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Bijnor News: खूब हुआ अलग करने का प्रयास पर कम नहीं हो सकी नजदीकी
Tue, 21 Oct 2025 11:34 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 21 Oct 2025 11:34 PM IST
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किरतपुर। गांव हुसैनपुर सुल्तान में दो बच्चों की मां आरती (39) और ललित (21) नेे जहर निगलकर आत्महत्या कर ली। इसमें गांव वालों का कहना है कि तमाम बंदिशों के बाद भी दोनों की नजदीकियां कम नहीं हो पाई थी और अंजाम घर उजड़ने तक पहुंच गया।
बताया कि आरती से दूर करने के लिए ललित को परिवार के लोगों ने हरिद्वार में नौकरी करने के लिए भेज दिया था। मगर वह वहां नहीं ठहरा और पंद्रह दिन के बाद ही लौटकर गांव आ गया था। जगमोहन किरतपुर के एक होटल पर काम करता है। वह काम पर चला जाता तो उसकी गैरमौजूदगी में ललित उसके घर पहुंच जाता था। करीब एक साल पहले ललित को आरती के संग पकड़ लिया था। इसके बाद परिवार और समाज के लोगों ने लोक लाज का हवाला देकर समझौता कराया।
nबच्चों के सिर से उठ गया मां का साया, गांव में नही मनी दीपावली : जगमोहन की शादी साल 2011 में नजीबाबाद के गांव जहानाबाद निवासी आरती के साथ हुई थी। आरती ने अपने पति के संग बेहद ही मुफलिसी में समय व्यतीत किया। पति और पत्नी दोनों बच्चों के संग झोपड़ी में रहा करते थे।
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अब करीब दो साल पहले ही पक्का मकान बना था। जगमोहन के दस साल की बेटी और सात साल का बेटा है। अब आरती के कदम फिसले और वह ललित को दिल दे बैठी। जिसका अंजाम आत्महत्या तक पहुंच गया।
आरती के आत्महत्या करने से बेटा और बेटी के सिर से ममता का साया उठ गया। उधर दोनों बच्चों की जिम्मेदारी अकेले जगमोहन पर आ गई है। दोनों की मौत के बाद इनके परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव में दीप नहीं जले।
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बताया कि आरती से दूर करने के लिए ललित को परिवार के लोगों ने हरिद्वार में नौकरी करने के लिए भेज दिया था। मगर वह वहां नहीं ठहरा और पंद्रह दिन के बाद ही लौटकर गांव आ गया था। जगमोहन किरतपुर के एक होटल पर काम करता है। वह काम पर चला जाता तो उसकी गैरमौजूदगी में ललित उसके घर पहुंच जाता था। करीब एक साल पहले ललित को आरती के संग पकड़ लिया था। इसके बाद परिवार और समाज के लोगों ने लोक लाज का हवाला देकर समझौता कराया।
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nबच्चों के सिर से उठ गया मां का साया, गांव में नही मनी दीपावली : जगमोहन की शादी साल 2011 में नजीबाबाद के गांव जहानाबाद निवासी आरती के साथ हुई थी। आरती ने अपने पति के संग बेहद ही मुफलिसी में समय व्यतीत किया। पति और पत्नी दोनों बच्चों के संग झोपड़ी में रहा करते थे।
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अब करीब दो साल पहले ही पक्का मकान बना था। जगमोहन के दस साल की बेटी और सात साल का बेटा है। अब आरती के कदम फिसले और वह ललित को दिल दे बैठी। जिसका अंजाम आत्महत्या तक पहुंच गया।
आरती के आत्महत्या करने से बेटा और बेटी के सिर से ममता का साया उठ गया। उधर दोनों बच्चों की जिम्मेदारी अकेले जगमोहन पर आ गई है। दोनों की मौत के बाद इनके परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव में दीप नहीं जले।