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बिजनौर::गंगा खादर में फसल बुवाई की जांच को पहुंची शासन की टीम
Wed, 01 Mar 2023 12:04 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Wed, 01 Mar 2023 12:04 AM IST
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- हैदरपुर वेटलैंड में तीन सदस्यीय कमेटी ने पहुंचकर की जांच
- बिजनौर और मुजफ्फरनगर के अफसरों को भी रहा जमावड़ा
- झील से पानी छोड़े जाने और खादर में फसल बोने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। गंगा खादर में जमीनों पर कब्जा करते हुए फसल बोने का मामला शासन तक पहुंच चुका है। शासन की ओर से गठित टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच टीम के अलावा बिजनौर और मुजफ्फरनगर के अफसरों का भी मौके पर जमावड़ा रहा। फिलहाल टीम रिपोर्ट तैयार में जुटी है, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
गंगा खादर और हैदरपुर वेटलैंड की जमीन पर फसल बुवाई के मामले को लेकर शासन ने जांच कमेटी गठन किया था। इस कमेटी में शामिल मुख्य वन संरक्षक बरेली क्षेत्र ललित कुमार शर्मा, मुख्य वन संरक्षक मेरठ क्षेत्र एनके जानू और मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव एसएन मिश्र मंगलवार को गंगा खादर में पहुंचे। इस टीम के अलावा बिजनौर और मुजफ्फरनगर डीएफओ समेत अन्य वन अधिकारी तथा दोनों जिलों के राजस्व अधिकारी भी जांच के वक्त मौके पर मौजूद रहे।
जांच टीम ने हैदरपुर वैटलैंड के साथ साथ गंगा खादर का निरीक्षण किया। झील में पानी के जलस्तर और जमीन पर कब्जे का बारीकी से मुआयना किया गया। फिलहाल टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी। जिसे शासन को प्रेषित किया जाएगा।
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अवैध फसल पर चलवा दिए ट्रैक्टर
बता दें कि गंगा खादर में वेटलैंड की जमीन पर कब्जा करते हुए किसानों ने फसल बो रखी थी। दोनों ही जिलों की संयुक्त टीम ने पिछले दिनों हजारों बीघा जमीन पर खड़ी फसल पर ट्रैक्टर भी चलाया। बाद में इस टीम को किसान यूनियन के विरोध का भी सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है जमीन पर फसल की बुवाई कराने के मकसद से समय से पहले ही झील का पानी निकाल दिया गया था। जिसके चलते हजारों प्रवासी पक्षी भी यहां उड़ गए हैं।
हैदरपुर वेटलैंड मामले में गिर सकती है गाज
हैदरपुर वेटलैंड की जमीन पर फसल का मामला अब तूल पकड़ रहा है। पहले जहां दोनों जिले के अफसर इसे कब्जा मुक्त कराने में जुटे थे, वहीं अब शासन ने इसमें टीम गठित कर दी। कमाल यह है कि इस मामले में शुरुआत में दोनों ही जिले के अफसर इस जमीन पर दावे से इनकार करते रहे। बाद में यह जमीन मुजफ्फरनगर सीमा में बताई गई, वहीं सर्वे का अधिकार बिजनौर टीम का मिला। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद अवैध खेती के मामले में कुछ अफसरों पर शासन से गाज भी गिर सकती है।
हर जगह खादर में अवैध फसल, हो गई थी अफसरों में तनातनी
किसानों को खेत की मेढ़ पर लड़ते हुए देखा होगा, लेकिन प्रशासनिक अफसर भी किसानों की तरह एक दूसरे से भिड़ गए थे। यह वाकया हुआ था उत्तराखंड और बिजनौर के अफसरों के बीच संयुक्त पैमाइश के दौरान। बता दें कि पिछले दिनों बालावाली क्षेत्र में हरिद्वार के प्रशासनिक अफसर और बिजनौर के अफसर पैमाइश करने पहुंचे थे। सीमांकन के लिए पैमाइश को उत्तराखंड के एसडीएम ने नकार दिया। सूत्रों का कहना है कि इस पर गुस्साए बिजनौर के एक राजस्व अधिकारी और उत्तराखंड के अधिकारी के बीच तनातनी हो गई थी। हालांकि अन्य अधिकारियों ने बीच बचाव कराया। वहां भी पैमाइश के बाद जो हजारों बीघा जमीन सरकारी मिली है, उसमें अवैध खेती हो रही है।
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- बिजनौर और मुजफ्फरनगर के अफसरों को भी रहा जमावड़ा
- झील से पानी छोड़े जाने और खादर में फसल बोने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। गंगा खादर में जमीनों पर कब्जा करते हुए फसल बोने का मामला शासन तक पहुंच चुका है। शासन की ओर से गठित टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच टीम के अलावा बिजनौर और मुजफ्फरनगर के अफसरों का भी मौके पर जमावड़ा रहा। फिलहाल टीम रिपोर्ट तैयार में जुटी है, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
गंगा खादर और हैदरपुर वेटलैंड की जमीन पर फसल बुवाई के मामले को लेकर शासन ने जांच कमेटी गठन किया था। इस कमेटी में शामिल मुख्य वन संरक्षक बरेली क्षेत्र ललित कुमार शर्मा, मुख्य वन संरक्षक मेरठ क्षेत्र एनके जानू और मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव एसएन मिश्र मंगलवार को गंगा खादर में पहुंचे। इस टीम के अलावा बिजनौर और मुजफ्फरनगर डीएफओ समेत अन्य वन अधिकारी तथा दोनों जिलों के राजस्व अधिकारी भी जांच के वक्त मौके पर मौजूद रहे।
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जांच टीम ने हैदरपुर वैटलैंड के साथ साथ गंगा खादर का निरीक्षण किया। झील में पानी के जलस्तर और जमीन पर कब्जे का बारीकी से मुआयना किया गया। फिलहाल टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी। जिसे शासन को प्रेषित किया जाएगा।
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अवैध फसल पर चलवा दिए ट्रैक्टर
बता दें कि गंगा खादर में वेटलैंड की जमीन पर कब्जा करते हुए किसानों ने फसल बो रखी थी। दोनों ही जिलों की संयुक्त टीम ने पिछले दिनों हजारों बीघा जमीन पर खड़ी फसल पर ट्रैक्टर भी चलाया। बाद में इस टीम को किसान यूनियन के विरोध का भी सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है जमीन पर फसल की बुवाई कराने के मकसद से समय से पहले ही झील का पानी निकाल दिया गया था। जिसके चलते हजारों प्रवासी पक्षी भी यहां उड़ गए हैं।
हैदरपुर वेटलैंड मामले में गिर सकती है गाज
हैदरपुर वेटलैंड की जमीन पर फसल का मामला अब तूल पकड़ रहा है। पहले जहां दोनों जिले के अफसर इसे कब्जा मुक्त कराने में जुटे थे, वहीं अब शासन ने इसमें टीम गठित कर दी। कमाल यह है कि इस मामले में शुरुआत में दोनों ही जिले के अफसर इस जमीन पर दावे से इनकार करते रहे। बाद में यह जमीन मुजफ्फरनगर सीमा में बताई गई, वहीं सर्वे का अधिकार बिजनौर टीम का मिला। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद अवैध खेती के मामले में कुछ अफसरों पर शासन से गाज भी गिर सकती है।
हर जगह खादर में अवैध फसल, हो गई थी अफसरों में तनातनी
किसानों को खेत की मेढ़ पर लड़ते हुए देखा होगा, लेकिन प्रशासनिक अफसर भी किसानों की तरह एक दूसरे से भिड़ गए थे। यह वाकया हुआ था उत्तराखंड और बिजनौर के अफसरों के बीच संयुक्त पैमाइश के दौरान। बता दें कि पिछले दिनों बालावाली क्षेत्र में हरिद्वार के प्रशासनिक अफसर और बिजनौर के अफसर पैमाइश करने पहुंचे थे। सीमांकन के लिए पैमाइश को उत्तराखंड के एसडीएम ने नकार दिया। सूत्रों का कहना है कि इस पर गुस्साए बिजनौर के एक राजस्व अधिकारी और उत्तराखंड के अधिकारी के बीच तनातनी हो गई थी। हालांकि अन्य अधिकारियों ने बीच बचाव कराया। वहां भी पैमाइश के बाद जो हजारों बीघा जमीन सरकारी मिली है, उसमें अवैध खेती हो रही है।