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हिंदी को अध्ययन की भाषा बनाएं
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बिजनौर में अमर उजाला के वेबिनार में भाग लेते शिक्षक।
- फोटो : BIJNOR
हिंदी को अध्ययन की भाषा बनाएं
बिजनौर। अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी है हम’ के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में शिक्षाविदों एवं शिक्षकों ने हिंदी को अध्ययन की भाषा बनाने पर जोर दिया।
वेबिनार से जुड़े शिक्षक रहे एवं एडीएम के पद से सेवानिवृत्त अशोक कुमार ने कहा कि हम हिंदी भाषी क्षेत्र से आते हैं और हिंदी को घर की भाषा मान लेते हैं, लेकिन उचित अध्ययन के अभाव में हिंदी में इतने अंक प्राप्त नहीं कर पाते जितने हमें करने चाहिए। छात्रों को हिंदी पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
उप बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुई शकुंज बाला का मानना है कि संस्कृत भाषा समस्त भाषाओं की जननी है, हिंदी के ज्यादातर शब्द संस्कृत से ही लिए गए हैं। हिंदी के साथ-साथ संस्कृत भाषा का ज्ञान भी जरूर होना चाहिए। नई शिक्षा नीति में सरकार ने संस्कृत भाषा को तृतीय आवश्यक भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की है। हिंदी में लिखा गया साहित्य संपूर्ण विश्व की धरोहर है।
वेबिनार में विचार रखते हुए शिक्षक सुधीर राणा ने कहा कि अब तक बेसिक शिक्षा विभाग में बच्चे की प्रवेश की आयु छह वर्ष होती थी। कक्षा एक में बच्चा दाखिल होता था और अगले पांच वर्षों में पांच कक्षाएं पास करता था। नई शिक्षा नीति में चार साल के बच्चे का विद्यालय में प्रवेश का प्रावधान किया गया है, इससे बच्चा आरंभ से ही हिंदी से जुड़ सकेगा।
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बरुकी विद्यालय के शिक्षक सुलक्षणा आर्य ने कहा कि नई शिक्षा नीति से हिंदी मजबूत होगी। नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा में शिक्षा का प्रावधान किया गया है, इससे जहां अनेक विलुप्त होती जा रही भाषाएं बचेगी, वहीं हिंदी समृद्ध होगी।
सेवानिवृत्त शिक्षक राजपाल सिंह ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों को कहानी और किताबों से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। वर्तमान में लगभग सभी परिषदीय विद्यालयों में सरकार द्वारा पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं, उन पुस्तकों में समाहित ज्ञान को बच्चों में बांटने का कार्य अध्यापक ही कर सकते हैं। इससे बच्चे हिंदी में मजबूत भी होंगे और संस्कारवान भी बनेंगे।
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बिजनौर। अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी है हम’ के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में शिक्षाविदों एवं शिक्षकों ने हिंदी को अध्ययन की भाषा बनाने पर जोर दिया।
वेबिनार से जुड़े शिक्षक रहे एवं एडीएम के पद से सेवानिवृत्त अशोक कुमार ने कहा कि हम हिंदी भाषी क्षेत्र से आते हैं और हिंदी को घर की भाषा मान लेते हैं, लेकिन उचित अध्ययन के अभाव में हिंदी में इतने अंक प्राप्त नहीं कर पाते जितने हमें करने चाहिए। छात्रों को हिंदी पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
उप बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुई शकुंज बाला का मानना है कि संस्कृत भाषा समस्त भाषाओं की जननी है, हिंदी के ज्यादातर शब्द संस्कृत से ही लिए गए हैं। हिंदी के साथ-साथ संस्कृत भाषा का ज्ञान भी जरूर होना चाहिए। नई शिक्षा नीति में सरकार ने संस्कृत भाषा को तृतीय आवश्यक भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की है। हिंदी में लिखा गया साहित्य संपूर्ण विश्व की धरोहर है।
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वेबिनार में विचार रखते हुए शिक्षक सुधीर राणा ने कहा कि अब तक बेसिक शिक्षा विभाग में बच्चे की प्रवेश की आयु छह वर्ष होती थी। कक्षा एक में बच्चा दाखिल होता था और अगले पांच वर्षों में पांच कक्षाएं पास करता था। नई शिक्षा नीति में चार साल के बच्चे का विद्यालय में प्रवेश का प्रावधान किया गया है, इससे बच्चा आरंभ से ही हिंदी से जुड़ सकेगा।
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बरुकी विद्यालय के शिक्षक सुलक्षणा आर्य ने कहा कि नई शिक्षा नीति से हिंदी मजबूत होगी। नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा में शिक्षा का प्रावधान किया गया है, इससे जहां अनेक विलुप्त होती जा रही भाषाएं बचेगी, वहीं हिंदी समृद्ध होगी।
सेवानिवृत्त शिक्षक राजपाल सिंह ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों को कहानी और किताबों से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। वर्तमान में लगभग सभी परिषदीय विद्यालयों में सरकार द्वारा पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं, उन पुस्तकों में समाहित ज्ञान को बच्चों में बांटने का कार्य अध्यापक ही कर सकते हैं। इससे बच्चे हिंदी में मजबूत भी होंगे और संस्कारवान भी बनेंगे।