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Bijnor News: धीमी पड़ गई मालन की पुनरोद्धार योजना
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बिजनौर में सन 2022 के सितंबर माह में मालन नदी पर पहुंचे थे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। फाइल फोट
-कभी मालन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चढ़ाया था दूध
- मालन नदी से अतिक्रमण हटाने के लिए नहीं बन सकी ठोस योजना
-प्रशासन का दावा, पानी सूखने पर कराया जाएगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कभी लखनऊ से चर्चित हुई मालन नदी के पुनरोद्धार की योजनाएं मानो खो गई हैं। न तो अब मालन पर कोई काम हो रहा है और न ही इसे अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए ठोस योजना है। यहां पर भी कुछ खास काम होता नजर नहीं आ रहा है। उधर, प्रशासन का दावा है कि पानी कम होने पर मनरेगा से मालन पर काम कराया जाएगा।
पिछले साल जुलाई-अगस्त में मालन पर काफी काम कराया गया। उस समय सर्वे हुआ तो पता चला कि अधिकांश मालन पर अतिक्रमण है। मालन नदी की लंबाई 30 से 200 मीटर तक है, लेकिन मौके पर अधिकांश जगहों पर यह नाले का स्वरूप ले चुकी है। ऐसे में मंडावर रोड स्थित पुल के दोनों ओर से इसका पुनरोद्धार का काम शुरू हुआ।
इस काम को देखने वर्ष 2022 में योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे और दूध चढ़ाया। सभी को उम्मीद थी कि जिले में मालन अपने पुराने स्वरूप में बहने लगेगी। समय बीता तो अफसरों के स्थानांतरण भी हुए और फिर धीरे-धीरे यह अभियान दबता चला गया। अब न तो मालन पर काम हो रहा है और न ही इसे अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रशासन के पा कोई योजना है।
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बान नदी पर भी यही हाल
कभी मशहूर शायर जॉन एलिया की शायरी में जिंदा बान नदी अब दम तोड़ती दिख रही है। यह नदी कई जगहों पर लगभग विलुप्ति की कगार पर है। पिछले साल इस पर भी प्रशासन ने जोर-शोर से अभियान चलाया था। अतिक्रमण चिन्हित किया गया, लेकिन बरसात के बाद इस पर भी काम लगभग बंद सा हो गया, जो अभी तक नहीं शुरू हुआ है।
जल्द मनरेगा से होगी खोदाई : सीडीओ
मालन और बान दोनों ही नदियाें पर प्लानिंग चल रही है। पानी कम होने का इंतजार किया जा रहा है। पानी कम होने पर मनरेगा से दोनों ही नदियों पर काम कराया जाएगा। हमारी योजना में इन दोनों नदियों को इनका पुराना स्वरूप लौटाने की योजना है। - पूर्ण बोहरा, सीडीओ
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- मालन नदी से अतिक्रमण हटाने के लिए नहीं बन सकी ठोस योजना
-प्रशासन का दावा, पानी सूखने पर कराया जाएगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कभी लखनऊ से चर्चित हुई मालन नदी के पुनरोद्धार की योजनाएं मानो खो गई हैं। न तो अब मालन पर कोई काम हो रहा है और न ही इसे अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए ठोस योजना है। यहां पर भी कुछ खास काम होता नजर नहीं आ रहा है। उधर, प्रशासन का दावा है कि पानी कम होने पर मनरेगा से मालन पर काम कराया जाएगा।
पिछले साल जुलाई-अगस्त में मालन पर काफी काम कराया गया। उस समय सर्वे हुआ तो पता चला कि अधिकांश मालन पर अतिक्रमण है। मालन नदी की लंबाई 30 से 200 मीटर तक है, लेकिन मौके पर अधिकांश जगहों पर यह नाले का स्वरूप ले चुकी है। ऐसे में मंडावर रोड स्थित पुल के दोनों ओर से इसका पुनरोद्धार का काम शुरू हुआ।
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इस काम को देखने वर्ष 2022 में योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे और दूध चढ़ाया। सभी को उम्मीद थी कि जिले में मालन अपने पुराने स्वरूप में बहने लगेगी। समय बीता तो अफसरों के स्थानांतरण भी हुए और फिर धीरे-धीरे यह अभियान दबता चला गया। अब न तो मालन पर काम हो रहा है और न ही इसे अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रशासन के पा कोई योजना है।
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बान नदी पर भी यही हाल
कभी मशहूर शायर जॉन एलिया की शायरी में जिंदा बान नदी अब दम तोड़ती दिख रही है। यह नदी कई जगहों पर लगभग विलुप्ति की कगार पर है। पिछले साल इस पर भी प्रशासन ने जोर-शोर से अभियान चलाया था। अतिक्रमण चिन्हित किया गया, लेकिन बरसात के बाद इस पर भी काम लगभग बंद सा हो गया, जो अभी तक नहीं शुरू हुआ है।
जल्द मनरेगा से होगी खोदाई : सीडीओ
मालन और बान दोनों ही नदियाें पर प्लानिंग चल रही है। पानी कम होने का इंतजार किया जा रहा है। पानी कम होने पर मनरेगा से दोनों ही नदियों पर काम कराया जाएगा। हमारी योजना में इन दोनों नदियों को इनका पुराना स्वरूप लौटाने की योजना है। - पूर्ण बोहरा, सीडीओ