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हाईवों के निर्माण के साथ तेज हुई विकास
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किरतपुर में हाइवे के पास कालोनी विकसित करने के लिए काटे गए प्लॉट।
- फोटो : BIJNOR
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हाईवों के निर्माण के साथ तेज हुई विकास
बिजनौर। सड़कों और हाईवों के निर्माण के साथ विकास की रफ्तार भी तेज हो रही है। जिले में इस समय तीन हाईवों का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा बाईपास भी बन रहा है। इसके चलते प्रॉपर्टी डीलरों की नजर सड़कों के किनारे की जमीन पर है। शहर का विस्तार हो रहा है। हाईवे से सटी जमीन 25 से 30 लाख रुपये प्रति बीघा में बिक रही हैं। एनएच 119 पर स्वाहेड़ी गांव तक तो बिक्री वाली जमीन बची ही नहीं है। इससे पीछे वाली जमीन भी पंद्रह लाख रुपये बीघा तक बिक रही है।
नेशनल हाईवे 119 मेरठ-पौड़ी को फोरलेन में तब्दील किया जा रहा है। बिजनौर शहर के बाहर पश्चिम दिशा में इसका बाईपास बन रहा है। बाईपास बैराज मार्ग से शुरू होकर पेदा गांव के पास जाकर नजीबाबाद मार्ग पर निकलेगा। पेदा के पास से ही पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे के बाईपास का निर्माण किया जा रहा है। जो कोतवाली मार्ग पर वीकेआईटी कॉलेज के पास जाकर निकल रहा है। बिजनौर-नजीबाबाद मार्ग के अलावा बिजनौर-कोतवाली मार्ग को भी हाईवे में तब्दील किया जा रहा है। जिसका निर्माण चालू है। वहीं, हरिद्वार से नगीना तक नेशनल हाईवे 74 को फोरलेन बनाया जा रहा है। हरिद्वार से नगीना तक पांच बाईपास बन रहे हैं। मेरठ-पौड़ी हाईवे में चार बाईपास बनाए जा रहे हैं। इन सड़कों और बाईपास के निर्माण से जमीनों के दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं। हाईवे से सभी खेती की अधिकांश जमीनों को व्यापारी, कॉलानोइजर और निवेश करने वालों ने खरीद लिया है।
कॉलोनी के लिए बेचे जा रहे प्लॉट
जहां कभी खेत हुआ करते थे, वहां अब कॉलोनी विकसित करने का सपना कॉलोनाइजर देख रहे हैं। तीन सड़कों और उनके बाईपास के आसपास छोटे-छोटे प्लॉट बेचे जा रहे हैं। जंगल में आपको कॉलोनी काटने के लिए बनाई गई सड़कें और बिजली के खंभे दिखाई दे जाएंगे। कोतवाली मार्ग की बात करें तो बिजनौर से पांच किलोमीटर दूर तक प्लॉट बेचे जा रहे हैं। बान के पुल पर भी दोनों तरफ कॉलोनी काट दी गई है।
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दो साल में तीन गुना बढ़े दाम
हाईवे के किनारे होटल और रेस्टोरेंट के लिए भवन बन रहे हैं। कॉलोनी काटी जा रही हैं। जिला मुख्यालय पर जो कॉलोनी दूर थी, अब नए बाईपास के अंदर आ गई हैं। उनमें तीन गुणा तक दाम पिछले दो सालों में ही बढ़ गए हैं। इन कॉलोनी में एक साल पहले तक पांच से आठ हजार रुपये प्रति गज कीमत थी। अब पंद्रह हजार रुपये गज कर दी गई है।
कोट
जहां भी प्लाटिंग हो रही है, पहले उस कॉलोनी की जांच पड़ताल कर लें कि विनयमित क्षेत्र से स्वीकृत है या नहीं। अनाधिकृत कॉलोनियों को लेकर समय-समय पर अभियान चलते रहे हैं। - विक्रमादित्य सिंह मलिक, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर
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बिजनौर। सड़कों और हाईवों के निर्माण के साथ विकास की रफ्तार भी तेज हो रही है। जिले में इस समय तीन हाईवों का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा बाईपास भी बन रहा है। इसके चलते प्रॉपर्टी डीलरों की नजर सड़कों के किनारे की जमीन पर है। शहर का विस्तार हो रहा है। हाईवे से सटी जमीन 25 से 30 लाख रुपये प्रति बीघा में बिक रही हैं। एनएच 119 पर स्वाहेड़ी गांव तक तो बिक्री वाली जमीन बची ही नहीं है। इससे पीछे वाली जमीन भी पंद्रह लाख रुपये बीघा तक बिक रही है।
नेशनल हाईवे 119 मेरठ-पौड़ी को फोरलेन में तब्दील किया जा रहा है। बिजनौर शहर के बाहर पश्चिम दिशा में इसका बाईपास बन रहा है। बाईपास बैराज मार्ग से शुरू होकर पेदा गांव के पास जाकर नजीबाबाद मार्ग पर निकलेगा। पेदा के पास से ही पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे के बाईपास का निर्माण किया जा रहा है। जो कोतवाली मार्ग पर वीकेआईटी कॉलेज के पास जाकर निकल रहा है। बिजनौर-नजीबाबाद मार्ग के अलावा बिजनौर-कोतवाली मार्ग को भी हाईवे में तब्दील किया जा रहा है। जिसका निर्माण चालू है। वहीं, हरिद्वार से नगीना तक नेशनल हाईवे 74 को फोरलेन बनाया जा रहा है। हरिद्वार से नगीना तक पांच बाईपास बन रहे हैं। मेरठ-पौड़ी हाईवे में चार बाईपास बनाए जा रहे हैं। इन सड़कों और बाईपास के निर्माण से जमीनों के दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं। हाईवे से सभी खेती की अधिकांश जमीनों को व्यापारी, कॉलानोइजर और निवेश करने वालों ने खरीद लिया है।
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कॉलोनी के लिए बेचे जा रहे प्लॉट
जहां कभी खेत हुआ करते थे, वहां अब कॉलोनी विकसित करने का सपना कॉलोनाइजर देख रहे हैं। तीन सड़कों और उनके बाईपास के आसपास छोटे-छोटे प्लॉट बेचे जा रहे हैं। जंगल में आपको कॉलोनी काटने के लिए बनाई गई सड़कें और बिजली के खंभे दिखाई दे जाएंगे। कोतवाली मार्ग की बात करें तो बिजनौर से पांच किलोमीटर दूर तक प्लॉट बेचे जा रहे हैं। बान के पुल पर भी दोनों तरफ कॉलोनी काट दी गई है।
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दो साल में तीन गुना बढ़े दाम
हाईवे के किनारे होटल और रेस्टोरेंट के लिए भवन बन रहे हैं। कॉलोनी काटी जा रही हैं। जिला मुख्यालय पर जो कॉलोनी दूर थी, अब नए बाईपास के अंदर आ गई हैं। उनमें तीन गुणा तक दाम पिछले दो सालों में ही बढ़ गए हैं। इन कॉलोनी में एक साल पहले तक पांच से आठ हजार रुपये प्रति गज कीमत थी। अब पंद्रह हजार रुपये गज कर दी गई है।
कोट
जहां भी प्लाटिंग हो रही है, पहले उस कॉलोनी की जांच पड़ताल कर लें कि विनयमित क्षेत्र से स्वीकृत है या नहीं। अनाधिकृत कॉलोनियों को लेकर समय-समय पर अभियान चलते रहे हैं। - विक्रमादित्य सिंह मलिक, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर