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बहाल नहीं हो सकी 12 साल पहले बंद हुई झालू के लिए बस सेवा

Wed, 14 Sep 2022 12:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Sep 2022 12:36 AM IST
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Erased mark of Jhalu bus stand, name remains
झालू बस स्टैंड का मिट गया निशान, नाम रह गया बाकी
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झालू। यूं तो अंग्रेजी शासन कभी झालू को जिला मुख्यालय बनाना चाहता था लेकिन इस कस्बे की बदनसीबी ने साथ नहीं छोड़ा। दशकों पहले झालू का रेलवे स्टेशन बंद करते हुए हाल्ट बना दिया गया। अब हालात ये हैं कि रोडवेज बस सेवा भी बंद है। 12 साल पहले बंद हुई रोडवेज बस आज तक बहाल नहीं हो सकी। साल 1984 में पहली बार रोडवेज झालू पहुंची थी जो1988 में बंद हो गई। बाद में साल 2007 में रोडवेज बस झालू आई लेकिन साल 2010 में बंद कर दिया गया।
कस्बा झालू और आसपास के क्षेत्र को आवागमन साधन नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोडवेज व प्राइवेट बसों का संचालन बंद होने के कारण यात्री परेशान हो रहे हैं। लोगों को ई-रिक्शा या निजी वाहन के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है।
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पहले बिजनौर से चांदपुर आने जाने के लिए प्राइवेट बस वाया झालू होकर गुजरती थी। लेकिन काफी लंबे समय से प्राइवेट बस बंद पड़ी है। सन 1984 के आसपास झालू में नगर सुधार समिति ने अपने अथक प्रयासों से झालू से तीन रोडवेज बसों का संचालन शुरू करवाया था जो चार वर्ष तक चला। झालू से दोबारा सन 2007 में झालू से वाया बिजनौर, मेरठ होते हुए दिल्ली के लिए एक रोडवेज बस चली थी। तीन साल के अंदर 2010 में रोडवेज बस का संचालन बंद हो गया।
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राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि झालू से बिजनौर मुख्यालय पर जिला अस्पताल, निजी चिकित्सक, रोजगार, व्यवसाय, पढ़ाई आदि कार्यों के लिए जाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वह प्रशासन से शीघ्र ही नियमित रूप से रोडवेज बस चलाईं जाएं।
अंकुर चौधरी का कहना है कि वर्तमान समय में झालू से दिन में तथा शाम के बाद अगर कहीं बाहर जाना या आना एक बड़ी समस्या बन जाता है। समय पर कोई साधन नहीं मिलता।
शिक्षिका रुकैया परवीन का कहना है कि वह नहटौर एक निजी स्कूल में पढ़ाने के लिए जाती हैं। आने व जाने में बसों की नियमित सुविधा न होने से परेशान होना पड़ता है। कभी-कभी वह समय पर नहीं पहुंच पातीं।

किसान सत्यवीर सिंह का कहना है कि कृषि संबंधित कार्यों के लिए झालू से हल्दौर व बिजनौर जाने के लिए एक समस्या बन जाता है, जिससे समय पर पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। कृषि उपकरण लाने के लिए साधन भी उपलब्ध नहीं है।
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