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Bijnor News: सर्दियों में दस्ताने नहीं पहने तो हो सकते हैं शीतदंश का शिकार
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सर्दियों में दस्ताने नहीं पहने तो हो सकते हैं शीतदंश का शिकार
बिजनौर। सर्दियों के मौसम में हाथों में दस्ताने नहीं पहनना सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। क्योंकि ज्यादा देर तक ठंड के संपर्क में रहने से नसें सिकुड़ने लगती हैं। जिससे फ्रॉस्टबाइट (शीतदंश) होने की आशंका बनी रहती है। युवा सर्दियों में बिना दस्ताने के बाइक दौड़ाते हैं, जिससे उनमें फ्रॉस्टबाइट की समस्या बढ़ जाती है।
सर्दियों को सेहतमंद मौसम के तौर पर जाना जाता है। क्योंकि इस मौसम में ज्यादातर बीमारियां खत्म हो जाती हैं। अगर सर्दी से बचाव नहीं किया तो यह नुकसानदायक भी साबित हो सकती है। क्योंकि कम तापमान में अधिक समय तक रहने से शरीर की नसें सुकड़ने लगती हैं। जिससे शरीर में खून का प्रवाह सही से नहीं हो पाता है। इसके अलावा ठंड में ज्यादा देर तक पानी में रहने से फ्रॉस्टबाइट का शिकार हो सकते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में इसकी समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। वहीं, युवाओं में लापरवाही की वजह से यह समस्या होती है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों की मानें तो 15 दिसंबर के बाद फ्रॉस्टबाइट के मरीज आने शुरू हो जाएंगे। अभी तक दो से तीन मरीज ही फ्रॉस्टबाइट के आए हैं।
फ्रॉस्टबाइट के लक्षण-
प्रभावित स्थान पर दर्द, खुजली होना
प्रभावित क्षेत्र को महसूस नहीं कर पाना
त्वचा में सूजन और फफोले बनना
त्वचा ठंडी और कठोर हो जाना
प्रभावित क्षेत्र का काला, लाल होना
फ्रॉस्टबाइट का कारण-
ठंड के संपर्क में ज्यादा रहना
जिन लोगों को कोई ऐसा रोग है, जो रक्त संचार को प्रभावित करता है
जिन लोगों की रक्त परिसंचरण क्षमता कमजोर हो गई हो
जिन लोगों को ठंड के कारण पहले चोट लगी हो
बिना दस्ताने ठंड में वाहन चलाने से
फ्रॉस्टबाइट से बचाव
खुद को गर्म रखने के लिए ढीले कपड़े पहनें
शराब, सिगरेट और कैफिन आदि न लें
सिर और कानों को ठंड से बचाने के लिए ऊनी टोपी पहनें
हाथों को ठंड से बचाने के लिए दस्ताने पहनें
फ्रॉस्टबाइट की समस्या तापमान कम होने से शुरू हो जाती है। नाक, कान, हाथों पर इसका प्रभाव ज्यादा रहता है। इसलिए ठंड में इनका बचाव करें। फ्रॉस्टबाइट के ग्रसित होने पर मरीज की उंगली भी काटनी पड़ जाती है - डॉ. याघवेंद्र सिंह, हड्डी रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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सर्दियों में ठंड के संपर्क में आने से नसें सुकड़ने लगती हैं। जिससे रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता है। इसलिए सर्दियों में ठंड से अवश्य बचाव करें - डॉ. नरेश जौहरी, सर्जन, जिला अस्पताल
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बिजनौर। सर्दियों के मौसम में हाथों में दस्ताने नहीं पहनना सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। क्योंकि ज्यादा देर तक ठंड के संपर्क में रहने से नसें सिकुड़ने लगती हैं। जिससे फ्रॉस्टबाइट (शीतदंश) होने की आशंका बनी रहती है। युवा सर्दियों में बिना दस्ताने के बाइक दौड़ाते हैं, जिससे उनमें फ्रॉस्टबाइट की समस्या बढ़ जाती है।
सर्दियों को सेहतमंद मौसम के तौर पर जाना जाता है। क्योंकि इस मौसम में ज्यादातर बीमारियां खत्म हो जाती हैं। अगर सर्दी से बचाव नहीं किया तो यह नुकसानदायक भी साबित हो सकती है। क्योंकि कम तापमान में अधिक समय तक रहने से शरीर की नसें सुकड़ने लगती हैं। जिससे शरीर में खून का प्रवाह सही से नहीं हो पाता है। इसके अलावा ठंड में ज्यादा देर तक पानी में रहने से फ्रॉस्टबाइट का शिकार हो सकते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में इसकी समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। वहीं, युवाओं में लापरवाही की वजह से यह समस्या होती है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों की मानें तो 15 दिसंबर के बाद फ्रॉस्टबाइट के मरीज आने शुरू हो जाएंगे। अभी तक दो से तीन मरीज ही फ्रॉस्टबाइट के आए हैं।
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फ्रॉस्टबाइट के लक्षण-
प्रभावित स्थान पर दर्द, खुजली होना
प्रभावित क्षेत्र को महसूस नहीं कर पाना
त्वचा में सूजन और फफोले बनना
त्वचा ठंडी और कठोर हो जाना
प्रभावित क्षेत्र का काला, लाल होना
फ्रॉस्टबाइट का कारण-
ठंड के संपर्क में ज्यादा रहना
जिन लोगों को कोई ऐसा रोग है, जो रक्त संचार को प्रभावित करता है
जिन लोगों की रक्त परिसंचरण क्षमता कमजोर हो गई हो
जिन लोगों को ठंड के कारण पहले चोट लगी हो
बिना दस्ताने ठंड में वाहन चलाने से
फ्रॉस्टबाइट से बचाव
खुद को गर्म रखने के लिए ढीले कपड़े पहनें
शराब, सिगरेट और कैफिन आदि न लें
सिर और कानों को ठंड से बचाने के लिए ऊनी टोपी पहनें
हाथों को ठंड से बचाने के लिए दस्ताने पहनें
फ्रॉस्टबाइट की समस्या तापमान कम होने से शुरू हो जाती है। नाक, कान, हाथों पर इसका प्रभाव ज्यादा रहता है। इसलिए ठंड में इनका बचाव करें। फ्रॉस्टबाइट के ग्रसित होने पर मरीज की उंगली भी काटनी पड़ जाती है - डॉ. याघवेंद्र सिंह, हड्डी रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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सर्दियों में ठंड के संपर्क में आने से नसें सुकड़ने लगती हैं। जिससे रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता है। इसलिए सर्दियों में ठंड से अवश्य बचाव करें - डॉ. नरेश जौहरी, सर्जन, जिला अस्पताल