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रात में जिला मुख्यालय छोड़ने अधिकारियों की होगी जांच
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बिना अनुमति रात में जिला नहीं छोड़ेंगे स्वास्थ्य अधिकारी
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग के अफसर रात में जिला मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे। जिला प्रशासन ने रात के वक्त चेकिंग करने और जांच के आदेश दिए हैं।
कोविड के चलते शासन ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के जिला मुख्यालय छोड़ने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद भी तमाम अधिकारी और चिकित्सक रात में दूसरे शहर निकल जाते हैं। रात में इमरजेंसी होने पर भी ये उपलब्ध नहीं हो सकते। पिछले काफी समय से ऐसी शिकायतें प्रशासन को भी मिल रही थी। जिस पर जिला प्रशासन ने ऐसे अधिकारियों की जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग से भी रिपोर्ट तलब की गई है। निगरानी और जांच की जानकारी लगते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच हुआ है।
पीआरए का भी हो रहा भुगतान
ताज्जुब की बात यह है कि जो अधिकारी व डॉक्टर रात में जिला मुख्यालय छोड़ देते हैं। वे लाभ लेने से भी नहीं चूक रहे। सैलरी के साथ साथ पीआए यानी रेंट अलाउंस भी भुगतान हो रहा है। अगर जांच में जिला मुख्यालय पर नहीं रहने की बात साफ होती है तो पीआरए की रिकवरी भी हो सकती है।
करीब एक साल पहले स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक अधिकारी ने कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों के एचआरए पर आपत्ति लगा दी थी। कमाल यह रहा कि एचआरए को लेकर तो कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उस अधिकारी से चार्ज ही छीन लिया गया।
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वर्जन
ऐसे मामलों को दिखवाया जाएगा। जांच कराई जाएगी। गलत तरीके से एचआरए लेना गलत है।
- उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर
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बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग के अफसर रात में जिला मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे। जिला प्रशासन ने रात के वक्त चेकिंग करने और जांच के आदेश दिए हैं।
कोविड के चलते शासन ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के जिला मुख्यालय छोड़ने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद भी तमाम अधिकारी और चिकित्सक रात में दूसरे शहर निकल जाते हैं। रात में इमरजेंसी होने पर भी ये उपलब्ध नहीं हो सकते। पिछले काफी समय से ऐसी शिकायतें प्रशासन को भी मिल रही थी। जिस पर जिला प्रशासन ने ऐसे अधिकारियों की जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग से भी रिपोर्ट तलब की गई है। निगरानी और जांच की जानकारी लगते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच हुआ है।
पीआरए का भी हो रहा भुगतान
ताज्जुब की बात यह है कि जो अधिकारी व डॉक्टर रात में जिला मुख्यालय छोड़ देते हैं। वे लाभ लेने से भी नहीं चूक रहे। सैलरी के साथ साथ पीआए यानी रेंट अलाउंस भी भुगतान हो रहा है। अगर जांच में जिला मुख्यालय पर नहीं रहने की बात साफ होती है तो पीआरए की रिकवरी भी हो सकती है।
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करीब एक साल पहले स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक अधिकारी ने कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों के एचआरए पर आपत्ति लगा दी थी। कमाल यह रहा कि एचआरए को लेकर तो कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उस अधिकारी से चार्ज ही छीन लिया गया।
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ऐसे मामलों को दिखवाया जाएगा। जांच कराई जाएगी। गलत तरीके से एचआरए लेना गलत है।
- उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर