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बारिश से किसानों के चेहरे खिलें
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बारिश से किसानों के चेहरे खिले
बिजनौर/अफजलगढ़। करीब 15 दिन के बाद अचानक बारिश होने से मौसम में बदलाव से लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान भी अब बारिश की आस लगा रहे हैं। खादर के किसानों को बारिश के बाद कालागढ़ डैम से पानी छोड़े जाने तथा खेतों के जलमग्न होने की चिंता दोबारा सताने लगी है।
बीते कई दिनों से उमस भरी गर्मी हो रही थी। बादल तो छाते रहे लेकिन बारिश नहीं हो रही थी। अब गन्ने व धान की फसल को फिर से सिंचाई करने की जरूरत है। शनिवार दोपहर बाद अचानक बारिश होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। बारिश से किसानों के चेहरे भी खिल गए हैं। उनका कहना है कि 15 दिन पहले भले ही कितनी बारिश हुई हो लेकिन अब फसलों को फिर से सिंचाई की जरूरत है। अगर बारिश नहीं हुई तो दो चार दिन में ही किसानों को नलकूप से फसलों की सिंचाई करनी होगी। वहीं अफजलगढ़ में बारिश होने से किसानों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है। किसान हरिराज सिंह, डालचंद, सुरेश सिंह, छोटे सिंह, रमेश सिंह तथा वीरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि कि बारिश होने से कालागढ़ डैम का जलस्तर बढ़ने तथा वहां से रामगंगा नदी में पानी छोड़ने की संभावना बढ़ गई है। डैम से पानी छोड़ने की स्थिति में नदी के सीमावर्ती इलाकों सहित खेतों के दोबारा जलमग्न होने की संभावना है। पांच दिन पहले डैम से पानी की निकासी कम किए जाने से खेतों में भरा पानी कम होने लगा था। लेकिन खेत तथा नदी के इलाकों में पानी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।
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बिजनौर/अफजलगढ़। करीब 15 दिन के बाद अचानक बारिश होने से मौसम में बदलाव से लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान भी अब बारिश की आस लगा रहे हैं। खादर के किसानों को बारिश के बाद कालागढ़ डैम से पानी छोड़े जाने तथा खेतों के जलमग्न होने की चिंता दोबारा सताने लगी है।
बीते कई दिनों से उमस भरी गर्मी हो रही थी। बादल तो छाते रहे लेकिन बारिश नहीं हो रही थी। अब गन्ने व धान की फसल को फिर से सिंचाई करने की जरूरत है। शनिवार दोपहर बाद अचानक बारिश होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। बारिश से किसानों के चेहरे भी खिल गए हैं। उनका कहना है कि 15 दिन पहले भले ही कितनी बारिश हुई हो लेकिन अब फसलों को फिर से सिंचाई की जरूरत है। अगर बारिश नहीं हुई तो दो चार दिन में ही किसानों को नलकूप से फसलों की सिंचाई करनी होगी। वहीं अफजलगढ़ में बारिश होने से किसानों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है। किसान हरिराज सिंह, डालचंद, सुरेश सिंह, छोटे सिंह, रमेश सिंह तथा वीरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि कि बारिश होने से कालागढ़ डैम का जलस्तर बढ़ने तथा वहां से रामगंगा नदी में पानी छोड़ने की संभावना बढ़ गई है। डैम से पानी छोड़ने की स्थिति में नदी के सीमावर्ती इलाकों सहित खेतों के दोबारा जलमग्न होने की संभावना है। पांच दिन पहले डैम से पानी की निकासी कम किए जाने से खेतों में भरा पानी कम होने लगा था। लेकिन खेत तथा नदी के इलाकों में पानी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।
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