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‘हराम कामों और झूठे वादों से बचना चाहिए’
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‘हराम कामों और झूठे वादों से बचना चाहिए’
अफजलगढ़। शहर के उलमाओं की तंजीम ताहफ्फुज ए शरीयत के बैनर तले बुधवार रात जामा मस्जिद में इसलाहे मुआशरा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम हजरत मौलाना मुफ्ती राशिद आजमी ने कहा कि हुजुर स.ल.व की जिंदगी हमारे लिए नमूना है, हमें चाहिए की हम हुजुर स.ल.व की जिंदगी के बारे में पढ़ा करें। हम अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करके सूदी कारोबार से और हराम कामों से, झूठे वादों से बचते रहे।
मौलाना मुफ्ती राशिद आजमी ने फरमाया कि हुजुर स.ल.व से जो भी मुलाकात करने आता था उसका दिल खुश हो जाता था। हुजुर स.ल.व जिससे भी मुलाकात करते थे उससे मुस्कुराकर मिलते थे। हमें चाहिए कि हम हुजुर स.ल.व की जिंदगी को अपनी जिंदगी में उतारें। उलमाओं से अपना संपर्क बनाकर रखा करें, आपके शहर के उलमाओं और इमामों की तंजीम ताहफ्फुज ए शरीयत जहां इस तरह के इसलाही प्रोग्राम करती रहती है, वहीं गरीबों, मजलूमों, मजबूरों की सहायता भी यह उलमा ए इकराम करते रहते हैं। कार्यक्रम की सदारत शहर इमाम कारी अब्दुल रहमान, निजामत मुफ्ती सुहैल अहमद ने की। डॉ. मौलाना कलीममुल्ला, मौलाना मुख्तार अहमद, मौलाना गुफरान अहमद, मुफ्ती जमशेद आलम, मुफ्ती रियाजुद्दीन, मुफ्ती इरफान कासमी, मौलाना इस्माइल नदवी आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम की शुरुआत कारी जियाउर्रहमान के कलाममुल्ला के पढ़ने व कारी नौशाद के मुनाजात और नात पढ़ने से हुई। कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमनों अमान व तरक्की के लिए दुआ कराई गई।
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अफजलगढ़। शहर के उलमाओं की तंजीम ताहफ्फुज ए शरीयत के बैनर तले बुधवार रात जामा मस्जिद में इसलाहे मुआशरा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम हजरत मौलाना मुफ्ती राशिद आजमी ने कहा कि हुजुर स.ल.व की जिंदगी हमारे लिए नमूना है, हमें चाहिए की हम हुजुर स.ल.व की जिंदगी के बारे में पढ़ा करें। हम अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करके सूदी कारोबार से और हराम कामों से, झूठे वादों से बचते रहे।
मौलाना मुफ्ती राशिद आजमी ने फरमाया कि हुजुर स.ल.व से जो भी मुलाकात करने आता था उसका दिल खुश हो जाता था। हुजुर स.ल.व जिससे भी मुलाकात करते थे उससे मुस्कुराकर मिलते थे। हमें चाहिए कि हम हुजुर स.ल.व की जिंदगी को अपनी जिंदगी में उतारें। उलमाओं से अपना संपर्क बनाकर रखा करें, आपके शहर के उलमाओं और इमामों की तंजीम ताहफ्फुज ए शरीयत जहां इस तरह के इसलाही प्रोग्राम करती रहती है, वहीं गरीबों, मजलूमों, मजबूरों की सहायता भी यह उलमा ए इकराम करते रहते हैं। कार्यक्रम की सदारत शहर इमाम कारी अब्दुल रहमान, निजामत मुफ्ती सुहैल अहमद ने की। डॉ. मौलाना कलीममुल्ला, मौलाना मुख्तार अहमद, मौलाना गुफरान अहमद, मुफ्ती जमशेद आलम, मुफ्ती रियाजुद्दीन, मुफ्ती इरफान कासमी, मौलाना इस्माइल नदवी आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम की शुरुआत कारी जियाउर्रहमान के कलाममुल्ला के पढ़ने व कारी नौशाद के मुनाजात और नात पढ़ने से हुई। कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमनों अमान व तरक्की के लिए दुआ कराई गई।
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