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किसानों को दी जाएगी नगीना वल्लभ वास्मती-1 बीज की किट
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कम समय में अधिक उपज ले सकेंगे किसान
बिजनौर। धान का उत्पादन बढ़ाने के लिए इस साल से नगीना वल्लभ बासमती-1 का बीज किसानों के बीच पहुंचेगा। किसानों को इस बासमती के बीज की किट बांटी जाएंगी। करीब 300 किसानों को किट दी जाएंगी। किसान अपने खेत में फसल पैदा करके अगले सालों के लिए बीज तैयार करेंगे। कम समय में तैयार होने वाली इस फसल से अन्य प्रजातियों से अधिक उत्पादन होने से किसानों को ज्यादा फायदा होगा।
गन्ने के बाद गेहूं व धान जिले में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली फसल है। जिले में करीब 55 हजार हेक्टेयर जमीन में धान बोया जाता है। इसमें से आधी से ज्यादा रकबे करीब 30 हजार बीघा जमीन में बासमती प्रजाति बोई जाती हैं। अफजलगढ़, बढ़ापुर, नगीना, रेहड़ आदि क्षेत्रों में किसान केवल बासमती धान ही बोते हैं। जिले का किसानों का बासमती धान खाड़ी देशों में भी जाता है। नगीना में बने कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वैज्ञानिकों ने धान की अर्ली प्रजाति तैयार की थी। इसका नाम नगीना वल्लभ बासमती-1 रखा गया। किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के उद्देश्य से नए-नए बीजों के आविष्कार के अंतर्गत ये बीज तैयार किया गया है। यह बीज बासमती की बाकी प्रजातियों के मुकाबले कम समय में तैयार होगा व उत्पादन भी अधिक देगा। इसके बीज का उत्पादन अभी बड़े स्तर पर नहीं हुआ है। बाजार में इसका बीज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र नगीना से यह बीज किसानों को दिलाया जाएगा। किसानों को बीज की करीब 300 किट वितरित की जाएंगी। एक किट में एक बीघा खेती के लिए बीज होगा। पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर किसानों को बीज दिया जाएगा।
यह है अंतर
बासमती की बाकी प्रजाति करीब 150 दिन तक में तैयार होती हैं। उनका उत्पादन दो से तीन क्विंटल प्रति बीघा तक होती है। नगीना वल्लभ बासमती-1 की फसल 100 से 110 दिन में ही तैयार हो जाएगी। इसका उत्पादन चार क्विंटल प्रति बीघा तक रहेगा।
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उन्नत बीजों से आमदनी
नगीना कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा.डीपी सिंह के अनुसार किसानों को बासमती की नई प्रजाति का बीज जल्दी वितरित किया जाएगा। किसान उन्नत प्रजाति के बीज बोकर अपनी आमदनी बढ़ाएं।
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बिजनौर। धान का उत्पादन बढ़ाने के लिए इस साल से नगीना वल्लभ बासमती-1 का बीज किसानों के बीच पहुंचेगा। किसानों को इस बासमती के बीज की किट बांटी जाएंगी। करीब 300 किसानों को किट दी जाएंगी। किसान अपने खेत में फसल पैदा करके अगले सालों के लिए बीज तैयार करेंगे। कम समय में तैयार होने वाली इस फसल से अन्य प्रजातियों से अधिक उत्पादन होने से किसानों को ज्यादा फायदा होगा।
गन्ने के बाद गेहूं व धान जिले में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली फसल है। जिले में करीब 55 हजार हेक्टेयर जमीन में धान बोया जाता है। इसमें से आधी से ज्यादा रकबे करीब 30 हजार बीघा जमीन में बासमती प्रजाति बोई जाती हैं। अफजलगढ़, बढ़ापुर, नगीना, रेहड़ आदि क्षेत्रों में किसान केवल बासमती धान ही बोते हैं। जिले का किसानों का बासमती धान खाड़ी देशों में भी जाता है। नगीना में बने कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वैज्ञानिकों ने धान की अर्ली प्रजाति तैयार की थी। इसका नाम नगीना वल्लभ बासमती-1 रखा गया। किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के उद्देश्य से नए-नए बीजों के आविष्कार के अंतर्गत ये बीज तैयार किया गया है। यह बीज बासमती की बाकी प्रजातियों के मुकाबले कम समय में तैयार होगा व उत्पादन भी अधिक देगा। इसके बीज का उत्पादन अभी बड़े स्तर पर नहीं हुआ है। बाजार में इसका बीज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र नगीना से यह बीज किसानों को दिलाया जाएगा। किसानों को बीज की करीब 300 किट वितरित की जाएंगी। एक किट में एक बीघा खेती के लिए बीज होगा। पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर किसानों को बीज दिया जाएगा।
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यह है अंतर
बासमती की बाकी प्रजाति करीब 150 दिन तक में तैयार होती हैं। उनका उत्पादन दो से तीन क्विंटल प्रति बीघा तक होती है। नगीना वल्लभ बासमती-1 की फसल 100 से 110 दिन में ही तैयार हो जाएगी। इसका उत्पादन चार क्विंटल प्रति बीघा तक रहेगा।
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उन्नत बीजों से आमदनी
नगीना कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा.डीपी सिंह के अनुसार किसानों को बासमती की नई प्रजाति का बीज जल्दी वितरित किया जाएगा। किसान उन्नत प्रजाति के बीज बोकर अपनी आमदनी बढ़ाएं।