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गंगा उफान पर, सैकड़ों बीघा फसल नष्ट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jul 2017 12:33 AM IST
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मीरापुर के जंगल में खेतों में घुसा गंगा का पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीण दहशत में है। मीरापुर, कोहरपुर, सीमलीकला के पास गंगा कटान कर रही है। मीरापुर के पास हो रहे कटान से गंगा गांव से करीब 50 मीटर की दूरी पर है। सैकड़ों बीघा फसल नष्ट हो गई है।
मीरापुर के ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। बरसात शुरू होते ही गंगा नदी उफान पर है। क्षेत्र के गांव मीरापुर, सीमली कला, कोहरपुर के पास से गंगा की जलधारा लगातार कटान कर रही है। ग्रामवासियों का कहना है कि मीरापुर के पास सैकड़ों बीघा फसल नष्ट हो गई है।
कटान होने से क्षेत्र के लोग परेशान हैं। सबसे अधिक परेशानी गांव मीरापुर को है गंगा के लगातार कटान होने से करीब 50 मीटर की दूरी पर गंगा की जलधारा बह रही है। ग्रामीणों ने गंगा के किनारे ही प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
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ग्रामीण मनीराम, रामशरण, लित्तर सिंह, नौबहार सिंह, सुमन देवी, सीमा रानी और ज्ञानों देवी आदि का कहना था कि प्रत्येक वर्ष गंगा तबाही लेकर आती है पर प्रशासन की ओर से समुचित इंतजाम नहीं किए जाते हैं। कई दिन से कटान हो रहा है। इसके बाद भी प्रशासन ने खबर तक नहीं ली।
बाढ़ से निपटने को प्रशासन ने की तैयारी
जिला प्रशासन ने बाढ़ की रोकथाम के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है। बाढ़ आशंकित क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। छह बाढ़ चौकियां बनाई गई है। 35 प्राइवेट नाव एवं 31 गोताखोरों की व्यवस्था की गई है। किसी क्षेत्र में बाढ़ आई तो भोजन की व्यवस्था जिला पूर्ति विभाग तथा पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था जिला कृषि विभाग को करनी होगी।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सुरेंद्र राम ने बताया कि मानसून सत्र प्रारंभ होते ही प्रशासन ने बाढ़ के रोकथाम के लिए व्यापक तैयारी की है। जिले में गंगा, मालन, खो, गांगन, रामगंगा, बनैली, धारा, पीली तथा फीका प्रमुख नदियां हैं। इनसे बरसात के दिनों में कटान होता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुंदनपुर, शेरकोट, कोपा, हादकपुर आदि को चिह्नित किया गया है। अफजलगढ़, धामपुर, नजीबाबाद, हरेवली, दारानगर गंज और कलक्ट्रेट परिसर में भी बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। इसका नंबर 01342-262160 है। जिले में 35 नावों की व्यवस्था की गई है और 31 गोताखोर भी तैनात किए गए हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए खाने के पैकेट जिला पूर्ति विभाग तथा पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था जिला कृषि अधिकारी करेंगे। उन्होंने बताया कि पीएसी की व्यवस्था भी की गई है। सेना और पीएसी के ठहरने के लिए आरजेपी कॉलेज, वर्धमान कॉलेज में की गई है।
उन्होंने बताया कि बरसात का समय शुरू होते ही प्रभावित क्षेत्रों पर प्रशासन पूरी तरह से नजर रखे हुए हैं। अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष पर भी कर्मचारी तैनात रहेंगे। इसके लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीण दहशत में है। मीरापुर, कोहरपुर, सीमलीकला के पास गंगा कटान कर रही है। मीरापुर के पास हो रहे कटान से गंगा गांव से करीब 50 मीटर की दूरी पर है। सैकड़ों बीघा फसल नष्ट हो गई है।
मीरापुर के ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। बरसात शुरू होते ही गंगा नदी उफान पर है। क्षेत्र के गांव मीरापुर, सीमली कला, कोहरपुर के पास से गंगा की जलधारा लगातार कटान कर रही है। ग्रामवासियों का कहना है कि मीरापुर के पास सैकड़ों बीघा फसल नष्ट हो गई है।
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कटान होने से क्षेत्र के लोग परेशान हैं। सबसे अधिक परेशानी गांव मीरापुर को है गंगा के लगातार कटान होने से करीब 50 मीटर की दूरी पर गंगा की जलधारा बह रही है। ग्रामीणों ने गंगा के किनारे ही प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
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ग्रामीण मनीराम, रामशरण, लित्तर सिंह, नौबहार सिंह, सुमन देवी, सीमा रानी और ज्ञानों देवी आदि का कहना था कि प्रत्येक वर्ष गंगा तबाही लेकर आती है पर प्रशासन की ओर से समुचित इंतजाम नहीं किए जाते हैं। कई दिन से कटान हो रहा है। इसके बाद भी प्रशासन ने खबर तक नहीं ली।
बाढ़ से निपटने को प्रशासन ने की तैयारी
जिला प्रशासन ने बाढ़ की रोकथाम के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है। बाढ़ आशंकित क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। छह बाढ़ चौकियां बनाई गई है। 35 प्राइवेट नाव एवं 31 गोताखोरों की व्यवस्था की गई है। किसी क्षेत्र में बाढ़ आई तो भोजन की व्यवस्था जिला पूर्ति विभाग तथा पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था जिला कृषि विभाग को करनी होगी।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सुरेंद्र राम ने बताया कि मानसून सत्र प्रारंभ होते ही प्रशासन ने बाढ़ के रोकथाम के लिए व्यापक तैयारी की है। जिले में गंगा, मालन, खो, गांगन, रामगंगा, बनैली, धारा, पीली तथा फीका प्रमुख नदियां हैं। इनसे बरसात के दिनों में कटान होता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुंदनपुर, शेरकोट, कोपा, हादकपुर आदि को चिह्नित किया गया है। अफजलगढ़, धामपुर, नजीबाबाद, हरेवली, दारानगर गंज और कलक्ट्रेट परिसर में भी बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। इसका नंबर 01342-262160 है। जिले में 35 नावों की व्यवस्था की गई है और 31 गोताखोर भी तैनात किए गए हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए खाने के पैकेट जिला पूर्ति विभाग तथा पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था जिला कृषि अधिकारी करेंगे। उन्होंने बताया कि पीएसी की व्यवस्था भी की गई है। सेना और पीएसी के ठहरने के लिए आरजेपी कॉलेज, वर्धमान कॉलेज में की गई है।
उन्होंने बताया कि बरसात का समय शुरू होते ही प्रभावित क्षेत्रों पर प्रशासन पूरी तरह से नजर रखे हुए हैं। अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष पर भी कर्मचारी तैनात रहेंगे। इसके लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।