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घबराहट त्यागकर लक्ष्य हासिल करें बेटियां

Sat, 01 Feb 2020 12:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2020 12:42 AM IST
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Daughters get rid of panic and get goals
अफजलगढ़ राखी मेमोरियल विद्या निकेतन में शपथ लेती छात्राएं। - फोटो : DHAMPUR
घबराहट त्यागकर लक्ष्य हासिल करें बेटियां
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अफजलगढ़(बिजनौर)। बेटियों को लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने की जरूरत है। मेहनत से पढ़ाई करें। स्कूल कॉलेज आते जाते असामाजिक तत्वों की किसी हरकत से घबराए नहीं, बल्कि डटकर मुकाबला करें और पुलिस की मदद लें।

अमर उजाला फाउंडेशन की मुहिम अपराजिता के तहत शुक्रवार को गांव आसफाबाद चमन स्थित राखी मेमोरियल विद्या निकेतन गर्ल्स इंटर कॉलेज में पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गया। कोतवाल आशुतोष कुमार सिंह ने छात्राओं कानून की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छात्राओं को किसी भी खतरे से डरने की आवश्यकता नहीं है। उनकी सुरक्षा के लिए शासन ने हेल्पलाइन चला रखी हैं। कालेज आते जाते रास्ते में कोई छेड़छाड़ करता है तो वह तुरंत पुलिस सहायता ले सकती है। किसी तरह की घटना होने पर भय के कारण छिपाए नहीं, बल्कि परिजनों, शिक्षकों व पुलिस को बताएं। ऐसा करने से असामाजिक तत्वों पर रोक लगेगी। चुप रहने से घटना कभी भी बड़ा रूप ले सकती हैं। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा। हेल्पलाइन 1090, 112 की जानकारी दी। इन नंबरों पर तत्काल पुलिस हर समय तैयार मिलेगी। उन्होंने कहा कि छात्राएं मन लगाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करें और चिकित्सक, इंजीनियर, जज, वकील तथा पुलिस, सेना में भर्ती होकर नाम रोशन करें।
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शिक्षिकाएं
- शिक्षिका मनु चौहान का कहना है कि बेटियों को आगे बढ़ाने में ऐसे अभियान कारगर साबित होते हैं। बच्चों को कानून की जानकारी होती है।
- शिक्षिका अदिति का कहना है कि बेटों की तरह ही बेटियों को समान रूप से पढ़ाने के लिए अभिभावकों का गंभीर होना जरूरी है।
- शालू चौहान का कहना है कि बेटियों को शिक्षित बनाने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। तभी बेटियां खुद को समाज में स्थापित कर नाम रोशन कर सकती हैं।
- रूचि चौहान का कहना है कि बेटी मां बाप के दुख सुख में हमेशा साथ निभाती है। जबकि बेटे स्वार्थ के वशीभूत होकर अकेला छोड़ देते है।
- प्रियंका का कहना है कि हमें बेटी को बोझ नहीं समझना चाहिए। उनकी इच्छा के अनुरूप प्लेटफार्म दें। ताकि वह भी मां बाप के सपने पूरा कर सकें।
- भावना चौहान का कहना है कि हमें रुढ़िवादी सोच से ऊपर उठकर बेटों के समान बेटियों को अधिकार देने चाहिए।
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छात्राएं
- छात्रा कविता का कहना है कि यदि उनको भी सभी सुविधाएं मिले, तो वह भी कामयाबी का आयाम स्थापित कर देश सेवा कर सकती है।
- छात्रा सलोनी का कहना है कि अब उन्हें डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें मुसीबत के समय कानून का सहारा लेना चाहिए। इससे उत्पीड़न में कमी आएगी।
- नेहा गुर्जर का कहना है कि वह उच्च शिक्षा ग्रहण कर जज बनकर देश की सेवा करना चाहती है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए सहयोग करना चाहती है।
- छात्रा नीलम सैनी का कहना है कि अमर उजाला की अच्छी पहल है। वह महिलाओं को जागरूक करने का हरसंभव प्रयास कर अभियान चला रहे है।
- छात्रा रितिका का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम से परिस्थिति से लड़ने की प्रेरणा मिलती है। हमारी जिम्मेदारी है कि दूसरों को भी जागरूक करें।
- छात्रा कर्णम का कहना है कि बेटियों को बोझ न समझ कर उन्हें उड़ने के लिए पंख दें। ताकि वह भी अपने व मां बाप के सपनों को साकार कर सके।
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