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Deoband: दारुल उलूम का बड़ा फैसला, अरबी की छोटी कक्षाओं में बाहरी छात्रों की एंट्री बंद

Wed, 31 Dec 2025 06:11 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: डिंपल सिरोही Updated Wed, 31 Dec 2025 06:11 PM IST
सार

दारुल उलूम देवबंद ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब अरबी कक्षा एक से तीन तक बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं मिलेगा, जबकि स्थानीय छात्रों को छूट दी गई है।

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Deoband: Darul Uloom Deoband Bars Outside Students from Junior Arabic Classes
देवबंद का दारुल उलूम

विस्तार

देवबंद स्थित  इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम ने नए साल की शुरुआत में शिक्षा व्यवस्था को लेकर अहम फैसला लिया है। संस्था की एकेडमिक काउंसिल (अकादमिक परिषद) की बैठक के बाद तय किया गया है कि अब अरबी कक्षा एक से अरबी कक्षा तीन तक बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। हालांकि स्थानीय छात्रों के लिए इस नियम में छूट रखी गई है।

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छोटी कक्षाओं में बाहरी प्रवेश पर रोक
दारुल उलूम के शिक्षा प्रभारी मौलाना हुसैन हरिद्वारी ने बताया कि अरबी की शुरुआती कक्षाओं में बाहर से आने वाले छात्रों को अब प्रवेश नहीं मिलेगा। ऐसे छात्रों को अपनी प्रारंभिक तालीम अपने स्थानीय या पुराने मदरसों में ही पूरी करनी होगी। इसके बाद वे दारुल उलूम में आगे की कक्षाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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व्यवस्था सुधारने के लिए लिया गया फैसला
मौलाना हुसैन हरिद्वारी ने कहा कि पिछले कई वर्षों से मदरसों को यह सलाह दी जा रही थी कि वे अरबी की शुरुआती कक्षाओं में छात्रों को बेहतर तालीम दें और इसके बाद ही उन्हें दारुल उलूम भेजें। लेकिन इस पर गंभीरता से अमल नहीं हो पा रहा था।

दारुल उलूम में प्रवेश की संभावना को देखते हुए बड़ी संख्या में छोटे छात्र यहां आ जाते हैं, जिनका काफी समय लग जाता है। प्रवेश न मिलने पर वे वापस अपने पुराने मदरसों में भी नहीं लौट पाते, जिससे उनका शैक्षणिक नुकसान होता है।

स्थानीय छात्रों को दी गई छूट
नई व्यवस्था के तहत देवबंद के स्थानीय छात्रों, दारुल उलूम के उस्तादों और कर्मचारियों के बच्चों को अरबी की छोटी कक्षाओं में प्रवेश की छूट दी गई है। प्रबंधन का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत और व्यवस्थित होगी।

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