{"_id":"69d2a9a653bb5b0b0f0f57a0","slug":"hansa-singh-returns-home-after-25-years-familys-connection-to-langar-bijnor-news-c-27-1-bij1007-176239-2026-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: ‘लंगर’ से जुड़ी परिवार की कड़ी, 25 साल बाद अपने घर पहुंचे हंसा सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: ‘लंगर’ से जुड़ी परिवार की कड़ी, 25 साल बाद अपने घर पहुंचे हंसा सिंह
विज्ञापन
नहटौर। चांदपुर चुंगी पर घर के बाहर खड़े जगप्रीत सिंह पुत्र सरदार सुरेंद्र सिंह फलौदिया से मानसिक बीमार दिखने वाले करीब 55 वर्षीय व्यक्ति ने लंगर चखाने को कहा तो वे तुरंत समझ गए कि यह व्यक्ति सिख है। वे उसे अपने घर पर ले आए और उसका हुलिया ठीक कराया। करीब पांच दिन की मशक्कत के बाद जगप्रीत से उसके परिवार से संपर्क करने में कामयाब हो गए। पता लगा कि यह व्यक्ति हंसा सिंह पुत्र सुरैन सिंह, गांव शिवदयालवाला थाना तलवंडी चौधरियान जनपद कपूरथला (पंजाब) का रहने वाला है और 25 साल से लापता था। पता लगते ही हंसा सिंह के परिजन नहटौर पहुंच गए और उसे अपने साथ ले गए।
थाने में रविवार को उस समय माहौल भावुक हो गया, जब पंजाब से पहुंचे हंसा सिंह के तीन भाई 25 वर्ष पूर्व बिछड़े हंसा सिंह से मिले। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वे अपने भाई को साथ ले गए। फलौदी निवासी सरदार सुरेंद्र सिंह फलौदिया ने हाल ही नगर स्थित चांदपुर चुंगी के पास मकान बनाया है। 30 मार्च को उनका बेटा जगप्रीत सिंह घर के बाहर टहल रहा था, तभी उसे एक मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत होने वाला व्यक्ति मिला। बातचीत के दौरान उसने लंगर चखाने का जिक्र किया, जिससे जगप्रीत को उसके सिख होने का आभास हुआ। वह उसे अपने घर ले आया और भोजन कराया। साथ ही उसका हुलिया ठीक कराकर नए कपड़े दिलाए।
वह अपने बारे में ठीक से कुछ नहीं बता पा रहा था। करीब पांच दिन की मशक्कत के बाद उसने अपना नाम हंसा सिंह और पता बताया। इसके बाद सुरेंद्र सिंह ने कपूरथला के एक पत्रकार के माध्यम से गांव के सरपंच मलकीत सिंह से संपर्क किया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस जांच में पुष्टि हुई कि हंसा सिंह करीब 25 वर्ष पूर्व घर से लापता हो गया था। रविवार को उसके भाई मोखा सिंह, जरनैल सिंह, वचन सिंह, भांजा मनजीत सिंह व सरपंच थाने पहुंचे और पहचान के बाद उसे अपने साथ ले गए। कोतवाल रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पूरी पुष्टि के बाद हंसा सिंह को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
विज्ञापन
मृत मान चुके थे परिजन
परिजनों ने बताया कि हंसा की शादी हो गई थी। उसके बाद करीब तीस साल की उम्र में मानसिक बीमारी के बाद हंसा सिंह घर छोड़कर चला गया था। काफी तलाश के बावजूद कोई सुराग न मिलने पर उसे मृत मान लिया गया था। बाद में उसकी पत्नी का विवाह परिवार में ही कर दिया गया था।
105 वर्षीय मां को था बेटे के लौटने का विश्वास
हंसा सिंह के भाई मौखा सिंह ने बताया कि उनके पिता का निधन हो चुका है, जबकि 105 वर्षीय मां जट्टा कौर आज भी जीवित हैं। वह रोज खाना खाने से पहले एक कौर हंसा के नाम का निकालती थीं और कहती थीं कि एक दिन उनका बेटा जरूर लौटेगा। कहा कि अब बेटे के जीवित देखकर मां बहुत खुश होगी।
विज्ञापन
थाने में रविवार को उस समय माहौल भावुक हो गया, जब पंजाब से पहुंचे हंसा सिंह के तीन भाई 25 वर्ष पूर्व बिछड़े हंसा सिंह से मिले। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वे अपने भाई को साथ ले गए। फलौदी निवासी सरदार सुरेंद्र सिंह फलौदिया ने हाल ही नगर स्थित चांदपुर चुंगी के पास मकान बनाया है। 30 मार्च को उनका बेटा जगप्रीत सिंह घर के बाहर टहल रहा था, तभी उसे एक मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत होने वाला व्यक्ति मिला। बातचीत के दौरान उसने लंगर चखाने का जिक्र किया, जिससे जगप्रीत को उसके सिख होने का आभास हुआ। वह उसे अपने घर ले आया और भोजन कराया। साथ ही उसका हुलिया ठीक कराकर नए कपड़े दिलाए।
विज्ञापन
वह अपने बारे में ठीक से कुछ नहीं बता पा रहा था। करीब पांच दिन की मशक्कत के बाद उसने अपना नाम हंसा सिंह और पता बताया। इसके बाद सुरेंद्र सिंह ने कपूरथला के एक पत्रकार के माध्यम से गांव के सरपंच मलकीत सिंह से संपर्क किया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस जांच में पुष्टि हुई कि हंसा सिंह करीब 25 वर्ष पूर्व घर से लापता हो गया था। रविवार को उसके भाई मोखा सिंह, जरनैल सिंह, वचन सिंह, भांजा मनजीत सिंह व सरपंच थाने पहुंचे और पहचान के बाद उसे अपने साथ ले गए। कोतवाल रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पूरी पुष्टि के बाद हंसा सिंह को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
विज्ञापन
मृत मान चुके थे परिजन
परिजनों ने बताया कि हंसा की शादी हो गई थी। उसके बाद करीब तीस साल की उम्र में मानसिक बीमारी के बाद हंसा सिंह घर छोड़कर चला गया था। काफी तलाश के बावजूद कोई सुराग न मिलने पर उसे मृत मान लिया गया था। बाद में उसकी पत्नी का विवाह परिवार में ही कर दिया गया था।
105 वर्षीय मां को था बेटे के लौटने का विश्वास
हंसा सिंह के भाई मौखा सिंह ने बताया कि उनके पिता का निधन हो चुका है, जबकि 105 वर्षीय मां जट्टा कौर आज भी जीवित हैं। वह रोज खाना खाने से पहले एक कौर हंसा के नाम का निकालती थीं और कहती थीं कि एक दिन उनका बेटा जरूर लौटेगा। कहा कि अब बेटे के जीवित देखकर मां बहुत खुश होगी।