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शिवभक्तों की आस्था का प्रतीक है झारखंडी शिव मंदिर
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शिवभक्तों की आस्था का प्रतीक है झारखंडी शिव मंदिर
बिजनौर। गांव खारी स्थित स्वयंभू झारखंडी शिव मंदिर महादेव के भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में हर साल हजारों कांवड़िए कांवड़ चढ़ाते हैं। हर सोमवार को भी यहां श्रद्धालु शिवलिंग पर महादेव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रहती है।
जिले में कांवड़ यात्रा पर सड़कें कांवड़ियों से सजी नजर आती हैं। गांव खारी स्थित झारखंडी शिवालय पर हरिद्वार से कांवड़ लाने वाले बड़ी तादाद में शिवभक्त जलाभिषेक करते हैं। आधी रात से जलाभिषेक शुरू हो जाता है। शिवभक्तों की दूर तक लंबी लाइन लगी रहती है। पुलिस को व्यवस्था बनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। महाशिवरात्रि पर पूरा दिन शिवालयों पर जलाभिषेक होता है। शिवालय पर मेले का आयोजन किया जाता है। दूर दराज से शिवभक्त मेले में आते हैं। झारखंडी मंदिर पर विशाल शिवालय है। कहा जाता है कि यह शिवालय स्वयंभू है। इस शिवालय के बारे में यह भी धारणा रही है कि यह बढ़ता रहता है। बिजनौर के अलावा आसपास के तमाम गांव व शहरों के लोग इस मंदिर पर जलाभिषेक करने के लिए जाते हैं। जमीन पर खुदाई के दौरान यहां शिवलिंग मिला था। काम करते हुए किसान का फावड़ा शिवलिंग से टकराया था। शिवलिंग पर फावड़ा लगने का निशान आज भी है। इसके बाद वहां मंदिर बनाकर पूजन किया जाने लगा। मंदिर को अब काफी विकसित कर दिया गया है। कई देवी देवताओं की मूर्तियों की मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की जा चुकी है।
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बिजनौर। गांव खारी स्थित स्वयंभू झारखंडी शिव मंदिर महादेव के भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में हर साल हजारों कांवड़िए कांवड़ चढ़ाते हैं। हर सोमवार को भी यहां श्रद्धालु शिवलिंग पर महादेव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रहती है।
जिले में कांवड़ यात्रा पर सड़कें कांवड़ियों से सजी नजर आती हैं। गांव खारी स्थित झारखंडी शिवालय पर हरिद्वार से कांवड़ लाने वाले बड़ी तादाद में शिवभक्त जलाभिषेक करते हैं। आधी रात से जलाभिषेक शुरू हो जाता है। शिवभक्तों की दूर तक लंबी लाइन लगी रहती है। पुलिस को व्यवस्था बनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। महाशिवरात्रि पर पूरा दिन शिवालयों पर जलाभिषेक होता है। शिवालय पर मेले का आयोजन किया जाता है। दूर दराज से शिवभक्त मेले में आते हैं। झारखंडी मंदिर पर विशाल शिवालय है। कहा जाता है कि यह शिवालय स्वयंभू है। इस शिवालय के बारे में यह भी धारणा रही है कि यह बढ़ता रहता है। बिजनौर के अलावा आसपास के तमाम गांव व शहरों के लोग इस मंदिर पर जलाभिषेक करने के लिए जाते हैं। जमीन पर खुदाई के दौरान यहां शिवलिंग मिला था। काम करते हुए किसान का फावड़ा शिवलिंग से टकराया था। शिवलिंग पर फावड़ा लगने का निशान आज भी है। इसके बाद वहां मंदिर बनाकर पूजन किया जाने लगा। मंदिर को अब काफी विकसित कर दिया गया है। कई देवी देवताओं की मूर्तियों की मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की जा चुकी है।
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