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नारी सम्मान को बरकरार रखने के लिए आत्मरक्षा की शपथ ली

Thu, 05 Dec 2019 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2019 12:24 AM IST
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How long will we bear injustice
धामपुर एसबीडी कालेज में अपराजिता अभियान के तहत संगोष्ठी में महिला सुरक्षा के प्रति अपने विचार व? - फोटो : DHAMPUR
कब तक हम सहते रहेंगे अन्याय
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धामपुर। हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया की दुष्कर्म के बाद हत्या से देश में जनमानस में आक्रोश है। हर तरफ इंसाफ की मांग की उठ रही है। इस मामले में सरकार की चुप्पी पर भी जनमानस में गुस्सा है। पहले निर्भया अब डॉक्टर बिटिया की साथ हुई घटना से महिलाओं में भय का माहौल है। खुद महिलाएं स्वयं और अपने परिवार की बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। अमर उजाला के अभियान अपराजिता के तहत आयोजित गोष्ठी में महिलाओं ने अन्याय के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज उठाने का संकल्प लिया।
अमर उजाला के अभियान अपराजिता के तहत एसबीडी कालेज में शिक्षिकाओं और छात्राओं की संयुक्त रूप से संगोष्ठी का आयोजन हुआ। छात्राओं में हैदराबाद में डाक्टर बिटिया के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हुई हत्या की घटना को लेकर भारी गुस्सा है। छात्राओं ने बढ़ते अपराधों पर चिंता जताई। दरिंदगी करने वालों को एक सप्ताह के भीतर खुलेआम चौराहे पर फांसी देने की मांग की, जिससे वहशीपन करने वालों को सबक मिले और ऐसी घटना फिर से न होने पाएं। घटना मानवता को शर्मशार करने वाली है। शिक्षिकाओं और छात्राओं ने इस दौरान नारी सम्मान को बरकरार रखने के लिए आत्मरक्षा की शपथ ली। छात्राओं के अपने अधिकारों को पाने के लिए सड़क से संसद तक आंदोलन करने का संकल्प ग्रहण किया। घटना को लेकर जनमानस आक्रोश में है। पहले निर्भया और अब हैदराबाद में डाक्टर बिटिया के साथ हुई घटना से महिलाओं में आक्रोश है। वहीं महिलाएं स्वयं और अपने परिवार की बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
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पुरुषों पर पाश्चात्य प्रभाव हावी
प्राचार्या डा. पूनम चौहान का कहना है कि आज के युग में पाश्चात्य प्रभाव ने पुरुषों की मानसिकता को विकृत किया है। ऐसी स्थिति में नारी के पास एक विकल्प होना आवश्यक है। वह है आत्मरक्षा। छात्राओं को आत्मरक्षा के स्वयं तैयार होना होगा। ऐसे मामलों में कानून लचर नहीं होना चाहिए।
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बेटों को संस्कार दें
कालेज की शिक्षिका फरहाना हाशिम का कहना है कि समाज में नारी को सुरक्षित करने के लिए बच्चों को संस्कार देना आवश्यक है। इस मामले में आरोपियों को फांसी लगाने में देरी नहीं होनी चाहिए। जब तक महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, हमें निरंतर संघर्ष करना होगा।
24 घंटे में फांसी का प्रावधान हो
शिक्षिका डा. रेनू चौहान का कहना है कि जिस तरह से दुष्कर्मी को सऊदी अरब में बीच चौराहे पर 24 घंटे में फांसी दे दी जाती है, ऐसा ही कानून भी हमारे देश में महिलाओं व बेटियों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए। बेटियों की सुरक्षा के लिए विद्यालय व महाविद्यालय में बेटियों को आत्म सुरक्षा की ट्रेनिंग का प्रावधान होना चाहिए।
अपनी सुरक्षा स्वयं करें
शिक्षिका डा. अल्पना सिंह का कहना है कि बेटियों को ऐसी शिक्षा दी जाएं कि वह हिंसा के लिए भी मानसिक रूप से तैयार रहें। अपनी सुरक्षा स्वयं करें। परिवार स्वयं बेटियों के साथ बेटों में भी मूल्य और संस्कार के बीज डाले।
कानून व्यवस्था मजबूत हो
शिक्षिका डा. कनक चौहान का कहना है कि बेटियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें आत्म सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए। देश की कानून व्यवस्था मजबूत हो। दुष्कर्मियों को शीघ्र ही सजा मिलनी चाहिए
देश में भी सख्त कानून बनें
छात्रा अदिति वशिष्ठ का कहना है कि महिलाओं के साथ घटना होने के बाद हम चाहे कितनी भी मोमबत्ती जला लें। इससे कुछ होने वाला नहीं है। ऐसे अपराधियों से निपटने को सख्त कानून बनना चाहिए। दरिंदों को खुलेआम फांसी हो। अफगानिस्तान और सऊदी अरेबिया जैसे सख्त कानून बनें।
कानून सख्ती से काम करें
छात्रा सना का कहना है कि अपराधियों से निपटने के लिए सख्त कानून बनें। दरिंदों को एक सप्ताह में खुलेआम फांसी हो। कानून सख्ती से काम करें।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई
छात्रा एकता सैनी का कहना है कि सरकार को ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। जिनमें जल्द सुनवाई हो और आरोपियों को फांसी की सजा मिले।
दरिंदगी की कोई जाति धर्म नहीं
छात्रा आरजू का कहना है कि दुष्कर्मी की कोई जाति, बिरादरी और मजहब नहीं होता। दरिंदा, दरिंदा ही होता है। उसे तो चौराहे पर फांसी पर लटकाना चाहिए। वह समाज के लिए

जनता करेगी इंसाफ
छात्रा अल्ताफ खानम का कहना है कि दुष्कर्मियों को जेल में न भेजने के स्थान पर जनता के हवाले करना चाहिए, जिससे जनता ऐसे दरिंदों को पत्थरों से मार मार कर मार दें। जिसे देख और कोई दुष्कर्म करने की कोशिश न कर सकें।
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