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दिल्ली में डटे किसान, खिचड़ी का किया भंडारा
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गाजियाबाद में धरने पर डटा बिजनौर के ग्राम पुरैनी का आकाश।
- फोटो : BIJNOR
दिल्ली में डटे किसान, खिचड़ी का किया भंडारा
बिजनौर। दिल्ली के अंदर और सीमा पर डटे किसानों ने सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा पर खिचड़ी का भंडारा चलाया। किसानों ने खुद खिचड़ी बनाकर खाई। एक दो दिन में ही केंद्र सरकार और किसानों के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता होने की बात कही जा रही है। किसानों ने तीन दिसंबर को वार्ता न होने पर आरपार की जंग का एलान किया है।
दिल्ली के बुुराड़ी मैदान में तीन दिन से जमे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया किसान अब भी दिल्ली में आ रहे हैं। किसानों को दिल्ली के हर बार्डर पर रोका जा रहा है लेकिन इक्का दुक्का किसान किसी न किसी तरह पुलिस को चकमा देकर धरनास्थल पर आ रहे हैं। कहा पूरे देश के किसानों के लिए हक के लिए वे दिल्ली पहुंचे हैं। वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर पहली बार प्रसाद के रूप में घर में खिचड़ी बनती है। किसान कार्तिक पूर्णिमा पर घर से दूर थे लेकिन उन्होंने धरनास्थल पर खिचड़ी ही बनाकर खाई। भाकियू के नेतृत्व में गए किसानों को अब भी गाजियाबाद में यूपी गेट पर रोक रखा है। युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने बताया कि किसान अपनी मांगों को पूरा कराए बिना घर नहीं आएंगे। दिगंबर सिंह का कहना है कि इस समय गेहूं बुआई का सीजन चल रहा है। लेकिन केंद्र व प्रदेश सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण हजारों किसानों को खेत छोड़कर सड़क पर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
आंदोलन के लिए रद्द की पोती की मंगनी
गांव पुरैनी निवासी हरपाल सिंह की पोती की सोमवार को मंगनी होनी थी। इसकी सभी तैयारी पूरी हो चुकी थी। हरपाल सिंह ने पहले ही दिन आंदोलन के लिए पोते आकाश के साथ दिल्ली कूच कर लिया था। दिल्ली में आंदोलन के कारण हरपाल सिंह ने मंगनी में नहीं जाने का निर्णय लिया। हरपाल सिंह व आकाश के मंगनी में न आ पाने पर परिजनों ने मंगनी रद्द कर दी। दिगंबर सिंह के अनुसार जैसे फौजी देश की रक्षा के लिए घर के कार्यक्रम रद्द कर देते हैं ऐसी ही मिसाल हरपाल सिंह व आकाश ने पेश की है।
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बिजनौर। दिल्ली के अंदर और सीमा पर डटे किसानों ने सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा पर खिचड़ी का भंडारा चलाया। किसानों ने खुद खिचड़ी बनाकर खाई। एक दो दिन में ही केंद्र सरकार और किसानों के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता होने की बात कही जा रही है। किसानों ने तीन दिसंबर को वार्ता न होने पर आरपार की जंग का एलान किया है।
दिल्ली के बुुराड़ी मैदान में तीन दिन से जमे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया किसान अब भी दिल्ली में आ रहे हैं। किसानों को दिल्ली के हर बार्डर पर रोका जा रहा है लेकिन इक्का दुक्का किसान किसी न किसी तरह पुलिस को चकमा देकर धरनास्थल पर आ रहे हैं। कहा पूरे देश के किसानों के लिए हक के लिए वे दिल्ली पहुंचे हैं। वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर पहली बार प्रसाद के रूप में घर में खिचड़ी बनती है। किसान कार्तिक पूर्णिमा पर घर से दूर थे लेकिन उन्होंने धरनास्थल पर खिचड़ी ही बनाकर खाई। भाकियू के नेतृत्व में गए किसानों को अब भी गाजियाबाद में यूपी गेट पर रोक रखा है। युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने बताया कि किसान अपनी मांगों को पूरा कराए बिना घर नहीं आएंगे। दिगंबर सिंह का कहना है कि इस समय गेहूं बुआई का सीजन चल रहा है। लेकिन केंद्र व प्रदेश सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण हजारों किसानों को खेत छोड़कर सड़क पर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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आंदोलन के लिए रद्द की पोती की मंगनी
गांव पुरैनी निवासी हरपाल सिंह की पोती की सोमवार को मंगनी होनी थी। इसकी सभी तैयारी पूरी हो चुकी थी। हरपाल सिंह ने पहले ही दिन आंदोलन के लिए पोते आकाश के साथ दिल्ली कूच कर लिया था। दिल्ली में आंदोलन के कारण हरपाल सिंह ने मंगनी में नहीं जाने का निर्णय लिया। हरपाल सिंह व आकाश के मंगनी में न आ पाने पर परिजनों ने मंगनी रद्द कर दी। दिगंबर सिंह के अनुसार जैसे फौजी देश की रक्षा के लिए घर के कार्यक्रम रद्द कर देते हैं ऐसी ही मिसाल हरपाल सिंह व आकाश ने पेश की है।

कोतवाली देहात में भाकियू भानु की बैठक मे विचार विमर्श करते कार्यकर्ता।- फोटो : BIJNOR
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