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नजीबाबाद सीट पर दोबारा परचम नहीं लहरा सकी भाजपा

Fri, 14 Jan 2022 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jan 2022 12:21 AM IST
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History telling will be a tough challenge in the present
इतिहास बता रहा वर्तमान में रहेगी कड़ी चुनौती
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। नजीबाबाद सीट के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस बार किसी भी पार्टी के लिए चुनाव आसान नहीं होने वाला। सभी पार्टी के सामने जीत के लिए कड़ी चुनौती रहेगी। नजीबाबाद विधानसभा सीट पर 17 बार चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों में भाजपा सिर्फ एक बार ही परचम लहरा पाई है, वो भी राम लहर के वक्त। दोबारा नजीबाबाद से भाजपा का खाता नहीं खुल सका। वहीं पिछली बार सपा भी मात्र एक बार ही यहां जीत हासिल कर पाई है। अब परिणाम क्या होंगे, यह समय ही तय करेगा।
साल 1951 के पहले आम चुनाव में नजीबाबाद सीट अस्तिव मेें आ गई थी। तब इस सीट का नाम बिजनौर नॉर्थ कम नजीबाबाद हुआ करता था। साल 1956 में परिसीमन के आदेशों के बाद साल 1957 में इसे नजीबाबाद सीट कर दिया गया। नजीबाबाद सीट से ही बिजनौर जिले की विधानसभा सीटों की शुरुआत होती है। साल 1974 में नजीबाबाद सीट आरक्षित हुई जोकि साल 2007 तक रही। अब यूं तो सभी पार्टी जीत का दावा कर रही है, लेकिन सीट के इतिहास पर नजर डालें तो जीत के लिए सभी के सामने कड़ी चुनौती रहने वाली है। भाजपा जहां अपनी जीत का आंकड़ा बढ़ाने को ताकत झोंक रही है, वहीं सपा 2017 में मिली इस सीट से जीत को दोहराने का प्रयास में रहेगी। इस बीच बसपा और कांग्रेस समेत तमाम पार्टी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं। (संवाद)
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तीन बार टूटा रिकार्ड
नजीबाबाद ऐसी सीट है। जहां सिर्फ तीन लोगों ने ही लगातार दो बार जीत दर्ज कराने का रिकार्ड तोड़ा है। साल 1967 में निर्दलीय लड़ते हुए साहनपुर स्टेट के राजा देवेंद्र सिंह जीत दर्ज कराई। साल 1969 में बीकेडी के टिकट पर राजा देवेंद्र सिंह दोबारा विधायक बने। इसके बाद मास्टर रामस्वरुप ने साल 1993 में पहली बार जीत दर्ज कराई। इसके बाद मास्टर रामस्वरुप 1996 और 2002 में भी विधायक चुने गए। मास्टर रामस्वरुप तीन बार इस सीट से विधायक रहे। अब सपा से विधायक तसलीम अहमद भी दोबारा इसी सीट से विधायक हैं। इन तीनों के अलावा इस सीट पर लगातार दो बार नहीं जीत पाया। हालांकि कांग्रेस से सुक्खन सिंह दो बार विधायक रहे लेकिन, लगातार नहीं जीत पाए थे।
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नजीबाबाद सीट पर अब तक बने विधायक
1951 अब्दुल लतीफ कांग्रेस
1957 हाफिज मोहम्मद इब्राहिम कांग्रेस
1962 श्री राम जनसंघ
1967 राजा देवेंद्र सिंह निर्दलीय
1969 राजा देवेंद्र सिंह बीकेडी
1974 सुक्खन सिंह कांग्रेस
1977 मुकंदी सिंह जनता पार्टी
1980 रतिराम कांग्रेस
1985 सुक्खन सिंह कांग्रेस
1989 बलदेव सिंह बसपा
1991 राजेंद्र सिंह भाजपा
1993 रामस्वरुप माकपा
1996 रामस्वरुप माकपा
2002 रामस्वरुप माकपा
2007 शीशराम बसपा
2012 तसलीम अहमद बसपा
2017 तसलीम अहमद सपा
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