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उबल रही बिजनौर की धरती, 58 साल में सात डिग्री बढ़ा तापमान

Tue, 12 Apr 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Apr 2022 12:15 AM IST
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Decreasing forest, boiling earth, temperature increased by seven degrees
घट रहे जंगल, उबल रही धरती, सात डिग्री बढ़ा तापमान
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। हिमालय की तलहटी कहे जाने वाले बिजनौर का पारा अब बढ़ने लगा है। घटते जंगलों के कारण जिले की धरती भी उबल रही है। इसका अंदाजा आंकड़ों को देख लगाया जा सकता है कि वातावरण में कितना अंतर आ गया है। 58 साल पहले 1964 में और इस साल मार्च के तापमान में करीब सात डिग्री का अंतर आ गया है। वहीं अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही तापमान करीब 39 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं घटते जंगलों के आंकड़े पर नजर डालें तो पिछले दो सालों में ही जिले का पांच प्रतिशत वनक्षेत्र घट चुका है।
जिले का रकबा 4634 स्क्वायर किलोमीटर है। इसमें से करीब 403 स्क्वायर किलोमीटर एरिया में वन संपदा है। करीब 51 लाख बीघा से भी अधिक जमीन खेती की जाती हैं। जिले के करीब से बह रहीं आधा दर्जन नदियां और वन क्षेत्र गर्मी के दिनों में तापमान को कम रखने में मदद करते हैं। लेकिन अब हालात बदलने लगे हैं। साल 2021 की फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया की रिपोर्ट देखें तो पिछले दो सालों में जिले में करीब पांच प्रतिशत वन क्षेत्र कम हो चुका है। घटते जंगलों के का असर तापमान पर भी साफ नजर आ रहा है। जिले के गजेटियर में वर्ष 1964 में मार्च माह का अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री दर्ज है, वहीं इस साल मार्च माह का अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री तक चला गया। वहीं वर्ष 1964 में अप्रैल माह का अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री दर्ज है, वहीं इस साल अप्रैल माह के पहले पखवाड़े में ही अधिकतम तापमान 38.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। अप्रैल के अंत तक यह आंकड़ा 40 को पार कर सकता है। (संवाद )
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चौंकाने वाली है एफएसआई की रिपोर्ट
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की 2021 रिपोर्ट के अनुसार जिले में 37.99 वर्ग किलोमीटर सघन वन क्षेत्र और 216.63 वर्ग किलोमीटर में मध्यम सघन वन क्षेत्र व 144.28 वर्ग किलोमीटर में खुला वन क्षेत्र है। कुल 398.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन रकबा है। जिले के कुल क्षेत्रफल में 8.75 प्रतिशत रकबे में वन क्षेत्र है। वहीं साल 2019 में हुए सर्वे में जंगल का क्षेत्रफल अधिक था। उस समय 417.9 वर्ग किलोमीटर में वन क्षेत्र था। तब से अब तक में करीब पांच प्रतिशत का अंतर आ चुका है।
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लगातार पौधरोपण कार्यक्रम चल रहा है। ताकि जंगलक्षेत्र बढ़ सके। इस साल भी 65 लाख से ज्यादा पौधे लगाने का लक्ष्य है। जंगल कम होगा तो तापमान पर भी इसका असर पड़ेगा, इसलिए लोगों से भी अपील की जा रही है कि वह अधिक से अधिक पौधे लगाएं।
- डॉ.अनिल पटेल, डीएफओ बिजनौर
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58 सालों में बदल गया जिले का वातावरण
साल न्यूनतम पारा अधिकतम पारा
मार्च 2022 9 डिग्री 36.5 डिग्री
अप्रैल 2022 17 डिग्री 38.8 डिग्री
मार्च 1964 13.4 डिग्री 29.6 डिग्री
अप्रैल 1964 18.2 डिग्री 35.8 डिग्री
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