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बायो मेडिकल वेस्ट का रोजाना किया जा रहा निस्तारण

Tue, 14 Jul 2020 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2020 11:33 PM IST
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Medical waste being disposed of daily
मेडिकल वेस्ट का रोजाना किया जा रहा निस्तारण
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बिजनौर। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण जिले के विशेष कोविड हेल्थ सेंटर और अन्य अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट पर कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। इनमें संक्रमित मरीजों, चिकित्सक और अन्य कर्मचारियों के संसाधनों के प्रयोग से ही मेडिकल वेस्ट हो रहा है। इसके प्रबंधन को लेकर चिकित्साधिकारियों का कहना है कि सामान्य मरीजों की संख्या कम होने के कारण बायो मेडिकल वेस्ट में बढ़ोतरी नहीं हुई है।
ओपीडी बंद होने से मेडिकल कचरा भी नहीं बढ़ा है। जिला प्रशासन की ओर से ग्राम स्वाहेड़ी स्थित मंडलीय राजस्व प्रशिक्षण केंद्र को एल-1 अटैच फैसिलिटीयुक्त 130 बेड का विशेष कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। यहां पर केवल जिले में कोरोना पॉजिटिव निकलने वाले एसिंप्ट्रोमेटिक मरीज भर्ती किए जाते हैं, जबकि सिंप्ट्रोमेटिक रोगियों को तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी मुरादाबाद में बने विशेष कोविड हॉस्पिटल में भेजा जाता है। इसके अलावा जिला अस्पताल में कोविड ट्रू नॉट मशीन से कोविड जांच की सुविधा है, जबकि अन्य अस्पतालों में टीम सैंपल लेकर जांच के लिए नोएडा प्रयोगशाला भेजती है। मार्च माह में लगाये गए लॉकडाउन के बाद से जिला अस्पताल में सामान्य ओपीडी बंद कर दी गई थी। सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव के अनुसार लॉकडाउन से पूर्व जिला अस्पताल में रोजाना करीब 1200 मरीजों की सामान्य ओपीडी होती थी, जबकि लगभग 300 मरीज इमरजेंसी उपचार के लिए पहुंचते थे। मरीजों की संख्या घटने से इस अस्पताल में बायो-मेडिकल वेस्ट पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। वर्तमान में मेरठ की एक प्राइवेट कंपनी की वेन रोजाना आती है और अस्पताल का बायो-मेडिकल वेस्ट ले जाती है। इस अस्पताल में पहले औसतन रोजाना करीब आठ से दस किलोग्राम मेडिकल व सामान्य वेस्ट एकत्रित होता था।
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अस्पताल में सिर्फ दो किलो बढ़ा बायो मेडिकल वेस्ट
सीएमओ बताते हैं कि कोविड केयर सेंटर स्वाहेड़ी और अन्य अस्पतालों में कोरोना टेस्ट करने के लिए टीम को पीपीई किट पहननी पड़ती है। टीम को संक्रमण से बचने के लिए पीपीई किट पहनने के साथ मास्क व दस्ताने भी लगाने पड़ते हैं। कोरोना टेस्ट व सैंपल शुरू होने के बाद यहां पर करीब दो किलो कचरा बढ़ गया है। पीपीई किट, दस्तानों और मास्कों के बायो मेडिकल वेस्ट को अलग-अलग एकत्रित किया जाता है। उस वेस्ट को मेरठ की एक एजेंसी की तरफ से आने वाली टीम को अलग सौंपा जाता है।
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सामान्य मरीजों की संख्या हुई कम
जिला अस्पताल में सामान्य मरीजों की संख्या बहुत कम हो गई है। यहां केवल चिकित्सक एवं अन्य कर्मचारी पीपीई किट, दस्ताने और अन्य संसाधनों का प्रयोग कर रहें, इससे मेडिकल वेस्ट में कमी आई है। इसके अलावा वेस्ट का निस्तारण करने में कर्मचारी भी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। लगातार वे मेडिकल वेस्ट को एकत्रित कर डस्टबिन में डाल रहे हैं।
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