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Bijnor News: नियम-नियम खेलते रहे विभाग, गांव तक पहुंच गई कोटावाली नदी की बाढ़

Sat, 13 Jul 2024 03:04 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jul 2024 03:04 AM IST
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Department kept playing the rules and regulations, flood of Kotwali river reached the village
भागूवाला-  रामपुर चाठा की गोशाला क्षेत्र में  कोटावाली नदी द्वारा किया गया कटान।
- प्रशासन और वन विभाग नहीं जागा तो रामपुर चाठा में मच सकता हाहाकार
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- रामपुर चाठा वासियों की सांसें अटकीं, मंडरा रहा कोटावाली नदी के रौद्र रूप का खतरा
- गोशाला तक पहुंच बनाने वाली नदी गांव की ओर तेजी से कर रही कटान

संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद/बिजनौर। आरक्षित वन क्षेत्र के गांव रामपुर चाठा पर कोटावाली नदी का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन और वन विभाग के बीच तटबंध बनाने का विवाद नहीं सुलझा तो कोटावाली नदी का रौद्र रूप गांव और ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। नदी के उफान ने हाल ही में क्षेत्र की गोशाला को भारी नुकसान पहुंचाया था।
रामपुर चाठा के लिए सिंचाई खंड अफजलगढ़ ने 180 लाख रुपये का तटबंध निर्माण प्रस्ताव पास किया। तटबंध बनाने के प्रस्ताव पास होने सिंचाई खंड के एक्सईएन अवधेश शर्मा और एसडीओ पवन कुमार से जानकारी मिलते ही वन विभाग ने निर्माण कार्य पर अडंगा लगा दिया।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डीएफओ ने अनुमति बिना आरक्षित वन क्षेत्र में कार्य शुरू करने से स्पष्ट इंकार कर दिया। जिससे सिंचाई खंड को कार्य रोकना पड़ा। अब बारिश हुई तो नदी में पानी आया और वह कटान करती हुई गांव के पास तक पहुंच गई। ऐसे में अब गांव के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है।
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सिंचाई खंड ने तटबंध बनाने के लिए विभाग से पूर्व में अनुमति नहीं ली। विभागीय उच्चाधिकारियों से अनुमति मिलती है। आपदा प्रबंधन समिति ही विशेष परिस्थितियों में कोई निर्णय ले सकती है।



- वंदना, डीएफओ, बिजनौर वन प्रभाग नजीबाबाद।







गोशाला के पशुओं को कराया पलायन



नजीबाबाद। पहाड़ों पर हाल ही में हुई वर्षा से नदी में भारी उफान आया। रामपुर चाठा क्षेत्र की सीताराम गोशाला संचालकों ने खतरे को भांपते हुए दो दिन पूर्व ही पशुशाला के गोवंशों को सुरक्षित उत्तराखंड के सिद्धस्रोत भेज दिया। नदी का उफान गोशाला तक पहुंचा, जिससे गोशाला का एक भाग नदी में समा गया। नदी से गोशाला के अस्तित्व पर खतरा बना है।







ग्राम प्रधान और ग्रामीण बोले



ग्राम प्रधान सोमदत्त का कहना है कि गांव रामपुर चाठा और कृषि भूमि को नदी से होने वाले खतरे से लगातार प्रशासन को बताया जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से गांव और कृषि भूमि को बचाने के लिए प्रबंध नहीं किए गए। ग्रामीणों सुभाष सिंह, नागर, अशोक कुमार, योगेश बताते हैं कि रामपुर चाठा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव को जोड़ने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही बिजली की सुविधा, ऐसे में ग्रामीण जैसे तैसे अपना जीवन जी रहे हैं। लेकिन, अब कोटावाली नदी से गांव पर खतरा मंडरा रहा है। नदी से गांव की दूरी लगातार घट रही है।




प्रशासन, वन विभाग और सिंचाई खंड की संयुक्त टीम ने क्षेत्र का बृहस्पतिवार को कटान क्षेत्र का मौका मुआयना किया था। वन विभाग से संबंधित समस्याएं हैं। निस्तारण के प्रयास जारी है। - कुंवर बहादुर सिंह, एसडीएम।
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