फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Feel proud not speaking hindi

हिंदी बोलने में शर्म नहीं गर्व की अनुभूति करें

Wed, 12 Aug 2020 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2020 12:24 AM IST
विज्ञापन
Feel proud not speaking hindi
डा.अजय जन्मेजय। - फोटो : BIJNOR
हिंदी बोलने में शर्म नहीं गर्व की अनुभूति करें
विज्ञापन

बिजनौर। युवाओं में हिंदी के घटते ग्राफ और लोकप्रियता को लेकर अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ कार्यक्रम के तहत हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय जन्मेजय से बात की। डॉ. जन्मेजय ने अमर उजाला से बातचीत में हिंदी के उत्थान और युवा पीढ़ी में इसके प्रति सम्मान का भाव जाग्रत करने के तरीके बताए।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय जन्मेजय चिकित्सक होने के साथ हिंदी साहित्य एवं बाल साहित्य के प्रसिद्ध कवि भी हैं। उन्होंने बच्चों के लिए कविताएं, गीत और साहित्य भी लिखा। हिंदी वर्णमाला पर दोहे लिखे, जो बहुत मशहूर हुए। अमर उजाला ने उनसे राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रति युवाओं में सम्मान भाव की कमी और मातृ भाषा के उत्थान को लेकर चर्चा की। डॉ. जन्मेजय ने हिंदी के प्रचार-प्रसार और इसकी गुणवत्ता के प्रति ध्यान आकर्षित कराते हुए बताया कि देश में हिंदी का प्रचार-प्रसार तो काफी हो रहा है, लेकिन गुणवत्ता की कमी के कारण इसकी लोकप्रियता घटती जा रही है। युुवा पीढ़ी और छात्रों को हिंदी से जुड़ाव कम होता जा रहा। यही कारण है कि आज सर्वाधिक छात्र हिंदी विषय में ही फेल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी से युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए हिंदी को अपने गौरव से जोड़ने की आवश्यकता है। जिन लोगों ने हिंदी में काम करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। हम उनका सम्मान करें और युवा पीढ़ी को उनके बारे में बताएं। बच्चों में प्राथमिक स्तर से ही हिंदी के प्रति जुड़ाव पैदा करना होगा।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि हिंदी विश्व की एकमात्र ऐसी भाषा है जो वैज्ञानिक कसौटियों पर खरी उतरती है। हिंदी भाषा में हर मात्रा के लिए अलग चिन्ह होता है। हिंदी को स्वर व व्यंजन दो हिस्सों में बांटा गया है। स्वर व व्यजन को भी कई वर्गों में विभाजित किया गया है। इसमें जो लिखा जाता है, वही बोला जाता है। लेकिन हिंदी का उच्चारण गलत बोलने की वजह से इसका ग्राफ गिरता जा रहा है। हम गलत उच्चारणों को देख-सुन और पढ़कर अनदेखा व अनसुना कर देते हैं। सब चलता है बोलकर कर टाल देते हैं। इस सब चलता है ने हिंदी भाषा को गर्त में पहुंचा दिया है। हिंदी का उच्चारण सुधारने के लिए शिक्षकों को भी हिंदी का पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है। तभी एक शिक्षक हिंदी का सही ज्ञान छात्रों को भी दे सकता है। हिंदी के प्रति छात्रों की रुचि पैदा करने के लिए पढ़ाई के तरीके को रुचिकर बनाना होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी के बिना राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती। हमें अपनी मातृ भाषा पर गर्व होना चाहिए। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसे रोजगार से जोड़ना होगा। हिंदी भाषा में खुद को आगे बढ़ाने की बड़ी ताकत है लेकिन हमारी कमजोरी के कारण इसका उत्थान नहीं हो पा रहा। हमें अपनी राष्ट्रभाषा में बात करते हुए शर्म नहीं बल्कि गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। उन्होंने नारे के रूप में अपना दोहा पढ़ा, ‘हिंदी के उत्थान में बस इतना सहयोग, आज से ही हम करें हिंदी का प्रयोग’।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed