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Bijnor News: कार्बेट रिजर्व में सफारी के दौरान मोबाइल प्रतिबंधित
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अथहर महमूद सिद्दकी
कालागढ़-बिजनौर। कार्बेट टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी के दौरान मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगा दी गई है। इस निर्णय से पर्यटकों को वन्यजीवों और प्रकृति के नजारों का आनंद बिना किसी व्यवधान के लेने का अवसर मिलेगा। यह प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य वनों की निस्तब्धता बनाए रखना और वन्यजीवों को परेशान होने से बचाना है। अब पर्यटक अपनी यादों को कैद करने के लिए डिजिटल कैमरों का ही सहारा लेना पड़ेगा।
मोबाइल फोन क्रांति ने जहां जीवन को सुगम बनाया है, वहीं टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान इसकी घनघनाहट प्रकृति की शांति भंग करती थी। अब मोबाइल फोन की जगह कैमरा होगा, जिससे पर्यटक बाहरी दुनिया से कटकर पूरी तरह प्रकृति में डूब सकेंगे। वन्यजीवों और प्रकृति की तस्वीरें व वीडियो अब पर्यटक के घर लौटने पर ही वायरल हो पाएंगे, जिससे तुरंत साझा करने का चलन कम होगा। सफारी के दौरान वीडियो कॉल जैसे उपयोग भी अब संभव नहीं होंगे।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बड़ोला ने बताया कि यह रोक वन्यजीवों और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लगाई गई है। वनों में मोबाइल सिग्नल की समस्या और वन्यजीवों को देखकर तेज गति से गाड़ियां दौड़ाने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है। रात्रि विश्राम करने वाले पर्यटक अपने कमरों में मोबाइल ले जा सकते हैं, लेकिन जंगल सफारी पर नहीं। इस नियम का उल्लंघन करने पर नेचर गाइड, टैक्सी चालकों और मोबाइल फोन ले जाने वाले पर्यटकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कालागढ़-बिजनौर। कार्बेट टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी के दौरान मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगा दी गई है। इस निर्णय से पर्यटकों को वन्यजीवों और प्रकृति के नजारों का आनंद बिना किसी व्यवधान के लेने का अवसर मिलेगा। यह प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य वनों की निस्तब्धता बनाए रखना और वन्यजीवों को परेशान होने से बचाना है। अब पर्यटक अपनी यादों को कैद करने के लिए डिजिटल कैमरों का ही सहारा लेना पड़ेगा।
मोबाइल फोन क्रांति ने जहां जीवन को सुगम बनाया है, वहीं टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान इसकी घनघनाहट प्रकृति की शांति भंग करती थी। अब मोबाइल फोन की जगह कैमरा होगा, जिससे पर्यटक बाहरी दुनिया से कटकर पूरी तरह प्रकृति में डूब सकेंगे। वन्यजीवों और प्रकृति की तस्वीरें व वीडियो अब पर्यटक के घर लौटने पर ही वायरल हो पाएंगे, जिससे तुरंत साझा करने का चलन कम होगा। सफारी के दौरान वीडियो कॉल जैसे उपयोग भी अब संभव नहीं होंगे।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बड़ोला ने बताया कि यह रोक वन्यजीवों और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लगाई गई है। वनों में मोबाइल सिग्नल की समस्या और वन्यजीवों को देखकर तेज गति से गाड़ियां दौड़ाने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है। रात्रि विश्राम करने वाले पर्यटक अपने कमरों में मोबाइल ले जा सकते हैं, लेकिन जंगल सफारी पर नहीं। इस नियम का उल्लंघन करने पर नेचर गाइड, टैक्सी चालकों और मोबाइल फोन ले जाने वाले पर्यटकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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