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नींदडू- दहेज न लें, निकाह को आसान बनाएं : मुजम्मिल
Fri, 28 Apr 2023 11:32 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 28 Apr 2023 11:32 PM IST
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- जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद मुजम्मिल हुसैन कासमी ने लोगों को किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
नींदडू। जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद मुजम्मिल हुसैन कासमी ने लोगों से दहेज का मोह छोड़कर निकाह को आसान बनाने पर जोर दिया। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद जुल्फुकार अहमद और गुलरेज फातिमा का सादगी के साथ निकाह हुआ।
निकाह पढ़ाने के बाद मुफ्ती मुजम्मिल हुसैन कासमी ने नवदंपती के सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए सामूहिक दुआ कराई। उन्होंने मुसलमानों को फजूल खर्च से बचने के साथ बिना दहेज के निकाह को आम करने तथा निकाह की रस्म मस्जिद में अदा करने पर बल दिया। मस्जिद में निकाह होने की खुले मन से सराहना की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों विशेष रूप से लड़कियों को आधुनिक शिक्षा के साथ दीन की तालीम अवश्य दिलाएं, ताकि उनमें दीन की समझ आ जाए और वे दहेज की मांग करने वाले परिवारों का तिरस्कार कर सादे निकाह को अहमियत देने वाले खानदान को वरियता दें।
उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए उचित शिक्षा की व्यवस्था के साथ उन्हें योग्य, गुणवान और परोपकारी बनाने की जिम्मेदारी मां-बाप की है। उन्होंने इस्लाम के पहले खलीफा हजरत अबुबक्र सिद्दीक रजी. का हवाला देते हुए लोगों से इस्लामी उसूल पर सख्ती से जमे रहने को दोनों जहान की कामयाबी बताया। इस अवसर पर कारी तलअत महमूद, हाजी अनीस, हाजी यासीन, रहमत मकसूद, अरशद अली, गजनफर अली आदि मौजूद रहे।
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नींदडू। जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद मुजम्मिल हुसैन कासमी ने लोगों से दहेज का मोह छोड़कर निकाह को आसान बनाने पर जोर दिया। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद जुल्फुकार अहमद और गुलरेज फातिमा का सादगी के साथ निकाह हुआ।
निकाह पढ़ाने के बाद मुफ्ती मुजम्मिल हुसैन कासमी ने नवदंपती के सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए सामूहिक दुआ कराई। उन्होंने मुसलमानों को फजूल खर्च से बचने के साथ बिना दहेज के निकाह को आम करने तथा निकाह की रस्म मस्जिद में अदा करने पर बल दिया। मस्जिद में निकाह होने की खुले मन से सराहना की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों विशेष रूप से लड़कियों को आधुनिक शिक्षा के साथ दीन की तालीम अवश्य दिलाएं, ताकि उनमें दीन की समझ आ जाए और वे दहेज की मांग करने वाले परिवारों का तिरस्कार कर सादे निकाह को अहमियत देने वाले खानदान को वरियता दें।
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उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए उचित शिक्षा की व्यवस्था के साथ उन्हें योग्य, गुणवान और परोपकारी बनाने की जिम्मेदारी मां-बाप की है। उन्होंने इस्लाम के पहले खलीफा हजरत अबुबक्र सिद्दीक रजी. का हवाला देते हुए लोगों से इस्लामी उसूल पर सख्ती से जमे रहने को दोनों जहान की कामयाबी बताया। इस अवसर पर कारी तलअत महमूद, हाजी अनीस, हाजी यासीन, रहमत मकसूद, अरशद अली, गजनफर अली आदि मौजूद रहे।
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