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मुशायरे में शायरों ने पेश किए शानदार कलाम
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मुशायरे में शायरों ने पेश किए शानदार कलाम
नूरपूर। खालसा इंटर कॉलेज के मैदान में बुधवार की रात ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर समां बांध दिया। भोपाल से आए शायर आरिफ वारसी ने ‘फिर बांध लिए पेट से पत्थर ये देखकर, रोटी वो दे रहा था मगर फेंक फेंककर’ पर खूब देर तक तालियां बजती रहीं।
मुशायरे का उद्घाटन मुख्य अतिथि फजलुर्रहमान अंसारी ने फीता काटकर किया। व्यापारी नेता तसलीम अहमद, सभासद मोहम्मद रफी उर्फ कल्लू व डॉ. कुंतेश सैनी ने समां रोशन की। मोहम्मद अहमद अंसारी की सदारत व हिलाल बदायूंनी की निजामत में शुरू हुए मुशायरे का आगाज अलीम वाजिद की नात के पाक से हुआ। मालेगांव से आए शायर अल्ताफ़ जिया ने ‘यह फिक्र मुझे चैन से सोने नहीं देती, अब कौन मेरी कौम को बेदार करेगा’। शाहिद अंजुम ने ‘हमको अपने वतन की मिट्टी से इश्क अब्दुल कलाम जैसा है’। जमाल हसनपुरी ने ‘जब तेरी डोली उठाई होगी, तुझको उस वक्त मेरी याद तो आई होगी’। सरदार गुरचरन सिंह अजीज ने ‘लेके साथ तुझको कुछ दूर तो चलना है मुझे, ये अलग बात के एक रोज बदलना है मुझे’।
रुड़की से आए शायर अलीम वाजिद ने ‘इज्जत तलाश करते हैं मयार बेचकर, कितने अमीर हो गए क़िरदार बेचकर’। शायरा मोहतरमा इकरा नूर ने ‘तेरे बगैर ये हालत है क्या किया जाए, बुझी बुझी सी तबियत है क्या किया जाए’। मुजफ्फरनगर से आए इफ्तखार सागर ने ‘उजले कपड़ों में सिकंदर भी तो हो सकता है, मैले कपड़ों में कलंदर भी तो हो सकता है, जिस भिखारी को हिकारत से पुकारा तूने, उसके कासे में समंदर भी तो हो सकता है’। इसके अलावा महेंद्र सिंह अश्क, आलम निजामी, असद बस्तवी, जावेद आसिफ, इसरार अदील, खालिद गौहर बिजनौरी, अबरार मंजर हल्द्वानी, नबील मिकरानी, जिगर नौगांवी, गुलरेज देवासी, अरफात संभली आदि ने कलाम पेश किए।
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कन्वीनर नबील मिकरानी, हाजी शमीम मिकरानी, महमूद हसन आदि का सहयोग रहा। चौधरी राजेंद्र सिंह, संजीव जोशी, अलीशा सिद्दीकी, हाजी सलमान अंसारी, फ़ारूक़ मिकरानी, नईम राजा, मोहम्मद आजम, एसआई विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।
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नूरपूर। खालसा इंटर कॉलेज के मैदान में बुधवार की रात ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर समां बांध दिया। भोपाल से आए शायर आरिफ वारसी ने ‘फिर बांध लिए पेट से पत्थर ये देखकर, रोटी वो दे रहा था मगर फेंक फेंककर’ पर खूब देर तक तालियां बजती रहीं।
मुशायरे का उद्घाटन मुख्य अतिथि फजलुर्रहमान अंसारी ने फीता काटकर किया। व्यापारी नेता तसलीम अहमद, सभासद मोहम्मद रफी उर्फ कल्लू व डॉ. कुंतेश सैनी ने समां रोशन की। मोहम्मद अहमद अंसारी की सदारत व हिलाल बदायूंनी की निजामत में शुरू हुए मुशायरे का आगाज अलीम वाजिद की नात के पाक से हुआ। मालेगांव से आए शायर अल्ताफ़ जिया ने ‘यह फिक्र मुझे चैन से सोने नहीं देती, अब कौन मेरी कौम को बेदार करेगा’। शाहिद अंजुम ने ‘हमको अपने वतन की मिट्टी से इश्क अब्दुल कलाम जैसा है’। जमाल हसनपुरी ने ‘जब तेरी डोली उठाई होगी, तुझको उस वक्त मेरी याद तो आई होगी’। सरदार गुरचरन सिंह अजीज ने ‘लेके साथ तुझको कुछ दूर तो चलना है मुझे, ये अलग बात के एक रोज बदलना है मुझे’।
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रुड़की से आए शायर अलीम वाजिद ने ‘इज्जत तलाश करते हैं मयार बेचकर, कितने अमीर हो गए क़िरदार बेचकर’। शायरा मोहतरमा इकरा नूर ने ‘तेरे बगैर ये हालत है क्या किया जाए, बुझी बुझी सी तबियत है क्या किया जाए’। मुजफ्फरनगर से आए इफ्तखार सागर ने ‘उजले कपड़ों में सिकंदर भी तो हो सकता है, मैले कपड़ों में कलंदर भी तो हो सकता है, जिस भिखारी को हिकारत से पुकारा तूने, उसके कासे में समंदर भी तो हो सकता है’। इसके अलावा महेंद्र सिंह अश्क, आलम निजामी, असद बस्तवी, जावेद आसिफ, इसरार अदील, खालिद गौहर बिजनौरी, अबरार मंजर हल्द्वानी, नबील मिकरानी, जिगर नौगांवी, गुलरेज देवासी, अरफात संभली आदि ने कलाम पेश किए।
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कन्वीनर नबील मिकरानी, हाजी शमीम मिकरानी, महमूद हसन आदि का सहयोग रहा। चौधरी राजेंद्र सिंह, संजीव जोशी, अलीशा सिद्दीकी, हाजी सलमान अंसारी, फ़ारूक़ मिकरानी, नईम राजा, मोहम्मद आजम, एसआई विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।