{"_id":"61bb82e807662310d712ef79","slug":"government-should-start-scholarship-for-scheduled-caste-children-dhampur-news-mrt5693795183","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘अनुसूचित जाति के बच्चों की छात्रवृत्ति शुरू करे सरकार’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘अनुसूचित जाति के बच्चों की छात्रवृत्ति शुरू करे सरकार’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘अनुसूचित जाति के बच्चों की छात्रवृत्ति शुरू करे सरकार’
धामपुर। नगीना लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद गिरीश चंद ने कहा कि यूपी और केंद्र सरकार देश के अनुसूचित और जन जाति छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव बरत रही है। इस मामले को सांसद ने केंद्रीय शिक्षामंत्री के समक्ष में उठाकर निदान कराने की सिफारिश की।
क्षेत्र के सांसद ने बृहस्पतिवार को वार्ता में कहा कि सरकारों की ओर से विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितता तथा भेदभाव बरता जा रहा है। पिछले दिनों जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश के लिए जो साक्षात्कार हुए, उनमें लिखित परीक्षा के लिए 70 और मौखिक साक्षात्कार के लिए 30 अंक निर्धारित किए गए थे। साक्षात्कार के 30 अंक में कई अभ्यर्थियों में से अधिकांश एससी-एसटी तथा ओबीसी वर्ग के छात्र हैं। इन्हें सिर्फ एक, दो या तीन अंक प्रदान किए गए। 30 अंक की मौखिक परीक्षा में सिर्फ दो या तीन अंक देना किसी भी तरह से तार्किक या न्याय पूर्ण नहीं है। जेएनयू में ग्रामीण बच्चों को विशेष तरजीह दी जा रही है। भाजपा सरकार की मनमानी की वजह से अधिकांश बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित हैं। कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति बंद कर दी है। जिसे तुरंत ही शुरू किया जाए।
विज्ञापन
धामपुर। नगीना लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद गिरीश चंद ने कहा कि यूपी और केंद्र सरकार देश के अनुसूचित और जन जाति छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव बरत रही है। इस मामले को सांसद ने केंद्रीय शिक्षामंत्री के समक्ष में उठाकर निदान कराने की सिफारिश की।
क्षेत्र के सांसद ने बृहस्पतिवार को वार्ता में कहा कि सरकारों की ओर से विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितता तथा भेदभाव बरता जा रहा है। पिछले दिनों जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश के लिए जो साक्षात्कार हुए, उनमें लिखित परीक्षा के लिए 70 और मौखिक साक्षात्कार के लिए 30 अंक निर्धारित किए गए थे। साक्षात्कार के 30 अंक में कई अभ्यर्थियों में से अधिकांश एससी-एसटी तथा ओबीसी वर्ग के छात्र हैं। इन्हें सिर्फ एक, दो या तीन अंक प्रदान किए गए। 30 अंक की मौखिक परीक्षा में सिर्फ दो या तीन अंक देना किसी भी तरह से तार्किक या न्याय पूर्ण नहीं है। जेएनयू में ग्रामीण बच्चों को विशेष तरजीह दी जा रही है। भाजपा सरकार की मनमानी की वजह से अधिकांश बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित हैं। कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति बंद कर दी है। जिसे तुरंत ही शुरू किया जाए।
विज्ञापन