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प्रवासी पक्षियों को लुभा रही जिले की धरती, लगा जमघट
Sat, 02 Feb 2019 11:54 PM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Sat, 02 Feb 2019 11:54 PM IST
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बिजनौर के नजीबाबाद क्षेत्र में गंगा किनारे बैठे प्रवासी पक्षी।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में प्रवासी पक्षियों को रिझाने के लिए वन विभाग के प्रयास रंग लाए हैं। गंगा किनारे प्रवासी पक्षियों ने हजारों की संख्या में डेरा जमा लिया है। बाकी नदियों के किनारे भी ये विदेशी मेहमान मौसम का लुत्फ ले रहे हैं। शनिवार को वन विभाग ने नदियों के किनारे बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में टीम को 40 से ज्यादा प्रवासी पक्षी दिखे हैं। पहले के मुकाबले गंगा किनारे प्रवासी पक्षियों की संख्या व प्रजाति बढ़ी हैं। नदी किनारे प्रवासी पक्षियों को देखकर विद्यार्थी व गांव वाले रोमांचित रहे।
जिले में गंगा, रामगंगा, मालन और खो नदी के किनारे हर साल साइबेरिया व अन्य देशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। सर्दी के दौरान यह पक्षी यहीं प्रवास करते हैं। वन विभाग की ओर से इनकी गिनती की जाती है। वन विभाग द्वारा वन्यजीवों के प्रति विद्यार्थियों व गांववालों को जागरूक करने के लिए हर साल बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसमें गांववालों व विद्यार्थियों को नदी किनारे ले जाकर प्रवासी पक्षियों की नस्ल व अन्य जानकारी दी जाती है। अभियान का लक्ष्य जिलेवासियों को वन्यजीवों से जोड़ना है। शनिवार को गंगा बैराज, हरेवली व पीली डैम के पास डीएफओ एम सेम्मारन, बर्ड की अनेक प्रजातियों के विशेषज्ञ हरेंद्र त्यागी ने अपनी टीम के साथ प्रवासी पक्षियों की नस्ल व उनकी संख्या की गिनती की। इसके लिए जिले भर में 250 से ज्यादा बर्ड वॉचर लगाए गए थे।
मिलीं 36 प्रजाति
बर्ड फेस्टिवल में टीम को 36 प्रजाति के छह हजार 699 पक्षी दिखे हैं। इनमें 22 प्रवासी पक्षी विदेशी व 14 स्वदेशी हैं। दो साल पहले टीम को केवल 30 प्रजातियों के 2700 पक्षी ही दिखे थे। प्रवासी पक्षियों को जिले की धरती भाने लगी है।
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बच्चों के साथ लौटते हैं घर
प्रवासी पक्षी सर्दी का आनंद लेने के लिए जिले में नदियों के किनारे आते हैं। यहां पर इन्हें खाने की भी कमी नहीं रहती है। कई प्रवासी पक्षी तो नदियों के किनारे प्रजनन भी करते हैं। जब ये लौटते हैं तो इनके बच्चे इतने बड़े हो जाते हैं कि आराम से हजारों किलोमीटर की उड़ान भर लेते हैं। ये पक्षी ईरान, अफगानिस्तान के अलावा देश के गरम क्षेत्रों से आते हैं।
ये पक्षी दिखे
टीम को बर्ड वॉचिंग के दौरान डारटर, ब्लू रॉक, पिनटेल, कामन टेल, लार्ज एरागेट, ग्रे लग ग्रीस, बेडर ग्रीस, पोस्टर पनकोन आदि पक्षी दिखाई दिए।
नदियों में बनाए जा रहे टीले
प्रवासी पक्षियों को रिझाने के लिए जिले के वन अधिकारियों ने भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। रामगंगा नदी में पीली बांध के पास वन विभाग ने रेत के टीले बनाए हैं। इन रेत के टीलों पर प्रवासी पक्षी आराम करते हैं और धूप सेकते हैं।
बढ़ रहे प्रवासी पक्षी
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक गंगा किनारे प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ रही हैं। शनिवार को अभियान में करीब सात हजार पक्षी दिखे हैं।
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जिले में गंगा, रामगंगा, मालन और खो नदी के किनारे हर साल साइबेरिया व अन्य देशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। सर्दी के दौरान यह पक्षी यहीं प्रवास करते हैं। वन विभाग की ओर से इनकी गिनती की जाती है। वन विभाग द्वारा वन्यजीवों के प्रति विद्यार्थियों व गांववालों को जागरूक करने के लिए हर साल बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसमें गांववालों व विद्यार्थियों को नदी किनारे ले जाकर प्रवासी पक्षियों की नस्ल व अन्य जानकारी दी जाती है। अभियान का लक्ष्य जिलेवासियों को वन्यजीवों से जोड़ना है। शनिवार को गंगा बैराज, हरेवली व पीली डैम के पास डीएफओ एम सेम्मारन, बर्ड की अनेक प्रजातियों के विशेषज्ञ हरेंद्र त्यागी ने अपनी टीम के साथ प्रवासी पक्षियों की नस्ल व उनकी संख्या की गिनती की। इसके लिए जिले भर में 250 से ज्यादा बर्ड वॉचर लगाए गए थे।
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मिलीं 36 प्रजाति
बर्ड फेस्टिवल में टीम को 36 प्रजाति के छह हजार 699 पक्षी दिखे हैं। इनमें 22 प्रवासी पक्षी विदेशी व 14 स्वदेशी हैं। दो साल पहले टीम को केवल 30 प्रजातियों के 2700 पक्षी ही दिखे थे। प्रवासी पक्षियों को जिले की धरती भाने लगी है।
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बच्चों के साथ लौटते हैं घर
प्रवासी पक्षी सर्दी का आनंद लेने के लिए जिले में नदियों के किनारे आते हैं। यहां पर इन्हें खाने की भी कमी नहीं रहती है। कई प्रवासी पक्षी तो नदियों के किनारे प्रजनन भी करते हैं। जब ये लौटते हैं तो इनके बच्चे इतने बड़े हो जाते हैं कि आराम से हजारों किलोमीटर की उड़ान भर लेते हैं। ये पक्षी ईरान, अफगानिस्तान के अलावा देश के गरम क्षेत्रों से आते हैं।
ये पक्षी दिखे
टीम को बर्ड वॉचिंग के दौरान डारटर, ब्लू रॉक, पिनटेल, कामन टेल, लार्ज एरागेट, ग्रे लग ग्रीस, बेडर ग्रीस, पोस्टर पनकोन आदि पक्षी दिखाई दिए।
नदियों में बनाए जा रहे टीले
प्रवासी पक्षियों को रिझाने के लिए जिले के वन अधिकारियों ने भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। रामगंगा नदी में पीली बांध के पास वन विभाग ने रेत के टीले बनाए हैं। इन रेत के टीलों पर प्रवासी पक्षी आराम करते हैं और धूप सेकते हैं।
बढ़ रहे प्रवासी पक्षी
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक गंगा किनारे प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ रही हैं। शनिवार को अभियान में करीब सात हजार पक्षी दिखे हैं।