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डिलीवरी के नाम पर लिए जाते हैं 3000 रुपये

Thu, 21 Dec 2017 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Thu, 21 Dec 2017 11:57 PM IST
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Delivery is taken at the name of 3000 rupees
अस्पताल में तीमारदारों का बयान लेते एडीएम व एसडीएम। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में एडीएम प्रशासन व एसडीएम ने जिला महिला अस्पताल पहुंचकर पांच नवजात की हुई मौत के मामले की जांच की। पड़ताल करने पर अस्पताल स्टाफ द्वारा रुपये लेने की पोल खुल गई। तीमारदारों ने बताया कि उन्होंने डिलीवरी होने पर दो से तीन हजार रुपये तक दिए हैं। 
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जिला महिला अस्पताल में पांच बच्चों की हुई मौत के मामले में तीसरे दिन जाकर एडीएम प्रशासन मदन सिंह गर्ब्याल व एसडीएम सत्येंद्र कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को सुबह 11 बजे पहुंचकर मामले की जांच की। प्रशासनिक अधिकारियों के अस्पताल पहुंचते ही स्टाफ में खलबली मच गई। दोनों अधिकारियों ने सबसे पहले वार्ड में जाकर मरीजों व तीमारदारों से पूछताछ की। वहां दो महिलाओं ने बताया कि उनके परिजनों से प्रसव के बाद एक-एक हजार रुपये लिए गए थे। तीमारदारों की माने तो  जिला महिला अस्पताल में प्रत्येक डिलीवरी पर उनसे दो से तीन हजार रुपये लिए जाते हैं। एडीएम मदन सिंह गर्ब्याल ने दूसरे कमरे में ले जाकर सीएमएस आभा वर्मा के बयान दर्ज किए।
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उसके बाद एडीएम व एसडीएम सीएमएस के कक्ष में कई तीमारदारों के बयान लिए। 
चांदपुर के लखपत नगर निवासी रविंद्र सिंह ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर उसकी पत्नी अनमोल कौर सोमवार को भर्ती हुई थी। प्रसव के बाद अनमोल कौर ने एक लड़के का जन्म दिया। रविंद्र ने बताया कि लड़के के जन्म के बाद उनसे स्टाफ ने तीन हजार रुपये की डिमांड की। हालांकि उन्होंने 1500 रुपये दे भी दिए हैं। गांव जलालपुर हसना निवासी मान सिंह ने बताया की उनकी पौत्रवधु अंशुल देवी सोमवार की सुबह भर्ती हुई। दोपहर करीब एक बजे लड़के को जन्म दिया। शाम को चिकित्सकों ने कहा कि वह नवजात को किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाकर बाल रोग विशेषज्ञ को दिखा लें। वह आनन-फानन में नवजात को जजी के निकट एक प्राइवेट अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उनके बच्चे को मृत घोषित कर दिया। 
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हल्दौर के गांव जनेलाउद्दीन निवासी नूतन ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी संजू देवी को प्रसव के लिए सोमवार को भर्ती कराया था। उनकी पत्नी ने लड़की को जन्म दिया। जन्म देने के एक घंटे तक चिकित्सकों ने उन्हें बच्ची को चेहरा तक नहीं दिखाया। इसके बाद उनके मांगने पर बच्ची को दिया गया। बच्ची को देकर चिकित्सकों ने कहा कि इसकी हालत खराब है उसको कही बाहर दिखा लो। वह लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचे। जहां बच्ची करीब दो से तीन घंटे भर्ती रही। उसके बाद उन्होंने कहा कि वह अपनी बच्ची   को ले जाएं उनकी हालत में सुधार नहीं हो रहा है। जब उन्हें बच्ची मिली तो उसकी मौत हो चुकी थी। वह उसके शव को लेकर घर चले गए। 

कोतवाली शहर के गांव गंगदासपुर निवासी मुकेश ने बताया कि उसकी भाभी सुनीता के सोमवार को आशा के माध्यम से जिला महिला अस्पताल भर्ती कराया। आशा उनके उनसे भर्ती कराने के दो हजार रुपये लिए। सोमवार को उसकी भाभी ने लड़के को जन्म दिया। इसके बाद आशा ने ढाई हजार रुपये की और डिमांड की, तो उन्होंने दो हजार रुपये और दिए।
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