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Bijnor News: कमल की खेती में खूब बरस रही मां लक्ष्मी की कृपा
Sun, 16 Feb 2025 11:22 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 16 Feb 2025 11:22 PM IST
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अफजलगढ़ पीलीडैम के पास कमल के फूल दिखाता श्रमिक। संवाद
अफजलगढ़ (बिजनौर)। कमल की खेती में मां लक्ष्मी की कृपा खूब बरस रही है। अफजलगढ़ के जलीय इलाकों में कमल उगाया जा रहा है। जड़, फल और फूल तीनों का बेचकर आमदनी की जा रही है। शिवरात्रि, दीपावली और अन्य त्योहारों में फूल की मांग बढ़ती है जबकि जड़ को सब्जी और फल को कमलगट्टे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
पीलीबांध और हरेवली डैम के जलाशय में कमल की खेती के लिए सरकारी स्तर पर पहले से ही ठेका छूटता रहा है। मगर अब गांव मुरलीवाला, भूतपुरी और रेहड़ के तालाबों में भी कमल उगाया जा रहा है। किसानों ने खेतों में ही तालाब तक बना लिए हैं। पौधे की जड़ के नीचे निकली कमल ककड़ी/भंशिंडे को सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है। सावन माह तथा दीपावली के समय लक्ष्मी पूजन में कमल के फूल का बहुत महत्व रहता है। उसी समय फूल तोड़कर बेचा जाता है।
नवंबर तक खिल जाता है फूल : कमलदाने की तुड़ाई कर रहे उन्नाव जिले के सरवन गांव निवासी रामप्रसाद व अनूप ने बताया कि कमलदाना आषाढ़ माह में बोया जाता है ओर जो करीब नवंबर में इसका फूल खिल जाता है। दिसंबर से जनवरी के बीच कमलदाना पककर तैयार हो जाता है।
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मई माह के बाद पानी उतरने पर कमल के नीचे से सब्जी भशिंडे की खोदाई की जाती है। वर्तमान में हरेवली बांध व पीली बांध क्षेत्र में इसकी खेती बहुतायत में हो रही है।
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पीलीबांध और हरेवली डैम के जलाशय में कमल की खेती के लिए सरकारी स्तर पर पहले से ही ठेका छूटता रहा है। मगर अब गांव मुरलीवाला, भूतपुरी और रेहड़ के तालाबों में भी कमल उगाया जा रहा है। किसानों ने खेतों में ही तालाब तक बना लिए हैं। पौधे की जड़ के नीचे निकली कमल ककड़ी/भंशिंडे को सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है। सावन माह तथा दीपावली के समय लक्ष्मी पूजन में कमल के फूल का बहुत महत्व रहता है। उसी समय फूल तोड़कर बेचा जाता है।
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नवंबर तक खिल जाता है फूल : कमलदाने की तुड़ाई कर रहे उन्नाव जिले के सरवन गांव निवासी रामप्रसाद व अनूप ने बताया कि कमलदाना आषाढ़ माह में बोया जाता है ओर जो करीब नवंबर में इसका फूल खिल जाता है। दिसंबर से जनवरी के बीच कमलदाना पककर तैयार हो जाता है।
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मई माह के बाद पानी उतरने पर कमल के नीचे से सब्जी भशिंडे की खोदाई की जाती है। वर्तमान में हरेवली बांध व पीली बांध क्षेत्र में इसकी खेती बहुतायत में हो रही है।