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फसलों को भारी नुकसान, आकलन में जुटा कृषि विभाग
Fri, 01 Mar 2019 12:36 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Fri, 01 Mar 2019 12:36 AM IST
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बिजनौर में ओलावृष्टि से गिरी सरसों की फसल दिखाता किसान सरदार उत्तम सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में बुधवार को पड़े ओले खेतों में बृहस्पतिवार को भी जमे रहे। खेतों में कश्मीर जैसा नजारा था। ओलों की सफेद चादर खेतों में जमी हुई थी। ऐसा जिले में पहली बार हुआ है कि ओले अगले दिन तक जमे रहे। ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्र में गेहूं, आम, सरसों, चना, बरसीम, आलू आदि खेतों को बहुत भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि व बारिश से जिले का तापमान आठ डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। ठंड बढ़ने से काफी दुश्वारियां बढ़ गई है।
बुधवार को करीब साढ़े तीन बजे जिला मुख्यालय व आसपास के गांवों में जमकर ओलावृष्टि हुई थी। सड़कों, मकानों के आंगन व छत पर ओलों की चादर सी बिछ गई थी। करीब 20 मिनट तक हुई ओलावृष्टि ने मौसम में ठंडक बढ़ा दी थी। ओलावृष्टि से गेहूं, आम, चना, सरसों, आलू आदि की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। ओलों की मार से आम का बौर गिर गया है। सरसों की जिन फली व गेहूं की जिन बाली पर ओले की चोट पड़ती है, उनमें दाना नहीं पड़ता है।
ओलों ने गन्ने के अंगोले व बरसीम की फसल को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है। इससे किसानों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट भी पैदा हो जाएगा। ओलों की मार से इस साल आम की फसल भी कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि अभी सभी पेड़ों पर पूरा बौर नहीं आया था।
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किसान जब बृहस्पतिवार सुबह ठिठुरते हुए खेतों पर पहुंचे तो देखा कि खेतों में ओलों की मोटी चादर बिछी हुई थी। किसान यह देखकर हैरत में रह गए। राम बाग घेर निवासी किसान जगवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने जीवन में ऐसा पहली बार देखा है कि इतने घंटे बाद भी ओले न पिंघले हों। गन्ने के खेत में ओले की परत जमी हुई हुई थी। उनके बरसीम के खेत को ओले ने बहुत नुकसान पहुंचाया है।
फसल रह गई 20 प्रतिशत
गांव नीलावाला निवासी सरदार उत्तम सिंह ने 25 बीघा जमीन में सरसों बो रखी थी। ओलों की मार ने पूरी फसल को बर्बाद कर दिया। ओलों से फसल को भारी नुकसान हुआ है। सरदार उत्तम सिंह के अनुसार अब खेत से मुश्किल से 20 प्रतिशत ही मिल पाएगी। प्रशासन को सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
दुकानों के आगे मिला ओलों का ढेर
दुकानदारों ने बुधवार को दुकानों के बाहर ओले एकत्र कर रखे थे। दुकानदार सुबह को दुकान पर पहुंचे तो देखा कि ओले सुबह तक पिघले नहीं थे। उनका कहना था कि ऐसा तो पहाड़ी इलाकों में ही होता है।
मांगी रिपोर्ट
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्रा के अनुसार किसानों को हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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बुधवार को करीब साढ़े तीन बजे जिला मुख्यालय व आसपास के गांवों में जमकर ओलावृष्टि हुई थी। सड़कों, मकानों के आंगन व छत पर ओलों की चादर सी बिछ गई थी। करीब 20 मिनट तक हुई ओलावृष्टि ने मौसम में ठंडक बढ़ा दी थी। ओलावृष्टि से गेहूं, आम, चना, सरसों, आलू आदि की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। ओलों की मार से आम का बौर गिर गया है। सरसों की जिन फली व गेहूं की जिन बाली पर ओले की चोट पड़ती है, उनमें दाना नहीं पड़ता है।
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ओलों ने गन्ने के अंगोले व बरसीम की फसल को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है। इससे किसानों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट भी पैदा हो जाएगा। ओलों की मार से इस साल आम की फसल भी कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि अभी सभी पेड़ों पर पूरा बौर नहीं आया था।
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किसान जब बृहस्पतिवार सुबह ठिठुरते हुए खेतों पर पहुंचे तो देखा कि खेतों में ओलों की मोटी चादर बिछी हुई थी। किसान यह देखकर हैरत में रह गए। राम बाग घेर निवासी किसान जगवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने जीवन में ऐसा पहली बार देखा है कि इतने घंटे बाद भी ओले न पिंघले हों। गन्ने के खेत में ओले की परत जमी हुई हुई थी। उनके बरसीम के खेत को ओले ने बहुत नुकसान पहुंचाया है।
फसल रह गई 20 प्रतिशत
गांव नीलावाला निवासी सरदार उत्तम सिंह ने 25 बीघा जमीन में सरसों बो रखी थी। ओलों की मार ने पूरी फसल को बर्बाद कर दिया। ओलों से फसल को भारी नुकसान हुआ है। सरदार उत्तम सिंह के अनुसार अब खेत से मुश्किल से 20 प्रतिशत ही मिल पाएगी। प्रशासन को सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
दुकानों के आगे मिला ओलों का ढेर
दुकानदारों ने बुधवार को दुकानों के बाहर ओले एकत्र कर रखे थे। दुकानदार सुबह को दुकान पर पहुंचे तो देखा कि ओले सुबह तक पिघले नहीं थे। उनका कहना था कि ऐसा तो पहाड़ी इलाकों में ही होता है।
मांगी रिपोर्ट
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्रा के अनुसार किसानों को हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।