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गोल्डन कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे प्रवासी मजदूर
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गोल्डन कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे प्रवासी मजदूर
बिजनौर। कोविड-19 के कारण लॉकडाउन के दौरान दूसरे प्रदेशों अथवा अन्य जिलों से अपने गांव लौटे प्रवासी मजदूर गोल्डन कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। शासन के निर्देश पर जनपद के करीब 350 प्रवासी मजदूरों के प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं, लेकिन अभी तक केवल 25 प्रवासी मजदूरों ने ही अपने गोल्डन कार्ड बनवाए हैं।
आयुष्मान भारत योजना की जिला कोआर्डिनेटर डा. नताशा सिंह के अनुसार जिले के कुल चयनित दो लाख 90 हजार 334 में परिवारों के लगभग 12 लाख गोल्डन कार्ड बनने हैं, लेकिन अभी तक करीब दो लाख 50 हजार 780 गोल्डन कार्ड बने हैं। अभी करीब दस लाख गोल्डन कार्ड बनने शेष हैं।
हालांकि लॉकडाउन के दौरान गोल्डन कार्ड बनाने के काम को रोक दिया गया था। अब फिर से शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश पर जिले में करीब 350 प्रवासी मजदूरों के गोल्डन कार्ड बनने हैं। उन्हें कई बार प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से सूचित किया जा चुका है, लेकिन अब तक मात्र 25 प्रवासियों ने अपने कार्ड बनवाए हैं।
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12 लाख सदस्यों के बनने हैं गोल्डन कार्ड
आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डा. पीआर नायर ने बताया कि जिले में चयनित करीब दो लाख 90 हजार 334 परिवारों के लगभग 12 लाख सदस्यों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं। अब तक करीब दो लाख 50 हजार 780 गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। अब तक लगभग 14 हजार 660 लोग इस योजना के अंतर्गत विभिन्न बीमारियों का इलाज करा चुके हैं।
न चिकित्सक और न संसाधन, कैसे हो सरकारी इलाज
बिजनौर। जिले में स्वीकृत पदों के सापेक्ष करीब आधे चिकित्सकों के पद बरसों से खाली पड़े हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन जिले के विभिन्न प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व अन्य अस्पतालों में 169 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनके सापेक्ष केवल 90 ही तैनात हैं। जिले में 79 चिकित्सक कम हैं। जिला पुरुष चिकित्सालय में 27 पदों के सापेक्ष वर्तमान में मात्र 13 ही चिकित्सक कार्यरत हैं। जिला महिला चिकित्सालय में नियमित चिकित्साधिकारियों के 11 पद स्वीकृत बताए जाते हैं, लेकिन इनके सापेक्ष सीएमएस समेत चार ही नियमित चिकित्सक कार्यरत हैं। सीएमओ डा. विजय कुमार यादव के अनुसार रिक्त पदों की रिपोर्ट शासन को नियमित भेजी जाती है।
जिले में ये निजी अस्पताल हैं चयनित
देवराज हॉस्पिटल, सुमित्रा नर्सिंग होम, बीना प्रकाश नर्सिंग होम, नवज्योति आंखों का अस्पताल, एमएम नर्सिंग होम, बुद्घा सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, हीरालाल नर्सिंग होम, आरसी हॉस्पिटल, आयुष्मान हॉस्पिटल, पुलकित मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दयावती नर्सिंग होम, दमयंती नर्सिंग होम, संजीवनी नर्सिंगहोम, श्री साईं नर्सिंग होम, केएमएम नर्सिंग होम, शक्ति नर्सिंगहोम, पंडित चंद्रकांत आत्रेय हॉस्पिटल, करन हॉस्पिटल, विकास नर्सिंगहोम, सरल नर्सिंगहोम आदि हैं।
निजी अस्पतालों के लिए पर्याप्त नहीं हैं पैकेेज
नाम न छापने की शर्त पर कुछ प्राइवेट चिकित्सकों ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना सरकारी अस्पतालों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स तक के लिए काफी बेहतर है। सरकार की ओर से विभिन्न बीमारियों के लिए तय की गई धनराशि और मानक निजी अस्पतालों के लिए पर्याप्त नहीं है। इस कारण प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों का इलाज करने में दिक्कत आ रही है।
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बिजनौर। कोविड-19 के कारण लॉकडाउन के दौरान दूसरे प्रदेशों अथवा अन्य जिलों से अपने गांव लौटे प्रवासी मजदूर गोल्डन कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। शासन के निर्देश पर जनपद के करीब 350 प्रवासी मजदूरों के प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं, लेकिन अभी तक केवल 25 प्रवासी मजदूरों ने ही अपने गोल्डन कार्ड बनवाए हैं।
आयुष्मान भारत योजना की जिला कोआर्डिनेटर डा. नताशा सिंह के अनुसार जिले के कुल चयनित दो लाख 90 हजार 334 में परिवारों के लगभग 12 लाख गोल्डन कार्ड बनने हैं, लेकिन अभी तक करीब दो लाख 50 हजार 780 गोल्डन कार्ड बने हैं। अभी करीब दस लाख गोल्डन कार्ड बनने शेष हैं।
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हालांकि लॉकडाउन के दौरान गोल्डन कार्ड बनाने के काम को रोक दिया गया था। अब फिर से शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश पर जिले में करीब 350 प्रवासी मजदूरों के गोल्डन कार्ड बनने हैं। उन्हें कई बार प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से सूचित किया जा चुका है, लेकिन अब तक मात्र 25 प्रवासियों ने अपने कार्ड बनवाए हैं।
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12 लाख सदस्यों के बनने हैं गोल्डन कार्ड
आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डा. पीआर नायर ने बताया कि जिले में चयनित करीब दो लाख 90 हजार 334 परिवारों के लगभग 12 लाख सदस्यों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं। अब तक करीब दो लाख 50 हजार 780 गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। अब तक लगभग 14 हजार 660 लोग इस योजना के अंतर्गत विभिन्न बीमारियों का इलाज करा चुके हैं।
न चिकित्सक और न संसाधन, कैसे हो सरकारी इलाज
बिजनौर। जिले में स्वीकृत पदों के सापेक्ष करीब आधे चिकित्सकों के पद बरसों से खाली पड़े हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन जिले के विभिन्न प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व अन्य अस्पतालों में 169 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनके सापेक्ष केवल 90 ही तैनात हैं। जिले में 79 चिकित्सक कम हैं। जिला पुरुष चिकित्सालय में 27 पदों के सापेक्ष वर्तमान में मात्र 13 ही चिकित्सक कार्यरत हैं। जिला महिला चिकित्सालय में नियमित चिकित्साधिकारियों के 11 पद स्वीकृत बताए जाते हैं, लेकिन इनके सापेक्ष सीएमएस समेत चार ही नियमित चिकित्सक कार्यरत हैं। सीएमओ डा. विजय कुमार यादव के अनुसार रिक्त पदों की रिपोर्ट शासन को नियमित भेजी जाती है।
जिले में ये निजी अस्पताल हैं चयनित
देवराज हॉस्पिटल, सुमित्रा नर्सिंग होम, बीना प्रकाश नर्सिंग होम, नवज्योति आंखों का अस्पताल, एमएम नर्सिंग होम, बुद्घा सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, हीरालाल नर्सिंग होम, आरसी हॉस्पिटल, आयुष्मान हॉस्पिटल, पुलकित मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दयावती नर्सिंग होम, दमयंती नर्सिंग होम, संजीवनी नर्सिंगहोम, श्री साईं नर्सिंग होम, केएमएम नर्सिंग होम, शक्ति नर्सिंगहोम, पंडित चंद्रकांत आत्रेय हॉस्पिटल, करन हॉस्पिटल, विकास नर्सिंगहोम, सरल नर्सिंगहोम आदि हैं।
निजी अस्पतालों के लिए पर्याप्त नहीं हैं पैकेेज
नाम न छापने की शर्त पर कुछ प्राइवेट चिकित्सकों ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना सरकारी अस्पतालों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स तक के लिए काफी बेहतर है। सरकार की ओर से विभिन्न बीमारियों के लिए तय की गई धनराशि और मानक निजी अस्पतालों के लिए पर्याप्त नहीं है। इस कारण प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों का इलाज करने में दिक्कत आ रही है।