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नूरपुर पालिका के ईओ को पद से हटाया
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नूरपुर पालिका के ईओ को पद से हटाया
नूरपुर। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी पर नौ लाख से अधिक गबन का मामला साबित होने पर जिलाधिकारी ने उन्हें उनके मूल विभाग में भेजे जाने की संस्तुति की है। जिसके बाद उन्हें पालिका से हटा दिया गया है। सही से जांच हो तो अभी और भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी अजीत सिंह का 10 माह का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। उन पर विकास कार्यों में कमीशनखोरी व सभासदों से अभद्रता के आरोप लगे। व्यापारियों से विवाद होने पर कई बार उनका घेराव भी हुआ। अधिशासी अधिकारी अजीत सिंह ने पिछले वर्ष अक्तूबर में नूरपुर नगरपालिका का कार्यभार संभाला था। व्यापारियों द्वारा रामलीला मैदान में बने लघुशंकालय की सफाई को कहने पर उन्होंने एक व्यापारी के साथ अभद्रता कर दी थी, जिसके बाद व्यापारियों ने उनका घेराव कर जमकर नारेबाजी की थी। बाद में अधिशासी अधिकारी ने माफी मांगकर अपना पीछा छुड़ाया था। उन पर विकास कार्यों में कमीशनखोरी के भी आरोप लगे। इसको लेकर पालिका के सभासदों ने पालिका की बोर्ड की बैठक में जमकर हंगामा किया था और अधिशासी के विरुद्ध कार्रवाई करने का प्रस्ताव पारित कर इसे कार्रवाई में शामिल किए जाने की मांग की थी। सभासद राजेंद्र चौधरी, राजीव जोशी आदि का कहना है कि अधिशासी अधिकारी पर नौ लाख से अधिक गबन का मामला साबित होने पर जिलाधिकारी ने उन्हें उनके मूल विभाग में भेजे जाने की संस्तुति की है, जिसके बाद उन्हें पालिका से हटा दिया गया है। सही से जांच हो तो अभी और भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
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नूरपुर। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी पर नौ लाख से अधिक गबन का मामला साबित होने पर जिलाधिकारी ने उन्हें उनके मूल विभाग में भेजे जाने की संस्तुति की है। जिसके बाद उन्हें पालिका से हटा दिया गया है। सही से जांच हो तो अभी और भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी अजीत सिंह का 10 माह का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। उन पर विकास कार्यों में कमीशनखोरी व सभासदों से अभद्रता के आरोप लगे। व्यापारियों से विवाद होने पर कई बार उनका घेराव भी हुआ। अधिशासी अधिकारी अजीत सिंह ने पिछले वर्ष अक्तूबर में नूरपुर नगरपालिका का कार्यभार संभाला था। व्यापारियों द्वारा रामलीला मैदान में बने लघुशंकालय की सफाई को कहने पर उन्होंने एक व्यापारी के साथ अभद्रता कर दी थी, जिसके बाद व्यापारियों ने उनका घेराव कर जमकर नारेबाजी की थी। बाद में अधिशासी अधिकारी ने माफी मांगकर अपना पीछा छुड़ाया था। उन पर विकास कार्यों में कमीशनखोरी के भी आरोप लगे। इसको लेकर पालिका के सभासदों ने पालिका की बोर्ड की बैठक में जमकर हंगामा किया था और अधिशासी के विरुद्ध कार्रवाई करने का प्रस्ताव पारित कर इसे कार्रवाई में शामिल किए जाने की मांग की थी। सभासद राजेंद्र चौधरी, राजीव जोशी आदि का कहना है कि अधिशासी अधिकारी पर नौ लाख से अधिक गबन का मामला साबित होने पर जिलाधिकारी ने उन्हें उनके मूल विभाग में भेजे जाने की संस्तुति की है, जिसके बाद उन्हें पालिका से हटा दिया गया है। सही से जांच हो तो अभी और भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
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