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Bijnor News: अमानगढ़ रेंज में दिन में जंगल सफारी, रात में होगा रोमांचक रात्रि विश्राम

Mon, 20 Nov 2023 11:43 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 20 Nov 2023 11:43 PM IST
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Jungle safari in Amangarh during the day and exciting night stay at night.
अमानगढ़ का प्रवेश द्वार।
- वन विभाग ने कतर्नियाघाट अभयारण्य की तर्ज पर योजना बनाई
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- खाली कराए गए वन गुर्जरों के हट में भी पर्यटन रुक सकेंगे
- वन विभाग ने टेंट हाउस बनाने के लिए जमीन का चिह्निकरण शुरू किया

रजनीश त्यागी
बिजनौर। अब अमानगढ़ में दिन में जंगल सफारी और वन्य जीवों को निहारने के बाद पर्यटक रोमांचक रात्रि विश्राम का आनंद ले सकेंगे। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही वन विभाग अमानगढ़ के बाहरी क्षेत्र में रात्रि विश्राम के लिए टेंट हाउस बनाकर पर्यटकों के रुकने की व्यवस्था कर लेगा। वहीं, पीलीडैम के पास अवैध रूप से रहे रहे वन गुर्जरों से खाली कराए गए हट में भी पर्यटकों को रात में रुकवाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
बिजनौर जिले में मौजूद अमानगढ़ वन रेंज वनस्पति, घना जंगल और दर्जनों प्रजाति के दुर्लभ वन्य जीव, पक्षी समेटे हुए हैं। पिछले साल ही इसे पर्यटकों के लिए अधिकारिक रूप से खोला गया। इस बार भी 15 नवंबर से पर्यटन सत्र शुरू हो चुका है। अभी रोजाना सुबह के समय पांच और शाम के समय पांच जिप्सी ही जंगल सफारी में जा पा रहे हैं।
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रात्रि विश्राम के लिए व्यवस्था न होने से पर्यटकों को बड़ी संख्या में वापिस लौटना पड़ रहा है। ऐसे में वन विभाग ने अमानगढ़ से सटे पीली डैम के निकट अवैध रूप से रह रहे वन गुर्जरों को हटाया है। वन गुर्जर तो चले गए, लेकिन उनकी दस से ज्यादा हट बने हुए हैं, जो पूरी तरह पर्यटकों के लिए रहने के लिए तैयार हैं। वन विभाग इन्हें पर्यटकों के रुकने के लिए प्रयोग करने की तैयारी कर रहा है।
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सबकुछ ठीक रहा और वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने इसकी अनुमति दे दी तो जल्द ही पर्यटक यहां पर रात्रि विश्राम कर रोमांच का आनंद ले पाएंगे। इसके अलावा इसी के आसपास अस्थाई टैंट हाउस भी तैयार किए जाएंगे। ताकि ज्यादा संख्या में पर्यटक आएं तो उन्हें वापिस न लौटना पड़े। (संवाद)

योजना पर चल रहा विचार: एसडीओ
एसडीओ अमानगढ़ अंशुमान मित्तल ने बताया कि अभी इस पर विचार चल रहा है। प्रोजेक्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को दिया जाएगा। अनुमति मिली तो पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए यह अच्छा विकल्प होगा। इसमें किसी नए निर्माण की जरूरत भी नहीं है। वहां बने हट को ही प्रयोग किया जाएगा। वहीं, अस्थाई टेंट लगाकर भी पर्यटकों को रोका जा सकेगा।

पर्यटन विभाग भी तैयार कराएगा रिसॉर्ट
हाल ही में सात एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। इस पर पर्यटन विभाग रिसॉर्ट के लिए होटल चेन कंपनी तलाश रहा है। रामनगर की तर्ज पर सार्वजनिक निजी साझेदारी से यह तैयार होगा। इसकी देख रेख कोई निजी कंपनी करेगी। उम्मीद है कि अगले पर्यटन सत्र तक इस पर काम शुरू हो जाएगा।



9500 हेक्टेयर में फैली है अमानगढ़ रेंज
अमानगढ़ का रकबा 9500 हेक्टेयर में है। इसमें करीब 8600 हेक्टेयर क्षेत्र टाइगर रिजर्व के तहत आता है। उत्तराखंड बनने से पहले यह जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का ही हिस्सा था। आज भी इसे कार्बेट पार्क के बफर के तौर पर जाना जाता था। इसे वर्ष 2012 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिल चुका है। अमानगढ़ के पास ही पीली बांध है, जहां पर सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहता है, जो खुद में एक बेहतरीन पर्यटक स्थल है। अमानगढ़ के जंगल में 32 बाघ और 100 से ज्यादा हाथी हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में भालू, गुलदार, पैंगोलिन, अजगर जैसे जीव भी दिखाई देते हैं। यहां पर चीतल, हिरण के दर्जनों की संख्या में झुंड दिखाई पड़ते हैं।





अमानगढ़ में वन्यजीवों की स्थिति



वन्य जीव संख्या



बाघ 32



हाथी 105



गुलदार 45



चिकारा 06



काला हिरन 50



सांभर 226



बारहसिंगा 37



भालू 9



मोर 1074



(नोट: आंकड़े वन विभाग से लिए गए हैं।)
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