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विद्यार्थियों को कराया परिवार के प्रति दायित्वों का बोध
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विद्यार्थियों को कराया परिवार के प्रति दायित्वों का बोध
धामपुर। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर आरएसएम कॉलेज में मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत रविवार को ‘बदलते परिवेश में परिवार की भूमिका एवं दायित्व’ पर गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि संभल र्से आइं डॉ. नौमी प्रिया ने कहा हमारा देश मातृ देवो भव: और पितृ देवो भव: की संस्कृति वाला देश है। युगपुरुष श्रीराम का पूरा जीवन परिवार के लिए त्याग करने वाला रहा। इसलिए वह आज भी समाज में आदर्श पुत्र और आदर्श पति हैं।
उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर परिवार की चिंता जाहिर की और भविष्य में आने वाली विपरीत परिस्थितियों से अवगत कराया। उन्होंने बच्चों को बड़े ही प्रभावी तरीके से प्रेरित कर माता-पिता और परिवार के प्रति उनके दायित्व का बोध कराया। प्राचार्य प्रोफेसर राकेश कुमार ने परिवार दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दी। कहा कि एक परिवार लोगों से बनता है और परिवार से राष्ट्र और राष्ट्र से विश्व बनता है। इसलिए कहा भी जाता है वसुधैव कुटुंबकम अर्थात पूरी पृथ्वी हमारा परिवार है। ऐसी भावना के पीछे विश्व में परस्पर वैमनस्य, कटुता, शत्रुता और घृणा को कम करना है। कार्यक्रम में डॉ. धनीराम, डॉ. भावना विनय दुआ डॉ. अनिल यादव, डॉ. चमन सिंह, तेजेंद्र कुमार, वीर सिंह, धर्मेश, नंदकिशोर रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूनम घई ने किया।
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धामपुर। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर आरएसएम कॉलेज में मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत रविवार को ‘बदलते परिवेश में परिवार की भूमिका एवं दायित्व’ पर गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि संभल र्से आइं डॉ. नौमी प्रिया ने कहा हमारा देश मातृ देवो भव: और पितृ देवो भव: की संस्कृति वाला देश है। युगपुरुष श्रीराम का पूरा जीवन परिवार के लिए त्याग करने वाला रहा। इसलिए वह आज भी समाज में आदर्श पुत्र और आदर्श पति हैं।
उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर परिवार की चिंता जाहिर की और भविष्य में आने वाली विपरीत परिस्थितियों से अवगत कराया। उन्होंने बच्चों को बड़े ही प्रभावी तरीके से प्रेरित कर माता-पिता और परिवार के प्रति उनके दायित्व का बोध कराया। प्राचार्य प्रोफेसर राकेश कुमार ने परिवार दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दी। कहा कि एक परिवार लोगों से बनता है और परिवार से राष्ट्र और राष्ट्र से विश्व बनता है। इसलिए कहा भी जाता है वसुधैव कुटुंबकम अर्थात पूरी पृथ्वी हमारा परिवार है। ऐसी भावना के पीछे विश्व में परस्पर वैमनस्य, कटुता, शत्रुता और घृणा को कम करना है। कार्यक्रम में डॉ. धनीराम, डॉ. भावना विनय दुआ डॉ. अनिल यादव, डॉ. चमन सिंह, तेजेंद्र कुमार, वीर सिंह, धर्मेश, नंदकिशोर रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूनम घई ने किया।
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