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रामगंगा नदी में बांध का पानी आने से किसानों की फसलें हुई जलमग्न, किसानों की बैचनी बढ़ी
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रामगंगा नदी में बांध का पानी आने से फसलें जलमग्न
हरेवली। पहाड़ों पर हो रही वर्षा और कालागढ़ बांध से छोड़े पानी से रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने से जमीन का कटान होने लगा है। निचले भाग में लहलहाती धान, गन्ना और पशु चारे की फसलें जलमग्न हो गई है। फसलों के जलमग्न होने से बर्बादी को लेकर किसानों में बेचैनी बढ़ गई है।
लोगों का कहना है कि पहाड़ों की बारिश होती रही तो आधा दर्जन गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराएगा। बांध से पानी को छोड़े जाने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। उधर बैराज पर तैनात टंडेल सरताज हुसैन ने बताया कि रामगंगा के सभी 20 गेट खुले हैं। कालागढ़ बांध से 1407 क्यूसेक पानी पास हो रहा है। अभी बाढ़ का दूर तक कोई खतरा नहीं है। रामगंगा नदी के किनारे बसे गांव भगौता, शाहनगर कुराली, कुआं खेड़ा, खदरी, परमावाला, शाहकोट, कदंला आदि के ग्रामीण सुनील कुमार, होराम सिंह, नौबहार सिंह, सचिन कुमार, खूब सिंह, राम सिंह, कृपाल सिंह, जसवंत सिंह आदि का कहना है कि क्षेत्र में सन 2010 में भीषण बाढ़ आई थी। उस बाढ़ को देखते हुए इस बार भी बाढ़ का खतरा सता रहा है। लोगों का कहना है कि रामगंगा में चल रहा पानी किसानों की भूमि का कटान कर रहा है। जिससे खेतों में खड़ी गन्ने व धान की फसल बर्बाद हो रही है। जिसे लेकर किसान चिंता बढ़ गई है।
गौरतलब है कि सोमवार दोपहर बाद रामगंगा बांध प्रशासन ने बांध के 355 मीटर भरने के बाद बिजली उत्पादन के जरिए रामगंगा नदी में पानी छोड़ दिया है। हालांकि रामगंगा नदी की क्षमता एक लाख क्यूसेक पानी की है। लेकिन अभी पानी केवल 1407 क्यूसेक ही प्रवाहित हो रहा है।
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हरेवली। पहाड़ों पर हो रही वर्षा और कालागढ़ बांध से छोड़े पानी से रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने से जमीन का कटान होने लगा है। निचले भाग में लहलहाती धान, गन्ना और पशु चारे की फसलें जलमग्न हो गई है। फसलों के जलमग्न होने से बर्बादी को लेकर किसानों में बेचैनी बढ़ गई है।
लोगों का कहना है कि पहाड़ों की बारिश होती रही तो आधा दर्जन गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराएगा। बांध से पानी को छोड़े जाने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। उधर बैराज पर तैनात टंडेल सरताज हुसैन ने बताया कि रामगंगा के सभी 20 गेट खुले हैं। कालागढ़ बांध से 1407 क्यूसेक पानी पास हो रहा है। अभी बाढ़ का दूर तक कोई खतरा नहीं है। रामगंगा नदी के किनारे बसे गांव भगौता, शाहनगर कुराली, कुआं खेड़ा, खदरी, परमावाला, शाहकोट, कदंला आदि के ग्रामीण सुनील कुमार, होराम सिंह, नौबहार सिंह, सचिन कुमार, खूब सिंह, राम सिंह, कृपाल सिंह, जसवंत सिंह आदि का कहना है कि क्षेत्र में सन 2010 में भीषण बाढ़ आई थी। उस बाढ़ को देखते हुए इस बार भी बाढ़ का खतरा सता रहा है। लोगों का कहना है कि रामगंगा में चल रहा पानी किसानों की भूमि का कटान कर रहा है। जिससे खेतों में खड़ी गन्ने व धान की फसल बर्बाद हो रही है। जिसे लेकर किसान चिंता बढ़ गई है।
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गौरतलब है कि सोमवार दोपहर बाद रामगंगा बांध प्रशासन ने बांध के 355 मीटर भरने के बाद बिजली उत्पादन के जरिए रामगंगा नदी में पानी छोड़ दिया है। हालांकि रामगंगा नदी की क्षमता एक लाख क्यूसेक पानी की है। लेकिन अभी पानी केवल 1407 क्यूसेक ही प्रवाहित हो रहा है।
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