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सेंक्चुअरि से बाहर आने को छटपटा रहे पांच गांव
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सेंक्चुअरि से बाहर आने को छटपटा रहे पांच गांव
बिजनौर। हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के नई अधिसूचना और क्षेत्र निर्धारण में पांच गांवों के लोगों ने आपत्ति लगाकर उन्हें इस दायरे से बाहर करने की मांग उठाई। समिति ने क्षेत्र निर्धारण ठीक बताते हुए उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया है। इस फैसले से करीब दस हजार लोग प्रभावित होंगे। नई अधिसूचना में पहले ही 200 से ज्यादा गांव सेेंक्चुअरि क्षेत्र से बाहर कर दिए गए थे, अब मात्र 115 गांव इस दायरे में रह गए हैं।
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि की अंतिम अधिसूचना की तैयारी शुरू हुई तो अब इसमें शामिल गांव भी उन्हें इस दायरे से बाहर करने की मांग उठाने लगे हैं। प्रशासन ने अधिसूचना से पहले आपत्ति मांगी थी तो रावली, दारानगर गंज, फरीदपुर काजी, जहानाबाद, घुड़ियापुर गांवों के लोगों ने आपत्ति जताई और इस दायरे से बाहर करने की मांग की। यह सभी गांव गंगा किनारे वाले हैं। कारण जाना गया तो रावली निवासी विजेंद्र सिंह ने बताया कि सेंक्चुअरि दायरे में होने के कारण वहां विकास नहीं हो पाता। विकास के लिए उन्हें इस दायरे से बाहर करना जरूरी है। डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि वहां पहले से ही खेती हो रही है। उनकी आपत्ति खारिज कर दी गई है। करीब 212 गांव सेंक्चुअरि से बाहर हो रहे हैं, वहीं अब सेंक्चुअरि में शामिल गांवों की संख्या 115 रह जाएंगी।
जहां तक दिखेंगे हिरण और बारहसिंगा, वह सेंक्चुअरि में शामिल होगा
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि से करीब दो सौ गांवों को तो बाहर कर दिया है, लेकिन गंगा के किनारे के जंगल का निर्धारण करने के लिए वन्यजीव संस्थान सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है। इस सर्वे में उन जंगलों को सेंक्चुअरि में शामिल कर लिया जाएगा, जहां तक हिरण विचरण करते दिखाई देंगे। जो पांचों गांवों की आपत्ति खारिज हुई हैं, उन क्षेत्रों में बारहसिंगा देखा जाता रहा है।
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पांच जिलों में फैली है सेंक्चुअरि
सेंक्चुअरि की बात करें तो यह पांच जिले बिजनौर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, मेरठ और हापुड़ में गंगा के दोनों किनारों पर 2,073 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। अब इसे घटाकर 1,094 वर्ग किमी करने की तैयारी हो रही है। बिजनौर और चांदपुर तहसील में 327 गांव थे। इसे घटाकर करीब 115 तक करने की तैयारी हो रही है।
बारहसिंगा के संरक्षण को बनी थी हस्तिनापुर सेंक्चुअरि
हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरि की पहली अधिसूचना 1986 में की गई थी। 2073 वर्ग किमी इस सेंक्चुअरि का क्षेत्रफल बताया जाता है। यूं तो इसे बारहसिंगा के लिए संरक्षित किया गया था, इस सेंक्चुअरि में हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, गंगा में घड़ियाल, डॉल्फिन, सैकड़ों प्रजाति के पक्षी, अजगर आदि देखने को मिलते हैं।
जो गांव बाहर होंगे, वहां यह होंगे लाभ
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में आने वाले क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, विद्युतीकरण या फिर निर्माण कार्यों पर पाबंदी है। हालांकि बिजनौर और चांदपुर क्षेत्र के अधिकांश इलाके विकसित हो गए थे और इसके पुनर्गठन की आवश्यकता थी। अब जो 212 गांव सेंक्चुअरि से बाहर होने जा रहे हैं, वह विकसित हो सकेंगे।
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बिजनौर। हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के नई अधिसूचना और क्षेत्र निर्धारण में पांच गांवों के लोगों ने आपत्ति लगाकर उन्हें इस दायरे से बाहर करने की मांग उठाई। समिति ने क्षेत्र निर्धारण ठीक बताते हुए उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया है। इस फैसले से करीब दस हजार लोग प्रभावित होंगे। नई अधिसूचना में पहले ही 200 से ज्यादा गांव सेेंक्चुअरि क्षेत्र से बाहर कर दिए गए थे, अब मात्र 115 गांव इस दायरे में रह गए हैं।
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि की अंतिम अधिसूचना की तैयारी शुरू हुई तो अब इसमें शामिल गांव भी उन्हें इस दायरे से बाहर करने की मांग उठाने लगे हैं। प्रशासन ने अधिसूचना से पहले आपत्ति मांगी थी तो रावली, दारानगर गंज, फरीदपुर काजी, जहानाबाद, घुड़ियापुर गांवों के लोगों ने आपत्ति जताई और इस दायरे से बाहर करने की मांग की। यह सभी गांव गंगा किनारे वाले हैं। कारण जाना गया तो रावली निवासी विजेंद्र सिंह ने बताया कि सेंक्चुअरि दायरे में होने के कारण वहां विकास नहीं हो पाता। विकास के लिए उन्हें इस दायरे से बाहर करना जरूरी है। डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि वहां पहले से ही खेती हो रही है। उनकी आपत्ति खारिज कर दी गई है। करीब 212 गांव सेंक्चुअरि से बाहर हो रहे हैं, वहीं अब सेंक्चुअरि में शामिल गांवों की संख्या 115 रह जाएंगी।
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जहां तक दिखेंगे हिरण और बारहसिंगा, वह सेंक्चुअरि में शामिल होगा
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि से करीब दो सौ गांवों को तो बाहर कर दिया है, लेकिन गंगा के किनारे के जंगल का निर्धारण करने के लिए वन्यजीव संस्थान सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है। इस सर्वे में उन जंगलों को सेंक्चुअरि में शामिल कर लिया जाएगा, जहां तक हिरण विचरण करते दिखाई देंगे। जो पांचों गांवों की आपत्ति खारिज हुई हैं, उन क्षेत्रों में बारहसिंगा देखा जाता रहा है।
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पांच जिलों में फैली है सेंक्चुअरि
सेंक्चुअरि की बात करें तो यह पांच जिले बिजनौर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, मेरठ और हापुड़ में गंगा के दोनों किनारों पर 2,073 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। अब इसे घटाकर 1,094 वर्ग किमी करने की तैयारी हो रही है। बिजनौर और चांदपुर तहसील में 327 गांव थे। इसे घटाकर करीब 115 तक करने की तैयारी हो रही है।
बारहसिंगा के संरक्षण को बनी थी हस्तिनापुर सेंक्चुअरि
हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरि की पहली अधिसूचना 1986 में की गई थी। 2073 वर्ग किमी इस सेंक्चुअरि का क्षेत्रफल बताया जाता है। यूं तो इसे बारहसिंगा के लिए संरक्षित किया गया था, इस सेंक्चुअरि में हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, गंगा में घड़ियाल, डॉल्फिन, सैकड़ों प्रजाति के पक्षी, अजगर आदि देखने को मिलते हैं।
जो गांव बाहर होंगे, वहां यह होंगे लाभ
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में आने वाले क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, विद्युतीकरण या फिर निर्माण कार्यों पर पाबंदी है। हालांकि बिजनौर और चांदपुर क्षेत्र के अधिकांश इलाके विकसित हो गए थे और इसके पुनर्गठन की आवश्यकता थी। अब जो 212 गांव सेंक्चुअरि से बाहर होने जा रहे हैं, वह विकसित हो सकेंगे।