फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Even after spending six crores, the situation did not go away

छह करोड़ खर्च करके भी दूर नहीं हुई बदहाली

Tue, 23 Jun 2020 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 11:21 PM IST
विज्ञापन
Even after spending six crores, the situation did not go away
छह करोड़ खर्च करके भी दूर नहीं हुई बदहाली
विज्ञापन

बिजनौर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे के तहत गंगा बैराज के सुंदरीकरण पर छह करोड़ रुपये तो खर्च कर दिए गए, मगर देखरेख के अभाव और अधिकारियों की लापरवाही से गंगा बैराज की बदहाली दूर नहीं हो पाई। शौचालय और चेंजिंग रूम गंदगी से अटे रहते हैं।
नमामि गंगे योजना के तहत बिजनौर जिले में बालावाली घाट - गंगा बैराज और विदुर कुटी का विकास होना था। विदुर कुटी और बालावाली में यह कार्य परवान नहीं चढ़ सका। 2017 -2018 में गंगा बैराज के सुंदरीकरण पर लगभग छह करोड़ रुपये व्यय हुआ। बिजनौर गंगा बैराज का सुुंदरीकरण हुआ। घाट विकसित किए गए। घाट पर शौचालय, मूत्रालय बनाए गए। प्रवेश द्वार बनाया गया। घाट को जगमगाने के लिए लाइट लगीं। बावजूद इसकी देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं हुई। लॉकडाउन के कारण पब्लिक नहीं आ रही, तब घाट पर कूड़े के ढेर है। लोगों के आने पर हालत और ज्यादा खराब होगी।
विज्ञापन

यदि कोई बड़ा कार्यक्रम होता है तो प्रशासन पालिका और ग्राम सभा के सफाई कर्मी तथा समाजसेवी लगाकर सफाई करा दी जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जनवरी में गंगा यात्रा का कार्यक्रम था। तब साफ सफाई हुई। गंगा घाट एरिया, शीशमहल को अच्छी तरह चमकाया गया। अब जगह -जगह घास उग आई है। शौचालय और चेंजिंग रूम की हालत खराब है। गंदगी से अटे हैं। पानी के लिए लगी टोंटी चोरी हो गईं। हालात यह है कि बैराज घाट की की देखरेख की जिम्मेदारी किसा विभाग की है, ये किसी को पता नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- सफाई कर्मी भगा दिया
बैराज के आसपास रहने वाले लोग बताते हैं कि यहां शौचालय की देखरेख के लिए निर्माण इकाई ने एक कर्मचारी रखा था। वह शौचालय जाने वालों से प्रति व्यक्ति पांच रुपया लेता था। किंतु लोगों ने उसे पांच रुपये मंगाने पर धमकाया और मारपीट भी की, जिस कारण कर्मचारी ने आना बंद कर दिया। इसके अलावा पति की मृत्यु के बाद विधवा को मायके वाले स्नान के लिए यहां लाते हैं और पुराने कपड़े यहीं छोड़कर चले जाते हैं, उससे भी गंदगी बढ़ रही है।
कोट -
- बिजनौर निवासी सौरभ सिंघल बताते हैं कि बैराज घाट पर होने वाली गंगा आरती लंबे समय से वे कराते हैं। इसके लिए किसी से आर्थिक मदद नहीं ली। घाट की साफ सफाई के लिए पंचायत राज विभाग से सफाई कर्मी आता है। प्रशासन स्तर से कोई मदद नहीं मिलती।
- डीपीआरओ सतीश कुमार का कहना है कि गंगा बैराज पर साफ सफाई के लिए स्थायी रूप से एक सफाई कर्मी तैनात है। सफाई कार्यों के लिए अलग से कोई फंड नहीं है। शासन से गंगा अभियान से जुड़े विशेष कार्यक्रमों के लिए यदि पैसा आता है तो नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अधिकारियों के पास ही उसका विवरण हो सकता है।

- भाजपा के जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि कहते हैं कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के एक अधिकारी बाहर से आते है। अब काफी दिन से नहीं आए।
- नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दुर्गेश्वर त्रिपाठी का कहना है कि गंगा बैराज नगर पालिका की सीमा से भी बाहर है। कोई सफाई अभियान आदि चले, तो पालिका स्टाफ लगा सकते हैं।
लोगों की मांग
- गंगा बैराज घाट की देखरेख के लिए समर्पित लोगों की समिति बननी चाहिए।
- सरकारी स्तर पर देखरेख के लिए फंड की व्यवस्था होनी चाहिए।
- बैराज पुलिस चेकपोस्ट के अधीन देखरेख के लिए नियमित रूप से यहां होमगार्ड तैनात हों।
- गंगा घाट से समाजसेवी संगठन जोड़े जाएं, ताकि साफ-सफाई आदि कार्यक्रम चलाते रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed