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बेपटरी हुई मिड डे मील व्यवस्था
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बेपटरी हुई मिड डे मील व्यवस्था
बिजनौर। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड डे मील व्यवस्था चरमरा गई है। स्कूलों की रसोइयों को पांच महीने से मानदेय नहीं मिला हैै। कई रसोइया मानदेय का भुगतान नहीं होने से काम छोड़ कर चली गई हैं। स्कूलों में शिक्षकों को खाना बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने भी रसोइयों के मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है।
ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड डे मील बनवाने की जिम्मेदारी रसोइयों के पास होती है। जबकि नगर क्षेत्र के स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था स्वयं सेवी संस्थाओं के हवाले है। अब शासन की ओर से स्कूलों की रसोइयों को 1500 रुपये प्रति महीने के हिसाब से मानदेय का भुगतान किया जाता है। लेकिन स्कूलों के शिक्षकों की मानें तो अप्रैल के महीने से स्कूलों की रसोइयों के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। आए दिन स्कूलों में रसोइया शिक्षकों से मानदेय भुगतान के बारे में पूछती रहती हैं। मानदेय का भुगतान नहीं होने से स्कूलों की कई रसोइया काम छोड़ कर भी चली गई है। ऐसे में स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। स्कूलों में शिक्षकों को खाना बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शासन की ओर से स्कूलों में रसोइयो की नई भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। जबकि एक सितंबर से जिले के सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में छात्र-छात्राएं शिक्षण कार्य के लिए आ रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जिन स्कूलों की रसोइया काम छोड कर चली गई हैं उन स्कूलों में रसोइया की भर्ती की जानी चाहिए। ताकि मिड डे मील बनवाने में परेशानी का सामना न करना पडे़। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद सिंह व जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राहुल राठी ने बताया कि रसोइयो के मानदेय का भुगतान भी शीघ्र किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि संगठन ने शासन से रसोइयो का मानदेय प्रति महीने दस हजार रुपये करने की मांग की है।
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स्कूलों में बढ़ा नामांकन
ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का नामांकन भी लगातार बढ़ रहा है। स्कूलों में हो रहे छात्रों के प्रवेश तो लगातार हो रहे है पर रसोइया भर्ती नहीं होने से भी शिक्षक परेशान है। ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों से बड़ी संख्या में बच्चों के प्रवेश परिषदीय स्कूलों में हो रहे है। शिक्षकों ने मिड डे मील व्यवस्था में शीघ्र ही सुधार करने की मांग की है।
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बिजनौर। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड डे मील व्यवस्था चरमरा गई है। स्कूलों की रसोइयों को पांच महीने से मानदेय नहीं मिला हैै। कई रसोइया मानदेय का भुगतान नहीं होने से काम छोड़ कर चली गई हैं। स्कूलों में शिक्षकों को खाना बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने भी रसोइयों के मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है।
ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड डे मील बनवाने की जिम्मेदारी रसोइयों के पास होती है। जबकि नगर क्षेत्र के स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था स्वयं सेवी संस्थाओं के हवाले है। अब शासन की ओर से स्कूलों की रसोइयों को 1500 रुपये प्रति महीने के हिसाब से मानदेय का भुगतान किया जाता है। लेकिन स्कूलों के शिक्षकों की मानें तो अप्रैल के महीने से स्कूलों की रसोइयों के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। आए दिन स्कूलों में रसोइया शिक्षकों से मानदेय भुगतान के बारे में पूछती रहती हैं। मानदेय का भुगतान नहीं होने से स्कूलों की कई रसोइया काम छोड़ कर भी चली गई है। ऐसे में स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। स्कूलों में शिक्षकों को खाना बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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शासन की ओर से स्कूलों में रसोइयो की नई भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। जबकि एक सितंबर से जिले के सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में छात्र-छात्राएं शिक्षण कार्य के लिए आ रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जिन स्कूलों की रसोइया काम छोड कर चली गई हैं उन स्कूलों में रसोइया की भर्ती की जानी चाहिए। ताकि मिड डे मील बनवाने में परेशानी का सामना न करना पडे़। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद सिंह व जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राहुल राठी ने बताया कि रसोइयो के मानदेय का भुगतान भी शीघ्र किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि संगठन ने शासन से रसोइयो का मानदेय प्रति महीने दस हजार रुपये करने की मांग की है।
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स्कूलों में बढ़ा नामांकन
ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का नामांकन भी लगातार बढ़ रहा है। स्कूलों में हो रहे छात्रों के प्रवेश तो लगातार हो रहे है पर रसोइया भर्ती नहीं होने से भी शिक्षक परेशान है। ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों से बड़ी संख्या में बच्चों के प्रवेश परिषदीय स्कूलों में हो रहे है। शिक्षकों ने मिड डे मील व्यवस्था में शीघ्र ही सुधार करने की मांग की है।