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Bijnor News: समय से रेस्क्यू हो जाता तो बच सकती थी हाथी की जान
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भागूवाला में शुरूआती दौर में धान के खेत में फंसा हाथी।
भागूवाला/नजीबाबाद (बिजनौर)। राजगढ़ रेंज के निकट जंगल से बाहर आए हाथी के दलदल में फंसने और उसकी मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग के पास संसाधनों की कमी, सही समय पर सही निर्णय न लिया जाना और समय से रेस्क्यू न हो पाना हाथी की मौत की वजह बना।
भागूवाला में प्रकाश के धान के खेत में बृहस्पतिवार की सुबह चार बजे दलदल में फंसे हाथी को निकालने में घंटों विलंब हुआ। वन विभाग की टीम ने शुरुआती कई घंटे गांव वालों से मंगाई गईं कमजोर रस्सियों के सहारे हाथी को निकालने का प्रयास किया। बाद में जाल के सहारे जेसीबी आदि के माध्यम से हाथी को बाहर निकालने के लिए घंटों प्रयास किया। दलदल में जेसीबी धंसने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने पोकलेन और ट्रैक्टर आदि के माध्यम से दलदल में फंसे हाथी को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया।
पोकलेन के माध्यम से हाथी को दलदल से बाहर निकालने में वन विभाग को सफलता तो मिली लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हाथी को एक बार खेत से निकालने के बाद उसे दूसरे खेत में जाने से भी नहीं रोक पाए। पूरी तरह थक चुका हाथी कुछ समय बैठने के बाद खड़ा हुआ और लड़खड़ाता हुआ पास ही एक गन्ने के उस खेत में जाकर बैठ गया जहां पानी और दलदल था। जहां वह मूर्छित अवस्था में पहुंच गया।
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डीएफओ आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने पूरी रात रेस्क्यू अभियान चलाया। हाथी को बाहर निकालने के बाद 10 बोतल ग्लूकोज, मल्टी विटामिन, बूस्टर डोज देने के बावजूद वन विभाग हाथी को नहीं बचा सका।
- प्रकाश की दो बीघा धान की फसल हुई नष्ट
भागूवाला। भागूवाला निवासी प्रकाश के धान के जिस खेत में हाथी दलदल में फंसा था उसमें धान की फसल लगी थी। हाथी के दलदल में छटपटाने और रेस्क्यू अभियान में उसकी लगभग दो बीघा फसल बर्बाद हो गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण हाथी देखने घटनास्थल पर पहुंचे थे। रेस्क्यू अभियान में आईं जेसीबी, पोकलेन और ग्रामीणों के पांव तले भी कई किसानों की फसलें नष्ट हो गईं। किसानों ने वन विभाग से क्षेत्र का सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
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भागूवाला में प्रकाश के धान के खेत में बृहस्पतिवार की सुबह चार बजे दलदल में फंसे हाथी को निकालने में घंटों विलंब हुआ। वन विभाग की टीम ने शुरुआती कई घंटे गांव वालों से मंगाई गईं कमजोर रस्सियों के सहारे हाथी को निकालने का प्रयास किया। बाद में जाल के सहारे जेसीबी आदि के माध्यम से हाथी को बाहर निकालने के लिए घंटों प्रयास किया। दलदल में जेसीबी धंसने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने पोकलेन और ट्रैक्टर आदि के माध्यम से दलदल में फंसे हाथी को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया।
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पोकलेन के माध्यम से हाथी को दलदल से बाहर निकालने में वन विभाग को सफलता तो मिली लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हाथी को एक बार खेत से निकालने के बाद उसे दूसरे खेत में जाने से भी नहीं रोक पाए। पूरी तरह थक चुका हाथी कुछ समय बैठने के बाद खड़ा हुआ और लड़खड़ाता हुआ पास ही एक गन्ने के उस खेत में जाकर बैठ गया जहां पानी और दलदल था। जहां वह मूर्छित अवस्था में पहुंच गया।
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डीएफओ आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने पूरी रात रेस्क्यू अभियान चलाया। हाथी को बाहर निकालने के बाद 10 बोतल ग्लूकोज, मल्टी विटामिन, बूस्टर डोज देने के बावजूद वन विभाग हाथी को नहीं बचा सका।
- प्रकाश की दो बीघा धान की फसल हुई नष्ट
भागूवाला। भागूवाला निवासी प्रकाश के धान के जिस खेत में हाथी दलदल में फंसा था उसमें धान की फसल लगी थी। हाथी के दलदल में छटपटाने और रेस्क्यू अभियान में उसकी लगभग दो बीघा फसल बर्बाद हो गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण हाथी देखने घटनास्थल पर पहुंचे थे। रेस्क्यू अभियान में आईं जेसीबी, पोकलेन और ग्रामीणों के पांव तले भी कई किसानों की फसलें नष्ट हो गईं। किसानों ने वन विभाग से क्षेत्र का सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।