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माता के दर्शन के लिए मंदिरों में उमड़ी भीड़
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बिजनौर में पहले नवरात्र पर मां चामुंडा देवी मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रृद्धालु।
- फोटो : BIJNOR
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माता के दर्शन के लिए मंदिरों में उमड़ी भीड़
बिजनौर। चैत्र नवरात्र के पहले दिन नगर के विभिन्न मंदिरों में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने माता रानी के दरबार में पूजा अर्चना की। माता रानी से शक्ति व भक्ति का वरदान मांगते हुए शांति-खुशहाली और समृद्धि बनाए रखने की कामना की। माता काली मंदिर, माता चामुंडा मंदिर पर सुबह से ही दर्शनों के लिए लंबी लाइनें लगी थी। दर्शनों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। काली मंदिर व चामुंडा मंदिर को फूलों व झालरों से सजाया गया है। घरों में भी कलश स्थापना कर कर पूजा की गई।
प्राचीन सिद्धपीठ है मां काली का मंदिर
बिजनौर। शहर में झालू मार्ग पर स्थित मां काली का मंदिर प्राचीन सिद्धपीठ में गिना जाता है। करीब 400 साल पुराना यह सिद्धपीठ भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि दूर दराज से भी माता के भक्त यहां मत्था टेकने आते हैं। सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता के मंदिर में पूरी होती है।
मां काली मंदिर के पुजारी चंद्रप्रकाश बताते हैं कि यह प्राचीन सिद्धपीठ है, कहा जाता है कि यहां माता स्वयं प्रकट हुई थी। जिसके बाद से भक्तों ने यहां पर पूजा अर्चना शुरू की। समय बीतने के साथ ही यहां माता का विशाल मंदिर खड़ा हो गया। पुजारी रमाशंकर बताते हैं कि यह सिद्धपीठ बाबा बजरंगी की तपस्थली भी रहा है। मंदिर को चार सौ साल पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि मां का ऐसा सिद्धपीठ दूसरी जगह काशीपुर में है। मां काली के मंदिर में चैत्र शुक्ल की अष्टमी को मेला लगता है। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही है। वहीं यहां पर होने वाले विशाल भंडारे में भक्तों की संख्या पंद्रह हजार से अधिक रहती है।
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बिजनौर। चैत्र नवरात्र के पहले दिन नगर के विभिन्न मंदिरों में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने माता रानी के दरबार में पूजा अर्चना की। माता रानी से शक्ति व भक्ति का वरदान मांगते हुए शांति-खुशहाली और समृद्धि बनाए रखने की कामना की। माता काली मंदिर, माता चामुंडा मंदिर पर सुबह से ही दर्शनों के लिए लंबी लाइनें लगी थी। दर्शनों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। काली मंदिर व चामुंडा मंदिर को फूलों व झालरों से सजाया गया है। घरों में भी कलश स्थापना कर कर पूजा की गई।
प्राचीन सिद्धपीठ है मां काली का मंदिर
बिजनौर। शहर में झालू मार्ग पर स्थित मां काली का मंदिर प्राचीन सिद्धपीठ में गिना जाता है। करीब 400 साल पुराना यह सिद्धपीठ भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि दूर दराज से भी माता के भक्त यहां मत्था टेकने आते हैं। सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता के मंदिर में पूरी होती है।
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मां काली मंदिर के पुजारी चंद्रप्रकाश बताते हैं कि यह प्राचीन सिद्धपीठ है, कहा जाता है कि यहां माता स्वयं प्रकट हुई थी। जिसके बाद से भक्तों ने यहां पर पूजा अर्चना शुरू की। समय बीतने के साथ ही यहां माता का विशाल मंदिर खड़ा हो गया। पुजारी रमाशंकर बताते हैं कि यह सिद्धपीठ बाबा बजरंगी की तपस्थली भी रहा है। मंदिर को चार सौ साल पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि मां का ऐसा सिद्धपीठ दूसरी जगह काशीपुर में है। मां काली के मंदिर में चैत्र शुक्ल की अष्टमी को मेला लगता है। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही है। वहीं यहां पर होने वाले विशाल भंडारे में भक्तों की संख्या पंद्रह हजार से अधिक रहती है।

बिजनौर में पहले नवरात्र पर मां काली मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रृद्धालु।- फोटो : BIJNOR
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