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रातोंरात उखाड़ ले गए अवैध पंपों से मशीनें
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नहटौर के गांव सदरूद्दीन नगर में उखाड़ी गई फर्जी पेट्रोल पंप की मशीन।
- फोटो : BIJNOR
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रातोंरात उखाड़ ले गए अवैध पंपों से मशीनें
बिजनौर। आईओसीएल की पाइप लाइन से तेल चोरी कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासकर पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर में उसे बेचे जाने के खुलासे, डीएसओ मुजफ्फरनगर की गिरफ्तारी के बाद भी जिले में तेल का काला खेल रविवार शाम तक चलता रहा। रात में गोपालपुर, पाड़ली और सदरूद्दीननगर में चल रहे तीन अवैध पेट्रोल पंपों के संचालक मशीनें उखाड़कर ले गए।
बायो फ्यूल के नाम पर ये तीनों पंप चल रहे थे और माना जा रहा है कि इन पर पाइप लाइन से चोरी तेल बेचा जा रहा था।बालावाली के पास गोपालपुर में बस स्टैंड के पास किसान बायो फ्यूल लगा था। जमीन के मालिक के अनुसार पेट्रोल पंप लगाने वाले लोग मुजफ्फरनगर के थे, जिन्होंने जमीन लीज पर ली थी। किरतपुर के पाड़ली गांव में लगे पेट्रोल पंप की मशीन सोमवार दोपहर उखाड़कर संचालक भाग निकले। नहटौर के सदरूद्दीननगर गांव में भी फर्जी पेट्रोल पंप की मशीन अब गायब है। एक साल के दौरान जिले में गांव देहात के इलाकों में दो दर्जन से अधिक किसान बायो फ्यूल के नाम से पेट्रोल पंप लगाए गए थे। जिसेे लेकर आपूर्ति विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ।
किरतपुर क्षेत्र में लगे थे आठ पेट्रोल पंप
किरतपुर क्षेत्र में भोजपुर, पाड़ली, मंडावर रोड नदी से पहले, सराय और तीन किसान बायो फ्यूूल अकराबाद रोड पर लगे थे। करीब एक महीना पहले भोजपुर और सराय में आपूर्ति विभाग की टीम ने छापा मार कर बंद कराए। भोजपुर वाले बायो फ्यूल संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जबकि सराय वाला अपनी मशीन उठाकर ले गया था। इसके अलावा फुलसंदा और ककराला में भी पकड़ा गया था, जिन पर एफआईआर दर्ज हुई। ये आठ तभी बंद हो गए थे लेकिन पाड़ली में पेट्रोल पंप सोमवार तक चलता रहा।
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मुजफ्फरनगर से जुड़ रहे तार
जिले में बायो फ्यूल बताकर तेल बेचने वाले गिरोह के तार मुजफ्फरनगर से जुड़ रहे हैं। दर्ज हुई एफआईआर में भी चार आरोपी वहां के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वहीं के लोगों ने यहां आकर जमीन किराए पर ली और पेट्रोल पंप खोल दिए।
आखिर कहां से आ रहा था तेल
एक साल में इन पेट्रोल पंपों पर लाखों लीटर तेल बेच दिया गया होगा। अब सवाल यह है कि आखिर यह तेल आया कहां से। यूं तो बायो फ्यूल बताकर बेचा गया लेकिन बायो फ्यूल का उत्पादन बेहद कम होता है। जो उत्पादन होता भी है तो वह पेंट कंपनियों को चला जाता है।
क्या है नियम, इसे लेकर खुद आपूर्ति विभाग उलझन में है
बायो फ्यूल पंप के नियम क्या हैं, इसे लेकर खुद आपूर्ति विभाग को स्पष्ट स्थिति नहीं पता है। आमतौर पर डीजल, पेट्रोल पंप का रजिस्ट्रेशन आपूर्ति विभाग में होता है, लेकिन बायो फ्यूल पंप के मामले में उसे फायर, पुलिस, मजिस्ट्रेट से एनओसी लेनी होती है। जिला प्रशासन के यहां शपथपत्र देकर बताना होता है कि वह कहां से बायो फ्यूल खरीद रहा है, वहां कितना उत्पादन होता है और वह किसे बायो फ्यूल बेचा जा रहा है।
-संबंधित विभाग की नाक के नीचे पेट्रोल पंप चल रहे थे। कब से चल रहे थे और कब लग गए क्यों नहीं देखा संबंधित विभाग ने। अब संज्ञान में लाया गया तो मुकदमा दर्ज करा दिया। हालांकि मामले में विवेचना चल रही है। विवचेना कर जार्चशीट दाखिल की जाएगी।...डा. धर्मवीर सिंह, एसपी
-कोई पेट्रोल पंप लगता है तो आपूर्ति विभाग से दमकल की एनओसी के लिए डिमांड की जाती है। बायो फ्यूल से संबंधित कोई एनओसी जारी नहीं की गई है।
- अजय कुमार शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
मैं अगस्त माह में ही बिजनौर आया था। मेरी जानकारी में नौ मामले आए थे, जिन पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है। यह सभी एफआईआर नामजद कराई गई थी। अब पुलिस इसमें गिरफ्तारी ही नहीं कर रही है, हम इस मामले में एसपी बिजनौर से मुलाकात करेंगे। अभी मैं बाहर हूं, जिले में लौटते ही अभियान चलाकर गलत तरीके से चल रहे पंप संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी।
- ध्रुवराज यादव, डीएसओ बिजनौर
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बिजनौर। आईओसीएल की पाइप लाइन से तेल चोरी कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासकर पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर में उसे बेचे जाने के खुलासे, डीएसओ मुजफ्फरनगर की गिरफ्तारी के बाद भी जिले में तेल का काला खेल रविवार शाम तक चलता रहा। रात में गोपालपुर, पाड़ली और सदरूद्दीननगर में चल रहे तीन अवैध पेट्रोल पंपों के संचालक मशीनें उखाड़कर ले गए।
बायो फ्यूल के नाम पर ये तीनों पंप चल रहे थे और माना जा रहा है कि इन पर पाइप लाइन से चोरी तेल बेचा जा रहा था।बालावाली के पास गोपालपुर में बस स्टैंड के पास किसान बायो फ्यूल लगा था। जमीन के मालिक के अनुसार पेट्रोल पंप लगाने वाले लोग मुजफ्फरनगर के थे, जिन्होंने जमीन लीज पर ली थी। किरतपुर के पाड़ली गांव में लगे पेट्रोल पंप की मशीन सोमवार दोपहर उखाड़कर संचालक भाग निकले। नहटौर के सदरूद्दीननगर गांव में भी फर्जी पेट्रोल पंप की मशीन अब गायब है। एक साल के दौरान जिले में गांव देहात के इलाकों में दो दर्जन से अधिक किसान बायो फ्यूल के नाम से पेट्रोल पंप लगाए गए थे। जिसेे लेकर आपूर्ति विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ।
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किरतपुर क्षेत्र में लगे थे आठ पेट्रोल पंप
किरतपुर क्षेत्र में भोजपुर, पाड़ली, मंडावर रोड नदी से पहले, सराय और तीन किसान बायो फ्यूूल अकराबाद रोड पर लगे थे। करीब एक महीना पहले भोजपुर और सराय में आपूर्ति विभाग की टीम ने छापा मार कर बंद कराए। भोजपुर वाले बायो फ्यूल संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जबकि सराय वाला अपनी मशीन उठाकर ले गया था। इसके अलावा फुलसंदा और ककराला में भी पकड़ा गया था, जिन पर एफआईआर दर्ज हुई। ये आठ तभी बंद हो गए थे लेकिन पाड़ली में पेट्रोल पंप सोमवार तक चलता रहा।
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मुजफ्फरनगर से जुड़ रहे तार
जिले में बायो फ्यूल बताकर तेल बेचने वाले गिरोह के तार मुजफ्फरनगर से जुड़ रहे हैं। दर्ज हुई एफआईआर में भी चार आरोपी वहां के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वहीं के लोगों ने यहां आकर जमीन किराए पर ली और पेट्रोल पंप खोल दिए।
आखिर कहां से आ रहा था तेल
एक साल में इन पेट्रोल पंपों पर लाखों लीटर तेल बेच दिया गया होगा। अब सवाल यह है कि आखिर यह तेल आया कहां से। यूं तो बायो फ्यूल बताकर बेचा गया लेकिन बायो फ्यूल का उत्पादन बेहद कम होता है। जो उत्पादन होता भी है तो वह पेंट कंपनियों को चला जाता है।
क्या है नियम, इसे लेकर खुद आपूर्ति विभाग उलझन में है
बायो फ्यूल पंप के नियम क्या हैं, इसे लेकर खुद आपूर्ति विभाग को स्पष्ट स्थिति नहीं पता है। आमतौर पर डीजल, पेट्रोल पंप का रजिस्ट्रेशन आपूर्ति विभाग में होता है, लेकिन बायो फ्यूल पंप के मामले में उसे फायर, पुलिस, मजिस्ट्रेट से एनओसी लेनी होती है। जिला प्रशासन के यहां शपथपत्र देकर बताना होता है कि वह कहां से बायो फ्यूल खरीद रहा है, वहां कितना उत्पादन होता है और वह किसे बायो फ्यूल बेचा जा रहा है।
-संबंधित विभाग की नाक के नीचे पेट्रोल पंप चल रहे थे। कब से चल रहे थे और कब लग गए क्यों नहीं देखा संबंधित विभाग ने। अब संज्ञान में लाया गया तो मुकदमा दर्ज करा दिया। हालांकि मामले में विवेचना चल रही है। विवचेना कर जार्चशीट दाखिल की जाएगी।...डा. धर्मवीर सिंह, एसपी
-कोई पेट्रोल पंप लगता है तो आपूर्ति विभाग से दमकल की एनओसी के लिए डिमांड की जाती है। बायो फ्यूल से संबंधित कोई एनओसी जारी नहीं की गई है।
- अजय कुमार शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
मैं अगस्त माह में ही बिजनौर आया था। मेरी जानकारी में नौ मामले आए थे, जिन पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है। यह सभी एफआईआर नामजद कराई गई थी। अब पुलिस इसमें गिरफ्तारी ही नहीं कर रही है, हम इस मामले में एसपी बिजनौर से मुलाकात करेंगे। अभी मैं बाहर हूं, जिले में लौटते ही अभियान चलाकर गलत तरीके से चल रहे पंप संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी।
- ध्रुवराज यादव, डीएसओ बिजनौर

बिजनौर में बालावाली क्षेत्र के गांव गोपालपुर में उखाड़ी गई फर्जी पेट्रोल पंप की मशीन।- फोटो : BIJNOR