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Exclusive: रेडियो की दुनिया के बादशाह गोपाल शर्मा ने श्रोताओं के लिए ठुकरा दिया था बीबीसी लंदन का निमंत्रण, आशा भोंसले से था खास रिश्ता

Mon, 25 May 2020 04:29 PM IST
मेरठ ब्यूरो अशोक मधुप, अमर उजाला, बिजनौर
अशोक मधुप, अमर उजाला, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Mon, 25 May 2020 04:29 PM IST
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Gopal Sharma made an identity in the world with his voice
महेंद्र कपूर के साथ गोपाल शर्मा - फोटो : amar ujala
दिसंबर सन् 1931 में बिजनौर जनपद के चांदपुर नगर में जन्मे गोपाल शर्मा ने आवाज की दुनिया में वो नाम रोशन किया कि उनके समय का हर गायक और फिल्मी कलाकर उनका दीवाना रहा। हर गायक और कलाकर की तमन्ना होती कि गोपाल शर्मा उन पर नजरें करम कर दें और उनकी गाड़ी चल निकले। जानी-मानी गायिका आशा भोंसले ने तो उन्हें भाई बनाया था। गोपाल शर्मा के बेटे के जन्म पर वह चांदपुर आईं भी थीं।
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टीवी से पहले रेडियो युग था। रेडियो कार्यक्रम सुनने के लिए उस समय लाइन लगती थी। आकाशवाणी दिल्ली से शाम को आने वाले किसान भाइयों के कार्यक्रम को सुनने के लिए चौपाल या रेडियो स्वामी के घर पर भीड़ एकत्र हो जाती थी।
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सन् 1960 के आसपास रेडियो सिलोन भारत ही नहीं पूरी एशिया में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम प्रस्तुत करता था। विविध भारती शास्त्रीय संगीत पर आधारित कार्यक्रम पेश करता था।
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उस पर बजने वाले फिल्मी गाने भी प्राय: शास्त्रीय संगीत पर आधारित होते थे। जबकि रेडियो सिलोन शुद्ध मनोरंजन के लिए कार्यक्रम प्रस्तुत करता था और उस पर भारतीय फिल्मों के सभी गाने बजते थे।

मनोरंजन के लिए फिल्मों के गाने बजने के कारण रेडियो सिलोन पूरे एशिया में भारतीयों का सबसे पंसदीदा था। गोपाल शर्मा 1956 से 24 अप्रैल 67 तक 11 साल लगातार इस स्टेशन के हिंदी कार्यक्रमों के अनाउंसर रहे।

एक साल की उम्र में गोपाल शर्मा की माता का निधन हो गया। बिना माता की छत्र छाया में पले बढ़े गोपाल शर्मा ने आर्थिक समस्याओं से जूझते हुए मेरठ कॉलेज मेरठ से बीए की परीक्षा उतीर्ण की। बीए करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भाग्य आजमाने मुंबई पहुंच गए। यहां कुछ बनने के लंबे और अथक संघर्ष में उनकी उस समय के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता बलराज साहनी से मुलाकात हो गई।

कुछ समय उनके ग्रुप में काम किया और बलराज साहनी की सलाह पर रेडियो की दुनिया में प्रवेश कर गए। रेडियो के कैजुअल आर्टिस्ट के रूप में काम करते समय रेडियो सिलौन के लिए चयन हो गया। रेडियो सिलोन में काम करने के दौरान मेरठ में उनका विवाह हुआ।

रेडियो सिलोन के लिए 11 साल लगातार काम कर गोपाल शर्मा ने एक रिकार्ड बनाया। भारत लौटकर गोपाल शर्मा ने आकाशवाणी के कैजुअल आर्टिस्ट के रूप में काम करने के साथ ही विभिन्न कंपनियों के लिए विज्ञापन बनाने और बड़े कार्यक्रम के संचालन का लंबे समय तक कार्य किया। रेडियो सिलोन से लौटकर गोपाल शर्मा मुंबई में बस गए थे

एक भेंट में अपनी कामयाबी का राज समय का पालन करना बताया था। वह कहते थे कि मैं प्रत्येक कार्यक्रम में निर्धारित समय से पहले पहुंचता रहा हूं। रेडियो सिलोन के 11 साल के कार्यकाल में एक दिन भी देर से नहीं पहुंचा।

Gopal Sharma made an identity in the world with his voice
महेंद्र कपूर के साथ गोपाल शर्मा - फोटो : amar ujala
बीबीसी लंदन का निमंत्रण नहीं किया स्वीकार
अपनी आत्मकथा आवाज की दुनिया के दोस्तों में वह कहते हैं कि विविध भारती में चयन के लिए बुलाए जाने पर उन्होंने कार्य करने से इसलिए इंकार कर दिया कि उस पर सरकारी तंत्र हावी है। कुछ नया करने वालों की कोई कदर नहीं है। अपनी आत्मकथा में गोपाल शर्मा लिखा है कि रेडियो सिलोन पर कार्य करने के दौरान मैं भारत आया था।

एक कार्यक्रम में बीबीसी लंदन के रत्नाकर भारतीय जी से मुलाकात हो गई। उन्होंने तुरंत कहा, शर्मा जी आप कहां रेडियो सिलोन में पड़े हैं। आपका स्थान बीबीसी लंदन है। आप जब चाहें तब आपको बुलवा सकता हूं। मैंने कहा, भारतीय जी बीबीसी लंदन नंबर एक है। लेकिन मेरा मानना यह है कि आपके प्रोग्राम सुनने वाले भारत में गिने चुने हैं। जबकि मेरा प्रोग्राम सुनने वाले एशिया भर में करोड़ों हैं। मैं करोड़ों श्रोताओं का दिल नहीं दुखा सकता। रुपया कमाना मेरा लक्ष्य नहीं है।

फिल्म में भी किया काम
गोपाल शर्मा अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि उन्होंने तीन अन्य साथियों के साथ फिल्म अधिकार के भजन माटी कहे कुम्हार में बाल साधु की भूमिका की। मैं सोचता था कि गाने के दो तीन मिनट में स्क्रीन पर मेरा चेहरा एक दो बार दिखाया गया होगा। फिल्म रिलीज हो गई किंतु जेब में इतने पैसे नहीं थे कि फिल्म देख पाते। रेडियो सिलोन पर जाने से पूर्व चांदपुर गया तो हमारे बहुत सीनियर और हाकी के बड़े खिलाड़ी कैलाश मित्तल मेरे से विशेष रूप से मिलने आए। उनका चांदपुर में सिनेमा हाल है। कहने लगे शर्मा जी आपकी फिल्म अधिकार की एंक्टिग से मुझे बहुत आमदनी हुई।

मैंने जगह - जगह आपके नाम का प्रचार कराया कि चांदपुर का तरुण कलाकार गुरू रघुनाथ प्रसाद का लड़का गोपाल शर्मा फिल्म में काम कर रहा है। इसका इतना असर हुआ कि अकेले चांदपुर में फिल्म अधिकार एक साल तक चली। बिजनौर जनपद में कई साल तक यह फिल्म चलाई और इतनी आमदनी हुई कि हमारा एक और सिनेमा हाल बन गया।

मोहम्मद रफी से मुलाकात गोपाल शर्मा लिखते हैं कि मै एक बार भारत आने पर ओपी नैय्यर साहब से मिलने गया। मुझे देखते ही नैय्यर साहब ने कहा कि विदेश जाने की सूचना तो रेडियो से दो ही व्यक्तियों के बारे में दी जाती है, एक तो भारत के प्रधानमंत्री और दूसरे रेडियो सिलोन के गोपाल शर्मा की।

बाते शुरू ही की थीं कि कुछ ही देर में फोन आ गया। नैय्यर साहब ने कहा आप जिनके बारे में पूछ रहें हैं, वे मेरे पास बैठे हैं। उन्होंने मुझे फोन दे दिया। फोन करने वाले मो. रफी थे। वे मुझसे मिलना चाहते थे।

मैंने नैय्यर साहब से आज्ञा ली और रफी साहब से मिलने चला गया।मिलते ही उन्होंने तुरंत मुझे सीने से लगा लिया। बोले जब मैं नया नया मुंबई आया था तो मेरे भाई हमीद साहब ने मेरे लिए खूब भागदौड़ की। मेरा अरमान था कि मुझे जनाब कुंदन लाल सहगल साहब केसाथ गाने का मौका मिले।

मौका मिला भी जूही, जूही, जूही..., मेरे सपनों की रानी..., वाले गीत में। इस गीत के अंत में सोलो लाइन दो बार मैने गाई। संगीत प्रेमियों को यह बात रेडियो सिलोन पर सबसे पहले गोपाल शर्मा जी आप ने ही बताई। महान गायक रफी साहब ही नहीं बल्कि उस समय का हर गायक गोपाल शर्मा से मिलने केलिए उत्सुक रहता था।

Gopal Sharma made an identity in the world with his voice
गोपाल शर्मा - फोटो : amar ujala
मेेरठ हुई थी गोपाल शर्मा की शादी
रेडियो सिलोन के लगातार 11 साल तक अनांउसर रहे गोपाल शर्मा की शादी मेरठ के पंडित शिव शंकर शर्मा की पुत्री शशि शर्मा से 13 अप्रैल 1964 को हुई। मेरठ का यह परिवार आर्य समाजी था। शशि शर्मा के दादा पंडित तुलसीराम वेदों के बड़े विद्वान थे। इन्होंने संस्कृत से वेदों का हिंदी में अनुवाद किया था। इस शादी की विशेषता यह थी कि इसमें मुंबई से गायक महेंद्र कपूर आए थे।

गोपाल शर्मा ने अपनी पुस्तक आवाज की दुनिया के दोस्तों में इस शादी के बारे में भी विस्तार से बताया है। वह कहते हैं कि शशि के दादाजी की तुलसी प्रेस थी। उस समय उनकी शादी का सब और चर्चा था। अखबारों में खबर छप रही थी। 13 अप्रैल को दो बसों से मेरठ बरात गई थी। इस शादी में गायक महेंद्र कपूर, एक करोड़पति श्रोता सुरेश चंद्र अग्रवाल, आशा भोंसले के सेकेटरी प्राण ऐरी, गुजराती अनाउंसर सहाग दीवान और हिंदी विभाग के वरिष्ठ उद्घोषक शील वर्मा समेत पांच व्यक्ति मुंबई से आए थे।

वे कहते है कि उनके ससुरालवालों को ये पता नहीं था कि उनका दामाद रेडियो सिलोन का प्रसिद्ध उद्घोषक गोपाल शर्मा हैं। महेंद्र कपूर ने14 अप्रैल को सुबह दो बजे से सवेरे छह बजे चार घंटे लगातार बरातियों और घरातियों का मनोरजन किया। महेंद्र कपूर के कार्यक्रम की मेरठ में खूब धूम रही।

14 की शाम को बरात विदा होकर चांदपुर आ गई। रेडियो सिलोन ने उनकी शादी की खुशी में सभी भाषाओं के प्रोग्राम में विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वे कहते हैं कि उनकी शादी की दावत मुंबई के होटल नटराज में हुई थी। व्यवस्था गायक महेंद्र कपूर ने की थी। प्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोंसले ने उन्हें अपना भाई बनाया था। उनके बेटी के जन्म पर वे चांदपुर आई थीं और बेटी का नामकरण किया था। बेटी को नाम दिया था चेतना। बाद में परिवार वालों की सलाह के बाद उसका नाम महिमा कर दिया था।
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