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कोहरे की मार से गिर रही चीनी की रिकवरी

Fri, 29 Jan 2021 11:11 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jan 2021 11:11 PM IST
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Forest department is also active along with animal husbandry department
कोहरे की मार से गिर रही चीनी परता दर
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बिजनौर। पिछले साल देर से चले पेराई सत्र और अब कोहरे की मार का खामियाजा चीनी मिलों को अब तक भुगतना पड़ रह है। चीनी की रिकवरी अब तक पिछले साल के बराबर नहीं हो पाई है। चीनी रिकवरी न बढ़ने से चीनी मिलों को लगातार घाटा हो रहा है। मिलों को प्रति क्विंटल गन्ने पर 10 से 15 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
चीनी मिलों का पेराई सत्र करीब आधा पूरा हो चुका है। पेराई सत्र शुरू होने के समय रिकवरी काफी कम आ रही थी। मिलों को उम्मीद थी कि कुछ दिन की पेराई के बाद गन्ना रिकवरी बढ़ जाएगी। रिकवरी नौ प्रतिशत तक आ रही थी, जो पिछले साल से बहुत कम थी। मिल अफसरों को लगा कि पिछले साल गन्ना पेराई सत्र जून तक चला था। इस वजह से गन्ना पूरी तरह पक नहीं पाया और रिकवरी कम रही। कमजोर गन्ना कटने के बाद में धीरे धीरे रिकवरी बढ़ी तो मिल अफसरों के चेहरे खिल गए। मिलों की रिकवरी बेहतर हुई तो कोहरे की मार फिर से चीनी की रिकवरी पर पड़ी है। कोहरे का असर भी चीनी की रिकवरी पर पड़ता है। पहले कमजोर गन्ने और अब कोहरे की वजह से चीनी रिकवरी प्रभावित हो रही है। चीनी का औसत उत्पादन पिछले साल से कम आ रहा है। प्रति क्विंटल गन्ने में औसन 300 से 500 ग्राम तक चीनी कम बन रही है। जबकि एक क्विंटल गन्ने में नौ किलो से 11 किलो तक चीनी निकलती है।
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चीनी मिल पिछले साल इस साल
धामपुर 10.62 9.87
स्योहारा 10.87 9.69
बिलाई 11.67 11.45
बहादरपुर 12.07 10.23
बरकातपुर 10.59 9.95
बुंदकी 11.35 10.31
चांदपुर 11.04 10.84
बिजनौर 11.02 10.36
नजीबाबाद 11.69 11.30
कुल 10.97 10.17
नोट:रिकवरी प्रति क्विंटल गन्ने से बनी चीनी की है।
सुक्रोज से बनती है चीनी
गन्ने में ग्लूकोज और सुक्रोज दो तत्व होते हैं। ग्लूकोज पौधे की खुराक होती है और सुक्रोज चीनी। गन्ना जब तक पकता नहीं वह सुक्रोज खाता है। ज्यादा दिन तक धूप न निकलने पर पौधा पूरा भोजन नहीं बना पाता और तब भी वह सुक्रोज ही खाता है। इससे रिकवरी प्रभावित होती है। बिलाई चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह के अनुसार चीनी की रिकवरी पिछले साल से कम आ रही है। मौसम साफ होने पर रिकवरी बढ़ने की उम्मीद है। रिकवरी न बढ़ने से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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