर्ष का बीटीसी प्रशिक्षण डायट के माध्यम से कराया गया था । वर्तमान में शिक्षक की योग्यता के जो मानक एनसीटीई निर्धारित है, वे सभी शिक्षामित्रों ने पूरे कर लिए हैं।
दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश कि भाजपा सरकार महंगाई से इस दौर में शिक्षामित्रों से केवल 10 हजार रुपये प्रतिमाह पर कार्य करा रही है। अन्य राज्यों बिहार, ओडिशा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड राज्यों ने शिक्षामित्रों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देकर समान कार्य-समान वेतन व अन्य सुविधाएं लागू की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को भी अन्य राज्यों की तर्ज पर सुविधा मुहैया कराने की मांग उठाई। सांसद ने बताया कि इस मांग वह तीन बार सदन में उठा चुके है, लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रगति नहीं हुई है।
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सांसद मलूक नागर ने उठाया औषधीय खेती को बढ़ावा देने का मुद्दा
बिजनौर। शीतकालीन सत्र में सात दिसंबर को बिजनौर लोकसभा से सांसद मलूक नागर ने परंपरागत और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का मुद्दा उठाया। कहा कि हमारे देश में पूर्वजो के जमाने से ही औषधियो का भंडार रहा है। सरकार बीज, खाद व कुल पैदावार पर मदद करें। साथ ही बिक्री के दौरान 15 से 20 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दें। पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश में इसकी खेती के लिए क्षेत्र चिह्नित करने से संबंधित जवाब आयुष मंत्री से मांगा था। इस संबंध में केंद्रीय सरकार ने बताया कि वर्तमान में आयुष मंत्रालय में औषधीय खेती के लिए सब्सिडी देने की कोई योजना नहीं चल रही है। आयुष मंत्रालय ने औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन की केंद्रीय प्रायोजित योजना वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2020-21 तक संचालित की थी।
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धामपुर (बिजनौर)। नगीना लोकसभा क्षेत्र से बसपा सांसद गिरीश चंद्र ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के मुद्दे को सदन में उठाया। उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को अन्य प्रदेशों की तरह से राज्य कर्मचारी का दर्जा देकर समान कार्य-समान वेतन और अन्य सरकारी सुविधाएं प्रदान करने की मांग की।
सांसद गिरीश चंद्र ने सदन को अवगत कराया कि शिक्षामित्र की चयन प्रक्रिया में गांव के सर्वाधिक अंक प्राप्त युवक की मेरिट के आधार पर हुई थी। शिक्षामित्र पूरे मनोयोग से प्राथमिक स्कूलों में 23 वर्षों से शिक्षा सेवाएं दे रहे हैं। पूर्व की बसपा सरकार ने सभी शिक्षामित्रों का दो वर्ष का बीटीसी प्रशिक्षण डायट के माध्यम से कराया गया था । वर्तमान में शिक्षक की योग्यता के जो मानक एनसीटीई निर्धारित है, वे सभी शिक्षामित्रों ने पूरे कर लिए हैं।
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दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश कि भाजपा सरकार महंगाई से इस दौर में शिक्षामित्रों से केवल 10 हजार रुपये प्रतिमाह पर कार्य करा रही है। अन्य राज्यों बिहार, ओडिशा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड राज्यों ने शिक्षामित्रों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देकर समान कार्य-समान वेतन व अन्य सुविधाएं लागू की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को भी अन्य राज्यों की तर्ज पर सुविधा मुहैया कराने की मांग उठाई। सांसद ने बताया कि इस मांग वह तीन बार सदन में उठा चुके है, लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रगति नहीं हुई है।
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सांसद मलूक नागर ने उठाया औषधीय खेती को बढ़ावा देने का मुद्दा
बिजनौर। शीतकालीन सत्र में सात दिसंबर को बिजनौर लोकसभा से सांसद मलूक नागर ने परंपरागत और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का मुद्दा उठाया। कहा कि हमारे देश में पूर्वजो के जमाने से ही औषधियो का भंडार रहा है। सरकार बीज, खाद व कुल पैदावार पर मदद करें। साथ ही बिक्री के दौरान 15 से 20 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दें। पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश में इसकी खेती के लिए क्षेत्र चिह्नित करने से संबंधित जवाब आयुष मंत्री से मांगा था। इस संबंध में केंद्रीय सरकार ने बताया कि वर्तमान में आयुष मंत्रालय में औषधीय खेती के लिए सब्सिडी देने की कोई योजना नहीं चल रही है। आयुष मंत्रालय ने औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन की केंद्रीय प्रायोजित योजना वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2020-21 तक संचालित की थी।