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विधायक का थाने में धरना
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sun, 22 Nov 2015 12:41 AM IST
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नूरपुर। एक प्लाॅट को लेकर चल रहे विवाद में तहसीलदार ने रोडवेज बस स्टैंड के पास उदासीन आश्रम में बने दो मकानों में पुलिस की मदद से ताला लगा लगा दिया।
इसके विरोध में नूरपुर भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान समर्थकों के साथ नूरपुर थाने में धरने पर बैठ गए। इससे बैकफुट पर आए प्रशासन ने दोनों मकानों के ताले खुलवा दिए। इसके बाद ही विधायक ने धरना समाप्त किया।
रोडवेज बस स्टैंड के पास उदासीन आश्रम में एक प्लाॅट को लेकर दो पक्षों में विवाद चल रहा है। एक पक्ष ने जिलाधिकारी से कुछ लोगों द्वारा प्लाॅट पर कब्जा करने की शिकायत की थी। डीएम ने इस मामले में एक जांच समिति बनाई।
जांच समिति में शामिल चांदपुर तहसीलदार रामआसरे वर्मा ने उदासीन आश्रम में बने सभी मकानों के स्वामियों को अपने बैनामा आदि लेकर बुलाया था। इसके लिए दी गई समय सीमा बीतने के बाद भी धर्मवीर सिंह और हर्षवर्धन सिंह जमीन के कागजात मुहैया नहीं करा सके।
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शनिवार को डीएम के निर्देश पर तहसीलदार चांदपुर रामआसरे वर्मा भारी पुलिस बल के साथ उदासीन आश्रम पहुंचे और दोनों के मकानों में ताला लगा दिया। साथ ही धर्मवीर सिंह के कॉलेज पहुंचकर एक कर्मचारी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
मामले की सूचना पर नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान आग बबूला हो गए और शाम पांच बजे समर्थकों के साथ थाने में धरने पर बैठ गए। विधायक के धरने पर बैठने से प्रशासन में हड़कंप मच गया।
एसडीएम चांदपुर राकेश यादव और सोओ महेश सिंह अत्री मौके पर पहुंचे और विधायक से वार्ता कर धरना समाप्त करने को कहा। पर विधायक नहीं माने। प्रशासन द्वारा मकान के ताले खोले जाने और हिरासत में लिए गए कर्मचारी को छोड़ने का आश्वासन देने पर धरना समाप्त किया।
धरने में बेगराज सिंह, हिमांशु चौधरी, नवीन कुमार, जगेंद्र दत्त शर्मा, धर्मेंद्र जोशी आदि शामिल रहे।
प्रशासन ने नहीं लगाया ताला
तहसीलदार रामआसरे वर्मा का कहना है कि प्रशासन ने मकान में ताला नहीं लगाया था। वह मामले की जांच करने गए थे।
इसी दौरान मकान स्वामी खुद ही ताला लगाकर मौके से चले गए थे। एसडीएम राकेश यादव का कहना है कि उन्होंने दोनों पक्षों को बातचीत करने का समय दिया हैं।
उधर, मकान स्वामियों का आरोप था कि प्रशासन ने उन्हें जबरन बाहर निकाल कर मकान में ताला लागा दिया था।
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इसके विरोध में नूरपुर भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान समर्थकों के साथ नूरपुर थाने में धरने पर बैठ गए। इससे बैकफुट पर आए प्रशासन ने दोनों मकानों के ताले खुलवा दिए। इसके बाद ही विधायक ने धरना समाप्त किया।
रोडवेज बस स्टैंड के पास उदासीन आश्रम में एक प्लाॅट को लेकर दो पक्षों में विवाद चल रहा है। एक पक्ष ने जिलाधिकारी से कुछ लोगों द्वारा प्लाॅट पर कब्जा करने की शिकायत की थी। डीएम ने इस मामले में एक जांच समिति बनाई।
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जांच समिति में शामिल चांदपुर तहसीलदार रामआसरे वर्मा ने उदासीन आश्रम में बने सभी मकानों के स्वामियों को अपने बैनामा आदि लेकर बुलाया था। इसके लिए दी गई समय सीमा बीतने के बाद भी धर्मवीर सिंह और हर्षवर्धन सिंह जमीन के कागजात मुहैया नहीं करा सके।
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शनिवार को डीएम के निर्देश पर तहसीलदार चांदपुर रामआसरे वर्मा भारी पुलिस बल के साथ उदासीन आश्रम पहुंचे और दोनों के मकानों में ताला लगा दिया। साथ ही धर्मवीर सिंह के कॉलेज पहुंचकर एक कर्मचारी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
मामले की सूचना पर नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान आग बबूला हो गए और शाम पांच बजे समर्थकों के साथ थाने में धरने पर बैठ गए। विधायक के धरने पर बैठने से प्रशासन में हड़कंप मच गया।
एसडीएम चांदपुर राकेश यादव और सोओ महेश सिंह अत्री मौके पर पहुंचे और विधायक से वार्ता कर धरना समाप्त करने को कहा। पर विधायक नहीं माने। प्रशासन द्वारा मकान के ताले खोले जाने और हिरासत में लिए गए कर्मचारी को छोड़ने का आश्वासन देने पर धरना समाप्त किया।
धरने में बेगराज सिंह, हिमांशु चौधरी, नवीन कुमार, जगेंद्र दत्त शर्मा, धर्मेंद्र जोशी आदि शामिल रहे।
प्रशासन ने नहीं लगाया ताला
तहसीलदार रामआसरे वर्मा का कहना है कि प्रशासन ने मकान में ताला नहीं लगाया था। वह मामले की जांच करने गए थे।
इसी दौरान मकान स्वामी खुद ही ताला लगाकर मौके से चले गए थे। एसडीएम राकेश यादव का कहना है कि उन्होंने दोनों पक्षों को बातचीत करने का समय दिया हैं।
उधर, मकान स्वामियों का आरोप था कि प्रशासन ने उन्हें जबरन बाहर निकाल कर मकान में ताला लागा दिया था।